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पाकिस्तान: इमरान खान को सत्ता मिल गई तो पता नहीं क्या करें!

इमरान खान की पार्टी की महिला सांसद ने उनपर अश्लील मैसेज भेजने और अकेले में मिलने के लिए कहने का आरोप लगाया है

Seema Tanwar Updated On: Aug 07, 2017 11:49 AM IST

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पाकिस्तान: इमरान खान को सत्ता मिल गई तो पता नहीं क्या करें!

'शो मस्ट गो ऑन' की तर्ज पर पाकिस्तान के सियासी थिएटर में हर दम कुछ न कुछ घटता रहता है. बस किरदार बदल जाते हैं. चंद दिन पहले जो इमरान खान नवाज शरीफ को घेर रहे थे, अब वह खुद घिर गए हैं. उनकी अपनी पार्टी की एक सांसद ने इमरान खान को कठघरे में खड़ा किया है. उन पर इल्जाम लगाया है कि इमरान खान ने उन्हें अश्लील मैसेज भेजे और अकेले में मिलने को भी कहा.

पाकिस्तान में टीवी हो या अखबार, आजकल हर जगह आयशा गुलालई के ही चर्चे हैं. हालांकि इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ ने इसे नवाज शरीफ की पार्टी की साजिश बताकर इल्जामों को खारिज करने की कोशिश भी की, लेकिन मामला इतनी आसानी से कहां ठंडा पड़ने वाला है. लिहाजा सरकार ने मामला संसदीय समिति को सौंप दिया गया है, जो महीने भर के भीतर इसपर अपनी रिपोर्ट देगी.

ब्लैकबेरी खोलेगा राज

रोजनामा नवा ए वक्त लिखता है कि प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने मामले की जांच के लिए संसदीय कमेटी का एलान करते हुए कहा कि जिसने इल्जाम लगाया है और जिस पर इल्जाम लगाया गया है, वे दोनों ही हमारे लिए सम्मानित हैं.

अखबार के मुताबिक अगर इमरान खान अपने ऊपर लगे इल्जामों को राजनीति से जोड़ते हैं तो उन्हें इन इल्जामों को गलत साबित करने के लिए संसदीय समिति के सामने पेश होना चाहिए. अखबार लिखता है कि नए नियुक्त प्रधानमंत्री अब्बासी ने बड़े ही सम्मानित तरीके से दोनों पक्षों को इस समस्या के समाधान की तरफ सकारात्मक राह दिखायी है. अखबार की राय में अगर संसदीय फोरम पर ही इस मामले का हल तलाश लिया जाए तो एक साकारात्मक परंपरा कायम होगी.

जसारत लिखता है कि पहले तो इमरान खान की पार्टी ने इस मुद्दे पर संसदीय समिति बनाने के प्रस्ताव को खारिज ही कर दिया था. अखबार लिखता है कि आयशा गुलालई का जोर ब्लैकबेरी लाने पर है और ब्लैकबेरी आ गया तो फिर बहुत कुछ खुल सकता है. अखबार की राय में ब्लैकबेरी में सिर्फ आयशा गुलालई को भेजे मैसेज ही नहीं होंगे, बल्कि भारतीय फंडिंग भी सामने आ सकती है और जमाइमा (इमरान की पहली पत्नी) से फंड्स के सिलसिले में जानकारी सामने आ सकती है.

नैतिकता संकट

जंग लिखता है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जरूरत इस बात की है कि इसे अफवाहों और अटकलबाजियों का मुद्दा बनाने की बजाय उचित मंच पर दोनों तरफ से लगे आरोपों की जांच कराई जाए. अखबार कहता है कि मामला ऐसा है कि ना तो इसके सियासी पहलू को नजरअंदाज करना मुमकिन है और न ही नैतिक पहलू को.

अखबार की राय में बात सिर्फ इतनी सी नहीं है कि एक महिला सासंद ने अपनी पार्टी के मुखिया पर आरोप लगाए. पार्टी ने इसे विरोधियों की साजिश बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की है. अखबार के मुताबिक कुछ हल्कों में चिंता इस बात को लेकर है कि अगर कुछ और भी ऐसी बातें सामने आईं तो उन मौकों को बरकरार रखना मुश्किल हो जाएगा जिनकी वजह से मुख्यधारा और विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने अपनी प्रतिभा और क्षमता का लोहा मनवाया है.

वहीं उम्मत ने इस विषय पर संपादकीय लिखा है- देश के सामने आर्थिक और नैतिकता का संकट. अखबार कहता है कि पाकिस्तानी जनता की बदकिस्मती यह है कि देश अब तक आर्थिक संकटों का सामना कर रहा था. जिसकी वजह से इमरान खान को लेकर उम्मीद पैदा हो चली थी कि वह प्रधानमंत्री बनेंगे तो जनता को गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई से निजात दिलाने में कामयाब हो सकेंगे. लेकिन इमरान खान और उनकी पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को लेकर जिस तरह के आरोप सामने आ रहे हैं उनसे तो अंदाजा होता है कि अगर तहरीक-ए-इंसाफ को संयोग से सत्ता मिल गई तो देश एक गंभीर नैतिकता के संकट का शिकार हो जाएगा.

आशंकाएं

एक्सप्रेस ने अपने संपादकीय में तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के सांसद जमशेद दस्ती के इस बयान का जिक्र किया है कि गुलालाई दूसरी कंदील बलोच हैं. अखबार लिखता है कि इससे पहले कि कुछ ऐसा हो, इस मामले की जांच कर इसे अंजाम तक पहुंचाया जाए.

अखबार की टिप्पणी है कि गुलालई के मामले ने सियासी पार्टियों की पढ़ी-लिखी और सक्रिय महिला नेताओं और लाखों कार्यकर्ताओं के बीच एक संदेह पैदा कर दिया है. अखबार के मुताबिक राजनीति में संजीदगी और सादगी की बेहद जरूरत है. यह आशंकाएं भी खत्म होनी चाहिए कि कभी भी कुछ भी हो सकता है.

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