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इस चीनी फिल्म ने की भारत से दवा मंगवाने की वकालत

फिल्म लियुकेमिया के एक मरीज लू योंग की सच्ची कहानी पर आधारित है, जो कैंसर के करीब 1,000 मरीजों के इलाज के लिए भारत से सस्ती दवाओं की तस्करी कर उन्हें चीन में बेचता है

Bhasha Updated On: Jul 06, 2018 08:42 PM IST

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इस चीनी फिल्म ने की भारत से दवा मंगवाने की वकालत

चीनी फिल्म ‘डाइंग टू सर्ववाइव’ ने चीन में भारत से सस्ती दवाओं के आयात की बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है. फिल्म की वजह से भारत से दवाओं के आयात को अनुमति देने की जरूरत पर नई बहस शुरू हो गई है, क्योंकि भारतीय दवाएं विशेषकर कैंसर के इलाज की दवाएं पश्चिमी देशों की तुलना में काफी सस्ती हैं.

फिल्म लियुकेमिया के एक मरीज लू योंग की सच्ची कहानी पर आधारित है, जो कैंसर के करीब 1,000 मरीजों के इलाज के लिए भारत से सस्ती दवाओं की तस्करी कर उन्हें चीन में बेचता है. इससे मरीजों के इलाज की लागत सस्ती हो जाती है जो स्विट्जरलैंड की दवाओं के मुकाबले बहुत कम है.

उल्लेखनीय है कि भारत चीन पर लंबे समय से भारतीय दवाओं का आयात करने के लिए दबाव बना रहा है. इसके माध्यम से वह चीन के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है. दोनों देशों के बीच होने वाले 84 अरब डॉलर के द्विपक्षीय कारोबार में भारत का घाटा 51 अरब डॉलर है.

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार कुछ भारतीय दवा कंपनियां चीन में काम कर रही हैं जिन्हें वहां के खाद्य एवं दवा प्रशासन से किसी तरह के निर्यात की अनुमति नहीं मिली है. हालांकि चीन में भारत से दवाओं की तस्करी होती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वुहान अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में भारत से चावल, चीनी और दवाओं के चीन को निर्यात पर बातचीत हुई है. इसके बाद इस क्षेत्र के लिए कुछ आस जगी है.

फिल्म ने सस्ती भारतीय दवाओं के चीन में आयात के मुद्दे को एक नयी ऊर्जा दी है. कुछ विशेषज्ञ जहां इस मामले में भारत के लिए रोड़े दूर करने की बात कर रहे हैं तो कुछ का कहना है कि चीन को इस क्षेत्र में बड़ा निवेश करना चाहिए ताकि वह खुद की जेनेरिक दवाएं बना सके.

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