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अमेरिका: बड़े अखबारों की ट्रंप को हराने की अपील

चुनाव से ऐन पहले अमेरिकी अखबारों ने जनता के सामने अपनी राय रखी है...

Pawas Kumar Updated On: Nov 21, 2016 07:31 AM IST

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अमेरिका: बड़े अखबारों की ट्रंप को हराने की अपील

अमेरिका अपने 45वें राष्ट्रपति का चुनाव कर रहा है. आने वाले कुछ घंटों में फैसला हो जाएगा कि हिलेरी या ट्रंप में से कौन वाइट हाउस का अगला बाशिंदा बनेगा.

इसी के साथ साल भर से अधिक समय से चल रहे चुनाव प्रचार का अंत हो जाएगा. विशेषज्ञों और आलोचकों ने इसे अमेरिका का सबसे 'बुरा और नकारात्मक' चुनाव प्रचार बताया है.

चुनाव से ऐन पहले अपने संपादकीय लेखों में अमेरिकी अखबारों ने भी जनता के सामने अपनी राय रखी है.

न्यूयॉर्कटाइम्स में अपने लेख में हैरी बेलाफोंटे ने लिखा है कि डोनाल्ड ट्रंप की जीत हुई तो अमेरिका के सामने उस सपने को गंवाने का खतरा होगा जो इस देश का आधार है.

उन्होंने लिखा है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप की जीत होती है तो 70 साल की उम्र में वह अब तक के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति होंगे. इसके बावजूद ट्रंप के भीतर एक अपरिपक्वता और लापरवाही है. वह बदलाव लाना चाहते हैं लेकिन उनके बदलाव का मतलब उठापटक और तोड़-फोड़ है.

यूएसए टुडे ने भी सीधे ट्रंप के विरोध आते हुए लिखा है कि उनके नेतृत्व का तरीका किसी संवैधानिक देश के बदले किसी 'बनाना रिपब्लिक' के लिए सही लगता है.

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अखबार ने उन मतदाताओं से, जिन्होंने अपना वोट अभी तय नहीं किया है, से अपील की है कि वह ट्रंप के खिलाफ वोट करें. अखबार ने लिखा है कि ट्रंप हारना और नजरअंदाज किए जाना बिल्कुल पसंद नहीं करते लेकिन जैसी उनके गंदे चुनाव कैंपेन के बाद उनके साथ यही किया जाना चाहिए.

वॉशिंगटन पोस्ट ने चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी के तौर-तरीकों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पार्टी और खासकर ट्रंप कैंपेन की ओर से कुछ खास वर्ग के मतदाताओं को वोटिंग से रोकने की कोशिश हो रही है.

अखबार ने ध्यान दिलाया है कि जहां अमेरिका में जल्दी मतदान करने की संख्या बढ़ी है, वहीं अश्वेत अमेरिकियों में यह संख्या घटी है.

फॉक्स न्यूज की वेबसाइट पर प्रकाशित लेख में पैट्रिक कैडल ने कहा है कि इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत आम जनता का 'विद्रोह' है. उन्होंने लिखा है कि यह विद्रोह राजनीतिक और आर्थिक इलीट क्लास के खिलाफ है. बर्नी सैंडर्स और डोनाल्ड ट्रंप को मिली सफलता इसी का परिणाम हैं. कैडल का कहना है कि चुनाव परिणाम जो भी हों लेकिन यह विद्रोह अब नहीं थमेगा.

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