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फिलिस्तीन: यरुशलम पर फैसले के बाद गाज़ा पट्टी में भड़की हिंसा

फिलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा कि ट्रंप का यह कदम अमेरिका को पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की पारंपरिक भूमिका के लिए अयोग्य ठहराता है

Bhasha Updated On: Dec 08, 2017 10:19 AM IST

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फिलिस्तीन: यरुशलम पर फैसले के बाद गाज़ा पट्टी में भड़की हिंसा

यरूशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवादित फैसले के बाद गज़ा पट्टी और इजरायली कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में हिंसा भड़क गई. वेस्ट बैंक में जहां सैकड़ों फिलस्तीनी प्रदर्शनकारियों की इजरायली जवानों से झड़प हो गई, वहीं गाज़ा में कार्यकर्ताओं ने ट्रंप के पोस्टर जलाए.

इजरायली जवानों पर पथराव

गाज़ा का प्रशासन चला रहे हमास के नेता ने गुस्सा जाहिर करने के लिए नए सैन्य आंदोलन का आह्वान किया. प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी और इजरायली झंडे भी जलाए. पश्चिमी तट में प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने टायरों में आग लगा दी और इजरायली जवानों पर पथराव किया. वहीं बेथलेहम में जवानों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले छोड़े गए.

ट्रंप की इस घोषणा की कई देशों ने आलोचना की है. अमेरिका के कई सहयोगियों और साझेदारों ने भी इस विवादास्पद निर्णय की निंदा की है. तुर्की के राष्ट्रपति रजब तयब एर्दोग़ान ने आगाह किया कि इससे क्षेत्र 'आग के गोले' में बदल जाएगा.

इजरायली प्रधानमंत्री ने फैसले को बताया ऐतिहासिक

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप की प्रशंसा करते हुए इसे ऐतिहासिक फैसला बताया और अन्य देशों से भी इसका अनुसरण करने को कहा.

फिलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा कि ट्रंप का यह कदम अमेरिका को पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की पारंपरिक भूमिका के लिए अयोग्य ठहराता है.

सऊदी अरब ने फैसले को बताया गैर-जिम्मेदाराना

सऊदी अरब ने ट्रंप के इस कदम को अनुचित और ग़ैर जिम्मेदाराना बताया है. इस बीच पूर्वी यरुशलम, पश्चिमी तट आदि क्षेत्रों में फिलस्तीनी दुकानें बंद रहीं. आम हड़ताल के आह्वान के बाद स्कूल भी बंद रहे.

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने कहा कि वह इस घोषणा और अमेरिकी दूतावास को वहां स्थानांतरित करने के कदम से सहमत नहीं है. उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि इस क्षेत्र में शांति की संभावनाएं तलाशने की दिशा में यह मददगार साबित नहीं होगा.

जर्मनी ने कहा कि वह ट्रंप के इस फैसले का समर्थन नहीं करता. उधर, ट्रंप की घोषणा के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शुक्रवार को एक बैठक बुलाई है.

सुरक्षा परिषद के 15 में से कम से कम आठ सदस्यों ने वैश्विक निकाय से एक विशेष बैठक बुलाने की मांग की है. बैठक की मांग करने वाले देशों में दो स्थायी सदस्य ब्रिटेन और फ्रांस तथा बोलीविया, मिस्र, इटली, सेनेगल, स्वीडन, ब्रिटेन और उरुग्वे जैसे अस्थायी सदस्य शामिल हैं.

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