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नवाज शरीफ के बाद अब क्या होगा पाकिस्तान का भविष्य?

नवाज की बर्खास्तगी के साथ शाहबाज शरीफ के प्रधानमंत्री बनने की चर्चा तेज हो गई है

Updated On: Jul 28, 2017 03:57 PM IST

FP Staff

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नवाज शरीफ के बाद अब क्या होगा पाकिस्तान का भविष्य?

नवाज शरीफ को पनामागेट मामले में दोषी करार दिया गया है. पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें प्रधानमंत्री पद से भी बर्खास्त कर दिया है. अब ऐसे में नवाज शरीफ को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. अपने और परिवार के ऊपर लगे आरोपों से कैसे पीछा छुड़ा पाएंगे पाक के पूर्व प्रधानमंत्री.

अब सवाल उठता है नवाज की बर्खास्तगी के बाद पाक की सत्ता किसके हाथ लगेगी. पाक अखबार ‘डॉन’ के मुताबिक शरीफ के बाद केअरटेकर पीएम पाकिस्तान की कमान संभालेगा. खबर में कहा गया कि अगर मिड-टर्म चुनाव शरीफ के बिना होते हैं तो पीएमएल (एन) नेताओं को अपनी छवि सुधारने में मदद मिलेगी. और वह इससे जेआइटी के सवालों से भी आराम से बच सकते हैं.

मौजूदा मंत्रियों में से हो सकता है नया प्रधानमंत्री

पाक के नए प्रधानमंत्री का आइडिया वहां के नेताओं के दिमाग में तभी आ गया था. जब अप्रैल में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ पर लगे आरोपों की जांच का आदेश दिया था. वैसे भी 2018 में पाकिस्तान में चुनाव होने वाले थे. शरीफ का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया.

नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन के पास पार्लियामेंट में बहुमत है. शरीफ की बर्खास्तगी से उनकी पार्टी नया प्रधानमंत्री भी नियुक्त कर सकती है. मौजूदा मंत्रियों में से एक अंतरिम अध्यक्ष का शपथ ग्रहण करवाया जा सकता है. ऐसा करने में पार्टी को कोई परेशानी भी नहीं होगी.

पनामागेट मामले में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ बर्खास्त

पनामागेट मामले में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ बर्खास्त

नवाज पंजाब के मुख्यमंत्री को बनवाना चाहते हैं प्रधानमंत्री

दूसरी तरफ उम्मीद है कि नवाज शरीफ संभवतः अपने करीबी राजनीतिक सहयोगी और भाई शाहबाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद के लिए नामित कर सकते हैं. शाहबाज फिलहाल पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री हैं. उन्हें प्रधानमंत्री बनने से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा. ऐसे में उम्मीद ये भी की जा रही है कि शाहबाज अपने बेटे को पंजाब का मुख्यमंत्री बना सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने 67 वर्षीय शरीफ और उनके परिवार पर लगे मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के लिए छह सदस्यों वाली जेआईटी गठित की थी. इसे जांच करनी थी कि शरीफ परिवार ने 1990 के दशक में लंदन में जो संपत्तियां खरीदीं, उसके लिए धन कहां से आया.

जेआईटी ने सिफारिश की थी कि रिपोर्ट का दसवां खंड गोपनीय रखा जाए क्योंकि इसमें दूसरे देशों के साथ पत्राचार का ब्योरा है.

जांच टीम के द्वारा मुहैया कराए गए दस्तावेजों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल का फैसला किया है. सूत्रों ने न्यूज़18 से कहा था कि शरीफ का परिवार अपने ऊपर लगे आरोपों के खिलाफ लड़ेगा. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जांच टीम और शरीफ सरकार के बीच टकराव भी हुआ है. जेआईटी का आरोप है कि सरकार जांच में रोक लगा रही थी.

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