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अंतरिक्ष में अमेरिकी सेना के नए ‘अवतार’ से वर्ल्ड वॉर नहीं बल्कि स्टार वॉर होगा

निर्माता-निर्देश जेम्स कैमरून की ब्लॉक बस्टर फिल्म ‘अवतार’ कल्पना पर आधारित थी तो अब ट्रंप उस कल्पना को साकार कर अमेरिकी सेना का नया ‘अवतार’ देखना चाहते हैं

Updated On: Jun 21, 2018 10:44 AM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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अंतरिक्ष में अमेरिकी सेना के नए ‘अवतार’ से वर्ल्ड वॉर नहीं बल्कि स्टार वॉर होगा
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनॉल्ड रीगन ने एक बार कहा था कि अमेरिका को अपनी सुरक्षा के लिए अंतरिक्ष में मिसाइलों की छतरी लगानी चाहिए. दरअसल अमेरिका और सोवियत संघ के बीच चल रहे कोल्ड-वॉर को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने अंतरिक्ष में सैन्य ताकत को मजबूत करने पर जोर दिया था. उस दौर में रीगन का बयान किसी साइंस-फिक्शन फिल्म सा लग सकता था. लेकिन अमेरिका के लिए नामुमकिन कुछ भी नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ये जानते हैं. तभी उन्होंने अचानक स्पेस फोर्स बनाने का एलान कर अंतरिक्ष में हथियारों और सेनाओं की मौजूदगी को लेकर बहस छेड़ दी है.

उन्होंने अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन को स्पेस-फोर्स बनाने का आदेश दिया है. स्पेस-फोर्स के फैसले को वो देश की निजी सुरक्षा से जुड़ा मानते हैं. हालांकि अमेरिका के पास आर्मी, एयरफोर्स, मरीन, नेवी और कोस्ट गार्ड सेनाएं हैं. लेकिन सेना की छठी शाखा की बात कर उन्होंने हॉलीवुड की साइंस फिक्शन फिल्मों की याद दिला दी.

क्या ट्रंप किसी साइंस-फिक्शन फिल्म के डायरेक्टर की तरह सोचते हैं?

निर्माता-निर्देश जेम्स कैमरून की ब्लॉक बस्टर फिल्म ‘अवतार’ कल्पना पर आधारित थी तो अब ट्रंप उस कल्पना को साकार कर अमेरिकी सेना का नया ‘अवतार’ देखना चाहते हैं. सवाल उठ सकता है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी साइंस-फिक्शन फिल्म के डायरेक्टर की तरह सोचते हैं?

जेम्स कैमरून

जेम्स कैमरून

ट्रंप चाहते हैं कि अंतरिक्ष में अमेरिका का दबदबा दिखे. लेकिन सवाल सिर्फ अंतरिक्ष में दबदबे का नहीं है. दरअसल सवाल उन तमाम अमेरिकी सैटेलाइट्स की सुरक्षा का है जिनकी बदौलत अमेरिका दुनिया पर राज करता है. जिन सैटेलाइट के जरिए वो दुनियाभर की हलचलों पर नजर रखता है तो अपनी सेनाओं के लिए खुफिया जानकारियां भी इकट्ठा करता है. सैटेलाइट की मदद से ही दुनिया भर में उड़ने वाले विमान जीपीआरएस के जरिए अपने निश्चित ठिकाने तक पहुंचते हैं. तो लड़ाकू विमान अपने टारगेट पर बम बरसाते हैं.

दुनियाभर के देशों की जान अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स में बसती है. लेकिन अब इन्हीं सैटेलाइट्स पर खतरा मंडरा रहा है. ये उपग्रह भी धरती पर मौजूद मिसाइलों की रेंज में आ चुके हैं. किसी देश के सैटेलाइट को उड़ा कर उसके संचार तंत्र को तबाह किया जा सकता है. अमेरिका को भी अपनी सुरक्षा को लेकर यही डर सता रहा है.

दरअसल अमेरिका को आशंका है कि रूस और चीन अमेरिकी सैटेलाइट्स को निशाना बनाने वाली तकनीक पर काम कर रहे हैं. साल 2007 में चीन ने धरती से मिसाइल दाग कर अपने मौसम उपग्रह को उड़ा दिया था. चीन की इस हरकत पर अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों ने नाराजगी दिखाई थी. इसके बाद साल 2013 में भी चीन ने पृथ्वी की कक्षा में रॉकेट दागा था जिससे दूसरे देशों के सैटेलाइट्स को खतरा हो सकता था.

हालांकि धरती से अंतरिक्ष में मिसाइल दाग कर सैटेलाइट उड़ाने का कारनामा करने वाला चीन अकेला देश नहीं हैं. रूस और अमेरिका भी अस्सी के दशक में पुराने पड़ चुके सैटेलाइट्स को धरती से मिसाइल के जरिए नष्ट कर चुके हैं. लेकिन इस हैरतअंगेज रिस्क में किसी दूसरे देश के सैटेलाइट के भी निशाना बनने का खतरा होता है. जरा सी चूक महायुद्ध की वजह बन सकती है.

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अब अंतरिक्ष में अमेरिका और रूस के ही बराबर चीन ने भी अपनी ताल ठोंक दी है. ऐसे में ट्रंप का सोचना जायज भी है कि अमेरिकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सिर्फ ‘मैक्सिको की दीवार’ जैसे जुमलों से काम नहीं चल सकता. तभी वो स्पेस-फोर्स बनाने का ऐलान कर गए. हालांकि रूस भी पहले स्पेस-फोर्स जैसी शाखा का गठन कर चुका था लेकिन उसने बाद में उसका एयर फोर्स में विलय कर दिया था.

लेकिन अब ट्रंप के जो तेवर हैं उनसे अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ स्टार-वॉर की दस्तक दे रही है. भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि अंतरिक्ष को कुरुक्षेत्र का मैदान नहीं बनाया जाना चाहिए. लेकिन अब अंतरिक्ष से धरती की सुरक्षा की बजाए अपने अपने देशों की सुरक्षा को लेकर स्पेस-वॉर तेज होगा.

किसी साई-फाई फिल्म की तरह ही अमेरिका लेजर बीम के हथियार का कामयाब परीक्षण पहले ही कर चुका है. हाई एनर्जी लेजर पर अमेरिका और इसराइल कई सालों से काम कर रहे थे. ये लेजर बीम आवाज से भी तेज भागती मिसाइलों को हवा में मार गिरा सकती है. वहीं अमेरिका छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भी लगभग बना चुका है जो कि लेजर हथियारों से लैस होंगे. इन विमानों की लेजर बीम किसी भी लड़ाकू विमान, मिसाइल या फिर टारगेट को पल भर में निशाना बना कर नेस्तनाबूत कर सकती है. आसमान में अमेरिकी बादशाहत का लोहा दुनिया मानती है और अब अंतरिक्ष में अमेरिका स्पेस-फोर्स के जरिए न सिर्फ धाक जमाना चाहता है बल्कि दूसरे देशों को भी स्पेस वॉर के लिए उकसा रहा है.

पृथ्वी को असली खतरा अंतरिक्ष के उल्का पिंडों से है

जबकि धरती को सबसे बड़ा खतरा अनंत-अपार ब्रह्मांड में मौजूद आवारा भटकते उल्का पिंडों, पुच्छल तारों और क्षुद्रग्रहों से है. करोड़ों साल पहले धरती से उल्का पिंड के टकराने की वजह से ही डायनासोर की प्रजाति विलुप्त हो गई थी. बड़े आकार के उल्का पिंड के धरती के टकराने से हजारों परमाणु बमों जितनी ऊर्जा उत्पन्न होती है. एक बड़े आकार का उल्का पिंड धरती की सभ्यता का नामोनिशान मिटा सकता है. धरती को असली खतरा इन्हीं धूमकेतु से है जो गाहे-बगाहे जब कभी धरती के पास से गुजरते हैं तो ब्रह्मांड की हलचल पर टकटकी लगाए दुनियाभर के वैज्ञानिकों की दिल की धड़कनें तेज कर जाते हैं.

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एक बार उल्का पिंड के बड़ी तेजी से धरती के करीब गुजरने पर नासा प्रमुख चार्ल्स बोल्डन ने कहा था कि ‘प्रार्थना कीजिये कि ये धरती से न टकराए.’ दरअसल उल्का पिंड से होने वाली तबाही सब जानते हैं लेकिन उल्का पिंड को रोकने का तरीका किसी के पास नहीं है. साल 2032 में एक क्षुद्रग्रह और साल 2040 में एक उल्का पिंड के धरती से टकराने की वैज्ञानिक आशंका जता रहे हैं.

जहां दुनियाभर की कई संस्थाएं और नासा उल्का पिंड की टक्कर से धरती को बचाने की माथापच्ची में जुटी हुई हैं तो अमेरिकी राष्ट्रपति अंतरिक्ष में एक नई चिंता से अमेरिकियों को अवगत करा रहे हैं. धरती के देशों को भले ही एक दूसरे से अंतरिक्ष में भी खतरा हो सकता हो लेकिन पृथ्वी को असली खतरा अंतरिक्ष के इन उल्का पिंडों से है.

बहरहाल स्पेस-फोर्स का एलान तो सिर्फ आगाज है. हो सकता है कि अंतरिक्ष में बादशाहत के बाद चांद पर भी दावेदारी का कोई प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र में किसी दिन रख दिया जाए.

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