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आखिर क्यों खराब हो रहे हैं पाकिस्तान और UAE के संबंध?

दुबई के सामान्य सुरक्षा के मुखिया खालफान ने यूएई में रहने वाले पाकिस्तानियों पर काफी नाराजगी जताई है और उन्हें अपराधियों और ड्रग तस्करों तक की संज्ञा दे डाली है

Updated On: Apr 06, 2018 08:47 AM IST

Ashok K Singh

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आखिर क्यों खराब हो रहे हैं पाकिस्तान और UAE के संबंध?

पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच संबंध अब सामान्य नहीं रहे हैं. दुबई पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दाही खालफान के हालिया ट्वीट्स से इस बात की पुष्टि होती है जिसमें उन्होंने पाकिस्तानियों की काफी लानत मलानत की है.

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दुबई के सामान्य सुरक्षा के मुखिया खालफान ने यूएई में रहने वाले पाकिस्तानियों पर काफी नाराजगी जताई है और उन्हें अपराधियों और ड्रग तस्करों तक की संज्ञा दे डाली है. अपने ट्वीट्स की श्रृंखला में खालफान ने तो दुबई के प्रशासकों से पाकिस्तानियों को नौकरी न देने तक की अपील कर दी है. मजेदार बात तो ये है कि खालफान ने पाकिस्तानियों की तुलना भारतीयों से करके जहां भारतीयों को अनुशासित बताया है वहीं पाकिस्तानियों को तस्करी और अपराध में लिप्त रहने वाला घोषित किया है.

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'पाकिस्तान को शर्मिंदा न करें'

खालफान की छवि सख्त पुलिस मुखिया की है. खालफान को माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर का सहारा लेकर पाकिस्तानियों पर इसलिए हमला करना पड़ा क्योंकि वहां की पुलिस लागातार पाकिस्तानियों द्वारा किए जा रहे अपराधों से परेशान थी. कुछ समय पहले ही कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को दुबई पुलिस ने ड्रग्स की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था. खालफान की पाकिस्तानी नागरिकों के प्रति नाराजगी ने ट्विटर पर हलचल मचा दी है. पाकिस्तानी नागिरकों ने इस ट्वीट के जवाब में खेद और गुस्सा व्यक्त किया है. कई लोगों ने तो खालफान ने अनुरोध किया है कि वो पाकिस्तान और पाकिस्तानियों को निशाना बना कर उन्हें शर्मिंदा न करें.

एक यूजर ने लिखा है कि पाकिस्तान को शर्मिंदा न करें. पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर बना राष्ट्र है और मुस्लिम वर्ल्ड में एकमात्र परमाणु क्षमता वाला राष्ट्र है. जबकि दूसरे ने लिखा है कि पाकिस्तानियों की बेइज्जती ना करें. पाकिस्तानी यूएई को अपना दूसरा घर समझते हैं.

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सवाल ये उठता है कि आखिर खालफान ने पाकिस्तानियों पर अपनी नजर टेढ़ी क्यों की है जबकि यूएई में रहने वाले पाकिस्तानियों की संख्या अच्छी खासी है. क्या खालफान का ट्वीट केवल पाकिस्तानियों के अपराधिक कृत्यों में पकड़े जाने के खुलासे के बाद का गुस्सा भर है या फिर कहीं इसका कोई और भी गंभीर मतलब है.

हो सकता है खालफान कि ये अपनी सोच हो लेकिन फिर भी सुरक्षा प्रमुख होने की वजह से वो इस मामले में बेवजह की बयानबाजी करके पाकिस्तान और यूएई के बीच के द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित नहीं कर सकते. दरअसल खालफान ने ये ट्वीट पूरी तरह से सोच समझ कर किया है और उनका ये ट्वीट ये बताने के लिए काफी है कि पाकिस्तान और यूएई के संबंधों के बीच गर्माहट की जगह टकराहट ने ले ली है.

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खालफान के ट्वीट से ये साफ हो गया कि पाकिस्तान और यूएई के बीच संबंधों में अविश्वास बढ़ रहा है. इसके साथ ये भी समझ में आ रहा है कि पाकिस्तान के पारंपरिक सहयोगी रहे गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के साथ पाकिस्तान के समीकरण मेल नहीं खा रहे.

जहां तक पाकिस्तान और यूएई के संबंधों का सवाल है तो ये मुख्य रूप दो वजहों से प्रभावित हो रहे हैं. पहला प्रमुख कारण तो आपसी अविश्वास और संदेह वाणिज्य व्यापार से जुड़ा हुआ है लेकिन इनके बीच की दूरी की दूसरी प्रमुख वजह खालिस राजनीति है

कई रणनीतिक विश्लेषकों के अनुसार दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और दूरी की वजह ग्वादर पोर्ट का विकास है जिसके लिए पाकिस्तान को चीन की ओर से मदद और निवेश किया जा रहा है. यूएई को लगता है कि ग्वादर के विकसित होने से वो दुबई के पोर्ट राशिद और पोर्ट जाबेल के कड़े प्रतिद्वंद्वी साबित हो जाएंगे.

यूएई पाकिस्तान के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं है

ग्वादर पोर्ट रणनीतिक रूप से दुबई के बंदरगाहों से ज्यादा रणनीतिक और सुविधायुक्त जगह पर स्थित है और इसी वजह से ये संभव है कि ये अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए ज्यादा उपयुक्त साबित होगा. इसके अलावा ग्वादर न केवल चीन बल्कि मध्य एशिया तक के व्यापार के अहम कड़ी साबित हो सकता है, ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ग्वादर के पूरी तरह से विकसित होने के बाद दुबई के दो प्रमुख बंदरगाहों से अतंरराष्ट्रीय व्यापार जगत की निगाहें ग्वादर की ओर मुड़ जाए.

दुबई को इसको लेकर लंबे समय से ये डर बना रहा है कि ग्वादर गल्फ, मिडिल ईस्ट और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उसके प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है. अभी मिडिल ईस्ट और सेंट्रल एशिया जानेवाले अधिकतर कंटेनरों का ट्रैफिक दुबई के बंदरगाहों से ही होकर गुजरता है. लेकिन अगर ग्वादर व्य़ापारियों को बेहतर कनेक्टिविटी देने में सफल रहेगा तो जाहिर है दुबई के बंदरगाहों का महत्व कम होगा.

यूएई और पाकिस्तान के बीच की तल्खी की एक वजह भारत और यूएई के रिश्तों के बीच की गर्माहट भी है. मोदी सरकार के गल्फ को महत्व देने की वजह से दोनों देशों के बीच संबंध लगातार अच्छे होते जा रहे हैं. भारत और यूएई के बीच दोस्ती की वजह से भी यूएई पाकिस्तान के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को लेकर ज्यादा चिंतित नहीं हैं.

एक और महत्वपूर्ण रणनीतिक और मुद्दा है जो कि पाकिस्तान और यूएई के बीच संबंधों को प्रभावित कर रहा है और वो है गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के अंदर की प्रतिद्वंदिता. दोनों देशों के बीच में आपसी अविश्वास उत्पन्न होने की वजह है सऊदी अरब और कतर के बीच का विवाद. सऊदी अरब का साथ बहरीन और मिस्र भी दे रहे हैं. 2017 में सऊदी और बाकी उसके दोनों मित्र देशों ने कतर को जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया. इसके अलावा उन्होंने कतर के साथ अपने संबंधों को ये कहते हुए समाप्त कर दिया कि कतर आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है. उन्होंने कतर से अपने राजदूत तक वापस बुला लिए.

पाकिस्तान के साथ समस्या ये है कि ये गल्फ राष्ट्रों के एक दूसरे गुटों की आपसी लड़ाई के बीच में फंस गया है. उसे न तो निगलते बन रहा है न तो उगलते बन रहा है. हालांकि पाकिस्तान का सऊदी अरब के राजघरानों के साथ बढ़िया संबंध हमेशा से रहा है यहां तक कि वहां के राजघरानों ने पाकिस्तान की काफी आर्थिक मदद भी की है.

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तस्वीर: प्रतीकात्मक

पाकिस्तान और टर्की के बीच पहले से ही मधुर संबंध रहे हैं

पाकिस्तान ने सऊदी अरब में प्रशिक्षण के नाम पर अतिरिक्त फोर्स भेजने का फैसला किया है. पाकिस्तान ने इसके माध्यम से सऊदी अरब की भावनाओँ को शांत करने का प्रयास किया है. यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व में हाउथी विद्रोहियों के खिलाफ जंग में पाकिस्तान के उपर सेना भेजने का जबरदस्त जवाब था. हाउथी विद्रोहियों को ईरान का समर्थन है. ऐसे में सऊदी अरब और ईरान के झगड़े के बीच में पाकिस्तान अपने को फंसा हुआ नहीं पाना चाहता था. पाकिस्तान ने बड़ी मुश्किल से इस स्थिति से खुद को बचाया है लेकिन अभी भी ये मुद्दा रियाध और अबु धाबी के भड़कने की वजह बना हुआ है.

सऊदी अरब और कतर के विवाद में पाकिस्तान के लिए फैसला लेना और भी पेचीदा है. इस विवाद में सऊदी अरब और उसके मित्र देशों के विरोध में टर्की ने अपना पूरा समर्थन कतर को दे दिया है. टर्की के राष्ट्रपति रेसेप एरडोगन का मिडल ईस्ट में ओटोमन सुल्तान की तरह खुद को प्रस्तुत करने की महत्वाकांक्षा है. एरडोगन सुन्नी मुसलमानों का मुखिया बनने का ख्वाब देख रहे हैं जिससे सऊदी अरब और यूएई काफी चिढ़ते हैं.

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पाकिस्तान और टर्की के बीच पहले से ही मधुर संबंध रहे हैं लेकिन एरडोगन ने दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने का काम किया है. मार्च 2017 में टर्की की सेना ने पाकिस्तान के नेशनल डे परेड में चीनी सेना के साथ भाग लिया था. इसके अलावा एरडोगन ने पाकिस्तान का साथ उन मामलों में भी दिया है जिस पर उसका साथ उसके निकटतम सहयोगी चीन ने भी नहीं दिया. अभी हाल ही में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के पाकिस्तान को आंतकियों को धन देने के मामले में निगरानी रखने के निर्णय का टर्की ने विरोध किया जबकि अमेरिकी दबाव की वजह से सऊदी अरब को इस प्रस्ताव के पक्ष में खड़ा होना पड़ा.

यहां ये भी याद रखना होगा कि एरडोगन ने पिछले साल अप्रैल-मई की अपनी भारत यात्रा के दौरान भारत पाकिस्तान के बीच विवादित कश्मीर के मुद्दे पर अपनी राय देते हुए कहा था कि कश्मीर पर कई पक्षों के बीच बातचीत होनी चाहिए. कश्मीर पर पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा रहने से ये आसानी से समझा जा सकता है कि पाकिस्तान की अहमियत टर्की के लिए कितनी ज्यादा है.

टर्की की कतर से नजदीकी ने सऊदी अरब और यूएई को नाराज कर दिया है. वैसे टर्की के साथ सऊदी की नाराजगी नई नहीं है और उसके नेता टर्की के नेताओं पर मीडिया और सोशल मीडिया में आरोप लगाते रहे हैं.

टर्की और पाकिस्तान के संबंधों के वजह से ही पाकिस्तान और ईरान के बीच संबंधों में भी गर्माहट आई है जाहिर है ऐसे में दुबई के सुरक्षा प्रमुख का पाकिस्तानियों पर भड़कना केवल कुछ पाकिस्तानियों के गिरफ्तार होने से नहीं है बल्कि इसमें दूरंदेशी संदेश छिपा हुआ है.

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