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एच1बी वीजा पर ट्रंप ने दिया भारत को झटका, अमेरिका हुआ 'दूर'

बिल पेश होते ही भारत की आईटी कंपनियों के स्टॉक धड़ाम हो गए हैं.

Pawas Kumar Updated On: Jan 31, 2017 12:57 PM IST

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एच1बी वीजा पर ट्रंप ने दिया भारत को झटका, अमेरिका हुआ 'दूर'

इमिग्रेशन पर अपने विवादित बैन के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का निशाना एच1बी वीजा है. एच1बी वीजा नियमों में बदलाव के लिए बिल अमेरिकी कांग्रेस में पेश कर दिया गया है.

H1-B वीजा के आधार पर हजारों भारतीय अमेरिका में गूगल व माइक्रोसॉफ्ट जैसी टेक कंपनियों में काम करते हैं.

आईटी स्टॉक धड़ाम

बिल पेश होते ही भारत की आईटी कंपनियों के स्टॉक धड़ाम हो गए हैं. इस नए बिल से भारत की इंफोसिस और विप्रो जैसी आईटी कंपनियां प्रभावित होंगी. साथ ही इनसे माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और एपल जैसी कंपनियों की नियुक्ति प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है. भारतीय आईटी कंपनियों का आधे से अधिक रेवेन्यू अमेरिका से ही आता है.

इस बिल के कानून बन जाने से अमेरिकी कंपनियों के लिए बाहर से लोगों की नियुक्ति करना मुश्किल हो जाएगा. बिल में ऐसे लोगों के लिए न्यूनतम मजदूरी को दोगुना करने का प्रस्ताव रखा गया है. साथ ही अमेरिकी लोगों को ऐसी नौकरियों में प्राथमिकता का प्रस्ताव है.

बिल से प्रैक्टिकल ट्रेनिंग वर्क वीजा पर भी असर पड़ेगा. इस वीजा पर ही विदेशी छात्र अमेरिका में अपना डिग्री कोर्स पूरा करने के बाद भी कुछ अतिरिक्‍त माह तक रुक सकते हैं. वीजा के लिए लॉटरी सिस्‍टम में भी बदलाव हो सकता है. अब सिर्फ सर्वश्रेष्‍ठ उम्‍मीदवार को ही इन वीजा के लिए सेलेक्‍ट किया जाएगा.

एच1बी वीजा धारकों के जीवनसाथी अमेरिका के लिए अपने वर्क परमिट से हाथ धो सकते हैं. पूर्व राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने इन वीजा धारकों के साथियों के लिए भी वर्क परमिट वाले आदेश को मंजूरी दी थी.

ब्लूमबर्ग ने ट्रंप के इस आदेश के ड्राफ्ट की जानकारी देते हुए कहा, 'हमारे देश की इमिग्रेशन नीति ऐसी होनी चाहिए जो पहले अमेरिकी राष्ट्रीय हितों की रक्षा करे. विदेशी कर्मचारियों के लिए वीजा प्रोग्राम इस तरह से लागू होने चाहिए कि इनसे अमेरिकी वर्करों और निवासियों के अधिकारों की रक्षा हो और इनमें अमेरिकी कामगारों व उनकी नौकरियों को प्राथमिकता मिले.'

क्या है एच1बी वीजा

एच1बी वीजा ऐसे विदेशी पेशेवरों के लिए जारी किया जाता है जो ऐसे 'खास' कार्य में कुशल होते हैं. इसके लिए आम तौर उच्च शिक्षा की जरूरत होती है. अमेरिकी सिटीजनशिप और इमिग्रेशन सर्विसेज के अनुसार, इन 'खास' कार्यों में वैज्ञानिक, इंजीनियर और कंप्यूटर प्रोग्रामर शामिल हैं. हर साल करीब 65000 ऐसे वीजा जारी किए जाते हैं.

अमेरिकी कंपनियां इन वीजा का इस्तेमाल उच्च स्तर पर बेहतरीन कुशल पेशेवरों की नियुक्ति के लिए करते हैं. हालांकि अधिकतर वीजा आउटसोर्सिंग फर्म को जारी किए जाते हैं. यह आरोप लगता रहा है कि ऐसी फर्में इन वीजा का इस्तेमाल निचले स्तर की टेक्नोलॉजी नौकरियां भरने के लिए करते हैं. इसके अलावा इसमें लॉटरी सिस्टम से ऐसी आउटसोर्सिंग फर्म को फायदा होता है जो बड़ी संख्या में आवेदन करते हैं.

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