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पनामागेट: कुछ यूं वज़ीर-ए-आज़म से विलेन बने नवाज़ शरीफ़

पनामागेट में नाम आने के बाद से ही नवाज़ को हटाने की मांग उठ रही थी

FP Staff Updated On: Jul 28, 2017 04:44 PM IST

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पनामागेट: कुछ यूं वज़ीर-ए-आज़म से विलेन बने नवाज़ शरीफ़

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पीएमएल (एन) के नेता नवाज़ शरीफ़ को पनामा पेपर्स लीक मामले में दोषी करार देते हुए उन्हें पीएम पद पर बने रहने के लिए अयोग्य करार दे दिया.

कोर्ट के इस फैसले के बाद नवाज़ ने खुद ही अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया. नवाज़ पर पीएम रहते हुए मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए आमदनी से कहीं ज्यादा संपत्ति बनाने का आरोप था.

कैसे धरे गए नवाज़?

नवाज़ की धांधली तब सुर्खियों में आई जब 3 अप्रैल को आईसीआईजे नामक खोजी पत्रकारों के एक अंतराष्ट्रीय समूह ने 11.5 मिलियन गुप्त दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए. ये दस्तावेज मोस्सैक फोनसेका नामक लॉ फर्म के जरिए बाहर आए. इनमें 2,14,488 से ज्यादा ऑफशोर कंपनियों (विदेशी प्रतिष्ठानों) के वकील और उनके मुवक्किल के बीच की जानकारी जानकारी थी.

खबर आई कि इनमें से 8 ऑफ शोर कंपनियों का लेना-देना नवाज़ और उनके भाई शाहबाज़ शरीफ के साथ है. चौंकाने वाले दस्तावेजों में नवाज़ की बेटी मरियम और बेटे हसन और हुसैन ऐसी कई कंपनियों के मालिक पाए गए.

पाकिस्तानी विपक्ष को तो बस मौका चाहिए  था. मामले के सामने आते ही इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने नवाज़ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. इसमें पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) भी पीछे नहीं रही.

खुलासे के दो हफ्ते के भीतर गए लंदन

इसके बाद 5 अप्रैल को मामले को ज्यादा ना उलझने देने के लिए नवाज़ ने खुद टीवी पर आकर सफाई दी और पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए. लेकिन कुछ दिन बाद ही 16 अप्रैल को नवाज़ शरीफ़ इलाज की बात कह कर 4 दिनों के लिए लंदन चले गए. इससे पाकिस्तान में लोगों का शक बढ़ना लाजिमी था क्योंकि ब्रिटेन में उनपर अवैध संपत्ति रखने का आरोप था.

वापस आ कर उन्होंने कहा कि उन्होनें सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से आरोपों की जांच के लिए जांच आयोग गठित करने का अनुरोध किया है और अगर वह दोषी पाए गए तो इस्तीफा दे देंगे. वह जानते थे कि मसले पर उनकी चुप्पी से लोगों का उनसे भरोसा डगमगा सकता है और विरोधियों को प्रदर्शन तेज करने के मौका दे सकता है.

उन्होंने संसद में भी बयान देकर अपना बचाव किया. इस बीच कथित तौर पर सबसे ताकतवर व्यक्ति, वहां के सेनाध्यक्ष रहील शरीफ़ ने भी नवाज़ से मामले को सुलझाने की बात कही.

29 अगस्त, 2016 को पीटीआई के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में नवाज़ शरीफ़ को बर्खास्त करने की याचिका दायर की गई. पार्टी ने कहा कि नवाज़ ने संसद में गलतबयानी की है. सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं को स्वीकार कर लिया.

जेआईटी रिपोर्ट ने कर दिया पर्दाफाश

23 फरवरी, 2017 को मामले की सुनवाई पूरी हो गई पर कोई कोई साफ नतीजा नहीं निकला जिसके बाद कोर्ट ने एक संयुक्त जांच टीम (जेआईटी) बनाने का फैसला किया. इस महीने की 10 तारीख को जेआईटी ने अपनी 275 पन्नों की जांच रिपोर्ट दे दी.

इसके बाद 17 जुलाई से दोबारा सुनवाई शुरु हुई. 21 को कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया. 28 जुलाई को ऐतिहासिक फैसले में नवाज़ शरीफ़ को बर्खास्त कर दिया गया. इसके साथ ही पाकिस्तान में लोकतांत्रिक राजनीति पर दोबारा संकट मंडराने लगा है. बर्खास्तगी के साथ ही नवाज़ अपना कार्यकाल पूरा करने वाले पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बनने से चूक गए.

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