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अलविदा 2017: सोशल मीडिया कैंपेन, जिन्होंने दुनिया की आंखें खोलीं

हम साल 2017 खत्म होने पर ऐसे ही कैंपेन और मुद्दों पर नजर डाल रहे हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया के जरिए वास्तविकता को प्रभावित किया

Updated On: Dec 26, 2017 06:05 PM IST

FP Staff

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अलविदा 2017: सोशल मीडिया कैंपेन, जिन्होंने दुनिया की आंखें खोलीं

अगर कहा जाए कि साल 2017 सोशल मीडिया के नाम रहा तो, गलत नहीं होगा. इस साल सोशल मीडिया पर ऐसे कई मुद्दे उठाए गए, जिनके बारे में सामान्य तौर पर बात नहीं की जाती. सोशल मीडिया इस साल हक, आजादी और अपनी बात सबके सामने रखने में आगे रहा. इस साल ने कई तरह के ऐसे सोशल कैंपेन देखे, जो पहले इतने बड़े स्तर पर नहीं उठाए गए थे.

हम साल 2017 खत्म होने पर ऐसे ही कैंपेन और मुद्दों पर नजर डाल रहे हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया के जरिए वास्तविकता को प्रभावित किया.

#METOO

इस साल का सबसे बड़ा कैंपेन रहा #METOO. इस कैंपेन के जरिए उन महिलाओं ने अपनी आवाज उठाई, जिन्होंने यौन शोषण का सामना किया और इसके खिलाफ आवाज उठाने का अबतक उन्हें साहस नहीं हुआ था. दुनिया भर में इस कैंपेन की आवाज पहुंची और ऐसी-ऐसी शख्सियतों ने अपने साथ हुई घटनाओं का खुलासा किया कि पूरी दुनिया हैरान रह गई. इनमें सलमा हायक, जूलियन मूर, टेलर स्विफ्ट जैसे हॉलीवुड के काफी बड़े-बड़े नाम शामिल रहे. सालों से कथित रूप से इंडस्ट्री की महिलाओं का यौन शोषण कर रहे फिल्म प्रोड्यूसर हार्वे विन्सटीन के खिलाफ इन महिलाओं ने मुहिम छेड़ दी. लंदन, न्यूयॉर्क और बेवरली हिल्स की पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं.

#NotInMyName

भारत में इस साल इस कैंपेन का बड़ा बोलबाला रहा. और खास बात ये रही कि ये प्रोटेस्ट महज सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं रहा. दिल्ली, मुंबई समेत देश के कई शहरों में लोग #NotInMyName की तख्ती लेकर सड़कों पर उतरे. ये विरोध प्रदर्शन देश भर में राष्ट्र, हिंदू और देशभक्ति के नामपर मुस्लिम और दलितों के खिलाफ हुई हिंसक घटनाओं के विरोध में किया गया था. पिछले साल शुरू हुई लिंचिंग की घटनाओं में इस साल कमी तो आई लेकिन मुद्दा गरमाया रहा. ये विरोध प्रदर्शन तब शुरू हुआ जब हरियाणा के जुनैद खान की बीफ खाने का आरोप लगाकर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. इस विरोध प्रदर्शन में देश की बड़ी शख्सियतों, जैसे- गिरीश कर्नाड, रामचंद्र गुहा रब्बी शेरगिल जैसे लोग थे. ये विरोध प्रदर्शन फिल्ममेकर सबा दीवान की ओर से शुरू किया गया था.

not in my name

#NotAllMan

वैसे तो ये मुद्दा काफी पुराना है लेकिन इस साल फिर सोशल मीडिया पर इस फ्रेज का इस्तेमाल किया गया साथ ही इसकी आलोचना भी हुई. ये फ्रेज पहली बार 2004 में इस्तेमाल किया गया था लेकिन पिछले कुछ सालों में जबसे फेमिनिज्म पर बहस तेज हुई, उसके समानांतर इस फ्रेज का चलन भी बढ़ा है. इस साल महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन शोषण और कमतर व्यवहार पर काफी बातें की गईं, इसी पर सोशल मीडिया पर लोगों ने #NotAllMan के तर्क पेश करने शुरू किए. लोगों का कहना था कि हर मर्द औरतों के साथ बुरा सुलूक नहीं करता या हर व्यक्ति सेक्सिस्ट नहीं होता. इसकी काफी आलोचना हुई ये कहकर कि ये बेकार का तर्क महिलाओं के हक और उनकी बेहतरी के लिए उठाए जा रहे मुद्दों को कमजोर करता है.

#WomenMarch

साल 2017 की शुरुआत ही इस प्रदर्शन के साथ हुई. इस प्रदर्शन को अमेरिका के इतिहास में एक दिन में होने वाला अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन कहा गया. 21 जनवरी, 2017 को डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ग्रहण किया, जिसके विरोध में वॉशिंगटन में लाखों महिलाओं ने मार्च निकाला. ट्रंप ने अपने कैंपेन और उसके पहले कई महिला-विरोधी बयान दिए थे, जिसके विरोध में महिलाएं अपनी आवाज बुलंद करने सड़कों पर उतरी थीं.

Women's_March_(VOA)_01

#DeleteUber

टैक्सी प्रोवाइडिंग सर्विस ऐप उबर के लिए ये साल बहुत ही बदतर रहा. और कंपनी ने इस साल काफी गलतियां कीं. डोनाल्ड ट्रंप के मुस्लिम बैन के खिलाफ न्यूयॉर्क में हुए स्ट्राइक के दौरान कंपनी ने सेल्फ-प्रमोशन कर डाला, जिसकी काफी आलोचना की गई. लोगों ने कंपनी के खिलाफ #DeleteUber कैंपेन भी चलाया.

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