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ईरान-यूएस डील खत्म होने का असर भारत पर भी, इन चीजों के बढ़ेंगे दाम

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 2015 में हुए परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया है, इस फैसले का असर भारत पर भी पड़ेगा

Updated On: May 09, 2018 05:30 PM IST

FP Staff

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ईरान-यूएस डील खत्म होने का असर भारत पर भी, इन चीजों के बढ़ेंगे दाम

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 2015 में हुए परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया है. डील रद्द करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि साल 2015 में ईरान के साथ हुए समझौते के बाद आर्थिक प्रतिबंधों में जो रियायतें दी गई थीं, उसे वो दोबारा लगाएंगे. इस फैसले से भारत पर दबाव पड़ेगा. घरेलू बाजार में कई चीजें महंगी हो जाएंगी.

इस फैसले के तुरंत बाद अंतरराष्‍ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल महंगा हो गया है. अगर आसान शब्दों में समझें तो भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा रकम चुकानी होगी. लिहाजा घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल ज्यादा महंगे हो जाएंगे. ऐसे में पेट्रोल-डीजल खरीदने के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे.

अंतरराष्‍ट्रीय मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आने पर तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा सकती हैं, जिससे आम आदमी की मुश्किलें बढ़ेंगी. जहां डीजल के दाम बढ़ने से मालढुलाई महंगी हो जाएगी. वहीं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट की लागत भी बढ़ेगी. इससे फल, सब्‍जी और राशन आदि की कीमतों में तेजी आएगी. इसके अलावा हवाई ईंधन एटीएफ (एयर टर्बाइन फ्यूल) महंगा होने से किराया बढ़ सकता है.

इससे राज्यों पर भी दबाव बढ़ेगा. अगर पेट्रोल और डीजल की कीमतें ऐसे ही बढ़ती रहीं, तो राज्यों पर वैट घटाने को लेकर दबाव बढ़ सकता है.

भारत क्रूड का बड़ा इंपोर्टर देश है और अपनी जरूरत का 85 फीसदी क्रूड इंपोर्ट करता है. ऐसे में क्रूड ऑयल महंगा होता है तो इंपोर्ट बिल के रूप में सरकार को ज्यादा पैसा चुकाना पड़ता है. ऑयल इंपोर्ट महंगा होने से देश के सरकारी खजाने पर असर होगा.

पिछले 10 महीनों से क्रूड महंगा बना हुआ है, जिससे क्रूड का इंपोर्ट बिल भी बढ़ रहा है. अप्रैल-फरवरी के दौरान भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल 25 फीसदी बढ़कर 8070 करोड़ डॉलर हो गया. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के मुताबिक इन 11 महीनों में भारत का ग्रॉस इंपोर्ट बिल 25 फीसदी बढ़कर 9100 करोड़ डॉलर रहा है. अप्रैल-फरवरी के दौरान भारत ने एवरेज 55.74 डॉलर प्रति बैरल कीमत पर क्रूड ऑयल का इंपोर्ट किया, जबकि 2016-17 में यह आंकड़ा 47.56 डॉलर था.

इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया था कि क्रूड ऑयल की कीमतें फाइनेंशियल ईयर 2019 में 12 फीसदी तक बढ़ सकती हैं. अगर ऐसा होता है कि देश की इकोनॉमी पर इसका असर दिखेगा. सर्वे के अनुसार कच्चे तेल में हर 10 डॉलर की बढ़ोत्तरी से जीडीपी 0.3 फीसदी तक गिर सकती है, वहीं महंगाई दर भी 1.7 फीसदी ऊंची हो सकती है.

जुलाई 2015 में ओबामा प्रशासन में हुए इस समझौते के तहत ईरान पर हथियार खरीदने पर पांच साल तक प्रतिबंध लगाया गया था, साथ ही मिसाइल प्रतिबंधों की समयसीमा आठ साल तय की गई थी. बदले में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम का बड़ा हिस्सा बंद कर दिया और बचे हुए हिस्से की निगरानी अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों से कराने पर राज़ी हो गया था.

समझौते पर दस्तख़त करने वाले ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने राष्ट्रपति ट्रंप से इस समझौते से अलग न होने की अपील की थी. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने हाल की अमरीकी यात्रा के दौरान भी कहा था कि वे मानते हैं कि ईरान के साथ हुआ समझौता बेस्ट नहीं था, लेकिन इसके अलावा कोई विकल्प भी नहीं था.

इन देशों ने ये संकेत भी दिया था कि राष्ट्रपति ट्रंप चाहे जो भी फ़ैसला करें, वे ईरान के साथ हुए तीन साल पुराने समझौते पर कायम रहेंगे. ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी कह चुके हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौता खत्म किया तो अमरीका को ऐतिहासिक रूप से पछताना होगा.

भारत में फ्रांस के राजजूत अलेक्जेंड्रे जिग्लर ने अमेरिका के ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से बाहर निकलने पर कहा है कि यूएस के निर्णय पर खेद है, लेकिन हम समझौते में रहेंगे. हम अपने यूरोपीय भागीदारों के साथ समझौते को लागू करना जारी रखेंगे और व्यापक रूपरेखा पर काम भी करेंगे.

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