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भारत से वार्ता की पेशकश को लेकर इमरान खान क्यों हुए आलोचना के शिकार ?

पाकिस्तान के विपक्षी सांसदों ने संसद को विश्वास में लिए बगैर भारत से दोबारा वार्ता की पेशकश करने पर प्रधानमंत्री इमरान खान की आलोचना की है

Updated On: Sep 28, 2018 11:09 AM IST

Bhasha

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भारत से वार्ता की पेशकश को लेकर इमरान खान क्यों हुए आलोचना के शिकार ?

आतंकवाद और कश्मीर समेत अहम मुद्दों पर भारत से बातचीत करने वाले प्रस्ताव को लेकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की उन्हीं के देश में आलोचना हो रही है. पाकिस्तान के विपक्षी सांसदों ने संसद को विश्वास में लिए बगैर भारत से दोबारा वार्ता की पेशकश करने पर प्रधानमंत्री इमरान खान की आलोचना की है.

पिछले महीने प्रधानमंत्री बने पूर्व क्रिक्रेटर खान ने 14 तारीख को एक पत्र लिखकर इस महीने न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के मौके पर विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और उनकी भारतीय समकक्ष सुषमा स्वराज के बीच भेंटवार्ता का प्रस्ताव रखा था.

पाकिस्तानी सीनेट के पूर्व सभापति और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता मियां रजा रब्बानी ने कहा कि खान की भारत के साथ वार्ता की पेशकश कश्मीर की स्थिति के मद्देनजर समझ से परे है. मोदी का पत्र तो प्रतीकात्मक था जबकि उसके जवाब में लिखे गए पत्र में वार्ता की पेशकश कर दी गई.

असल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अगस्त को पाकिस्तान के नव निर्वाचित प्रधानमंत्री के लिए एक पत्र लिखा था. जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के साथ ‘सार्थक’ और ‘रचनात्मक’ संवाद की दिशा में बढ़ने की कटिबद्धता प्रदर्शित की थी और आतंकवाद मुक्त दक्षिण एशिया के लिए काम करने की आवश्यकता पर बल दिया था.

पाकिस्तान आतंकवाद पर चर्चा के लिए कैसे तैयार हो सकता है:रजा रब्बानी

खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पत्र के जवाब में भारत के साथ वार्ता की पेशकश कर दी. इसी पर आपत्ति जताते हुए विपक्ष अब खान पर हावी होने की कोशिश कर रहा है. विपक्ष के नेता रजा रब्बानी का कहना है कि हमें खान के पत्र की भाषा पर एतराज है. पाकिस्तान आतंकवाद पर चर्चा के लिए कैसे तैयार हो सकता है.

जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फज्ल के सीनेटर अब्दुल गफूर हैदरी ने सवाल किया कि कैसे कोई एक व्यक्ति भारत के साथ वार्ता की पेशकश कर सकता है. उन्होंने संसद को विश्वास में नहीं लेने पर खान की आलोचना की और  सावधानीपूर्वक आगे बढ़ने की ताकीद की.

सरकार की ओर से सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने सफाई दी कि खान ने उन्हें मिले पत्र का जवाब दिया था. पाकिस्तान जम्मू कश्मीर के अहम मुद्दे समेत भारत के साथ सभी विवादों का हल चाहता है.

उन्होंने कहा, 'दोनों देश 70 सालों से लड़ते आ रहे हैं और यदि भारत चाहेगा तो हम अगले 70 साल भी लड़ाई जारी रख सकते हैं. लेकिन यदि परमाणु युद्ध छिड़ गया तो पूरा उपमहाद्वीप तबाह हो जाएगा.'

पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ के फैसल जावेद ने कहा कि इन मुद्दों पर अंक बनाने की कोशिश चल रही है जबकि इस पर सभी राजनीतिक दलों के बीच पूर्ण एकता की जरुरत है.

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