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अमेरिका ने की पाकिस्तान के लिए सैन्य मदद के बजट में कटौती

अमेरिका ने इस रक्षा बिल में साल 2018 वित्तीय वर्ष के लिए रक्षा खर्च में 696 अरब डॉलर का रखा गया है

Updated On: Jul 15, 2017 01:42 PM IST

FP Staff

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अमेरिका ने की पाकिस्तान के लिए सैन्य मदद के बजट में कटौती

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा कांग्रेस ने शुक्रवार को 696 बिलियन डॉलर का रक्षा नीति बिल पारित किया. इसमें पाकिस्तान को मिलने वाली अमेरिकी सैन्य सहायता पर लगाम कसने के प्रावधान शामिल हैं. ये बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बजट अनुरोध से अधिक है.

अमेरिका ने इस रक्षा बिल में साल 2018 वित्तीय वर्ष के लिए रक्षा खर्च में 696 अरब डॉलर का रखा गया है. कोर पेंटागन के संचालन के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के अनुरोध पर लगभग 30 बिलियन डॉलर से अधिक राशि शामिल की गई है.

हालांकि, दूसरे कानून, राज्य विभाग और विदेशी परिचालनों के लिए ये राशि 10 बिलियन डॉलर तक कम है. यह साल 2017 के वित्तीय वर्ष के लगभग 57.4 अरब डॉलर से कम है. इसके बावजूद भी ये कटौती उतनी नहीं है जितना कि ट्रंप प्रशासन ने प्रस्ताव रखा था.

कुल मिलाकर ये विधेयक नियमित रूप से विवेकाधीन और ओवरसीज़ कॉन्टीजेंसी ऑपरेशनों (ओसीओ) के लिए 47.4 बिलियन डॉलर मुहैया कराता है. 2017 के सुरक्षा सहायता अनुमोदन अधिनियम में दी गई अतिरिक्त निधियों को बाद भी ये 2017 से 10 बिलियन डॉलर कम है.

इस दी गई राशि में ओसीओ फंडिंग 12 बिलियन डॉलर है जो कि इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रों में ऑपरेशन और सहायता का समर्थन करता है.

हाल ही के दिनों में अमेरिका ने पाकिस्तान को क्लीयर नोटिस भेजा है कि वह तालिबान को हराने के लिए अमेरिका और अफगानिस्तान सरकार की मदद करे. साथ ही अमेरिका ने ये भी कहा है कि ऐसा न करने पर उसे पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों पर दोबारा सोचना पड़ेगा.

हालांकि अभी भी अमेरिकी अधिकारियों और सांसदों ने तालिबान के साथ शांति वार्ता को करने का विकल्प भी रखा है. अप्रैल में अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स डब्लू टिलरसन ने ब्रुसेल्स में अमेरिका के नाटो सहयोगी से कहा था कि अफगान सरकार और तालिबान के बीच समझौता ट्रंप प्रशासन का अंतिम लक्ष्य है.

20 जनवरी को सत्ता में आने के बाद ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान-अफगान क्षेत्र की नीति को अब अंतिम रूप दे रहा है. मीडिया को हाल में मिली जानकारी से मालूम हुआ है कि ये नई रणनीति में अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना उपस्थिति "गुणात्मक और संख्यात्मक" रूप से बढ़ने का सुझाव देती है. हालांकि अफगानिस्तान बातचीत से इस निपटारे की तलाश जारी रखेगा.

साभार: न्यूज 18

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