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देशों को रूसी उपकरणों से मुक्त कराना CAATSA प्रतिबंधों से छूट का मकसद: US

व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता ने बताया, ‘CAATSA के मामले में राष्ट्रपति की ओर से रियायत देने की गुंजाइश काफी सीमित है, इसका मकसद देशों को रूसी उपकरणों से मुक्त करना और पहले खरीदे गए उपकरणों के लिए कुल-पुर्जे जैसी चीजों की इजाजत देना है’

Updated On: Oct 06, 2018 07:02 PM IST

Bhasha

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देशों को रूसी उपकरणों से मुक्त कराना CAATSA प्रतिबंधों से छूट का मकसद: US

भारत के रूस से एस-400 मिसाइलों के रक्षा करार पर औपचारिक रूप से दस्तखत किए जाने के बाद अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की ओर से इस बारे में रियायत दिए जाने के राष्ट्रपति के अधिकार सीमित हैं और इसका मकसद देशों को रूसी उपकरणों से मुक्त करना है.

इस करार के कारण भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है.

व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया, ‘काटसा के मामले में राष्ट्रपति की ओर से रियायत देने की गुंजाइश काफी सीमित है, इसका मकसद देशों को रूसी उपकरणों से मुक्त करना और पहले खरीदे गए उपकरणों के लिए कुल-पुर्जे जैसी चीजों की इजाजत देना है.’

भारत ने अत्याधुनिक एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की खरीद के लिए 5.4 अरब अमेरिकी डॉलर के रक्षा सौदे पर शुक्रवार को औपचारिक तौर पर दस्तखत किए थे.

एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को दुनिया का सबसे आधुनिक और उन्नत मिसाइल रक्षा माना जाता है

रूस के एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को दुनिया की सबसे आधुनिक और उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली मानी जाती है

अमेरिका भारत रणनीतिक और साझेदारी मंच के अध्यक्ष मुकेश आघी ने कहा, ‘भारत बहुत उथल-पुथल भरे और परमाणु क्षमता युक्त क्षेत्र में रहता है. एस-400 यह भरोसा देता है और अपने मौजूदा प्लैटफॉर्म के अनुकूल है. दोस्त समझते हैं कि रूस के साथ यह बातचीत कई साल पहले शुरू हुई, इसलिए मैं नहीं समझता कि अमेरिका भारत पर प्रतिबंध लगाएगा.’

जहां तक राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से रियायत दिए जाने का सवाल है, प्रतिबंध लगाकर अमेरिका के विरोधियों का मुकाबला करने का कानून (काटसा) के तहत प्रतिबंध लगाए जाने की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब कोई बड़ी खरीद हुई हो, जैसे कि एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली.

बता दें कि इस करार से पहले अमेरिका ने भारत से एस-400 की खरीद नहीं करने की अपील की थी. अमेरिका ने शुक्रवार को भी अपना यह रुख दोहराया था.

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