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दुनिया को अलविदा कह गया आखिरी बचा नॉर्दन सफेद गैंडा 'सूडान'

आपको जानकर हैरानी होगी कि गैंडे जैसी मशहूर प्रजाति जल्द ही हमको 'अलविदा' कह देगी. और इसकी शुरुआत भी हो चुकी है

Updated On: Mar 20, 2018 02:13 PM IST

Subhesh Sharma

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दुनिया को अलविदा कह गया आखिरी बचा नॉर्दन सफेद गैंडा 'सूडान'

हम अक्सर पर्यावरण को बचाने की बातें टीवी, रेडियो और बड़े-बड़े मंचों पर सुनते रहते हैं, लेकिन कभी ये नहीं सोचते कि इस पर्यावरण को तभी बचाया जा सकता है, जब हम इंसानों के अलावा दुनिया में मौजूद अन्य जीव-जंतुओं की सेफ्टी का भी पूरा ध्यान रखें. आज हम विकास पर इतना फोकस हो चुके हैं कि इसके चक्कर में दुनिया से एक और प्रजाति विलुप्त होने को है. मैन-ईटर्स का नाम आते ही लोगों में डर की लहर दौड़ जाती है, लेकिन मेरी समझ से सबसे बड़े कातिल तो हम हैं, जो एक के बाद एक इस दुनिया से उसके अनमोल रत्न छीनते जा रहे हैं.

आपको जानकर हैरानी होगी कि गैंडे जैसी मशहूर प्रजाति जल्द ही हमको 'अलविदा' कह देगी. और इसकी शुरुआत भी हो चुकी है. क्योंकि दुनिया के आखिरी नॉर्दन व्हाइट मेल राइनों ने दम तोड़ दिया है. पूरी दुनिया में पिछले काफी समय से गैंडा एक संकटग्रस्त प्रजाति की श्रेणी में है.

ऐसा नहीं है कि गैंडे को बचाने के लिए कैंपेन नहीं चलाए गए या फिर उनके लिए प्रोटेक्टिव हैबिटैट नहीं बनाया गया, लेकिन इतना कुछ करने के बाद भी आज पूरी दुनिया में नॉर्दन व्हाइट राइनो के वंश को आगे बढ़ाने का सारा बोझ उठाए 45 साल के 'सूडान' ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. सूडान पिछले काफी समय से बीमार था. उसकी मौत केन्या के ओल पेजेटा कंजरवेंसी में 19 मार्च, 2018 को हुई. सूडान की मौत के बाद अब ये कहना गलत नहीं होगा कि आने वाली जनरेशन के लिए गैंडे किसी डायनासोर से कम नहीं होंगे, जिन्हें सिर्फ किताबों में और मूवीज में ही देखा जा सकेगा.

कौन था सूडान

Sudan, the last surviving male northern white rhino, is fed by a warden at the Ol Pejeta Conservancy in Laikipia national park

सूडान का नाम पिछले काफी सालों से चर्चा में था और हो भी क्यों न, जनाब अपनी प्रजाति के आखिरी 'मेल' जो थे. गैंडे के सींग की बढ़ती मांग को पूरा करने को लेकर आज सूडान अपनी ही दुनिया से विलुप्त हो गया. सूडान का केन्या के ओल पेजेटा कंजरवेंसी में खूब ख्याल रखा जाता था. यही नहीं सिक्योरिटी के नाम पर इसके साथ गनमैन भी तैनात रहते थे. लेकिन अब इस सबका क्या फायदा, क्योंकि सूडान की उम्र इतनी हो चुकी थी कि उसमें अपने वंश को आगे बढ़ाने की क्षमता ही नहीं बची थी. सूडान के जाने के बाद अब नॉर्दन सफेद गैंडों के नाम पर दो मादा गैंडे बची हैं और इन्हें भी शिकारियों से बचाने के लिए पूरी चौकसी में रखा जाता है.

नहीं बचा था दम

Members of the Maasai Cricket Warriors pose for a photograph with the last surviving male northern white rhino in Laikipia

गैंडा एक मजबूत और विशाल जानवर है और इसके सामने आने पर अच्छे-अच्छे घबराते हैं. लेकिन बेचारे सूडान की हालत कई सालों से खस्ता थी. सूडान की देखभाल करने वालों का कहना था कि उसके पिछले पैरों में अब इतनी शक्ति नहीं बची थी कि ये मादाओं के साथ ब्रीडिंग कर सके और न ही इसका स्पर्म काउंट इस काबिल था, जिससे इस संकटग्रस्त प्रजाति के वंश को बचाया जा सके. सूडान के पिछले पैर बेहद कमजोर हो चुके थे और वो पिछले कुछ दिनों से हिल भी नहीं पा रहा था. उसकी इस हालत को देखते हुए ये कंफर्म हो गया था कि अब नेचुरल प्रोसेस के जरिए नॉर्दन व्हाइट गेंडों को बचा पाना नामुमकिन है.

कितने प्रकार होते हैं गैंडे

(FILES) This file photo taken on July 10, 2017 shows Indian one-horn rhinoceroses next to flood waters on higher land at Kaziranga National Park, about 250 kilometres east of Guwahati, on July 10, 2017.  Monsoon floods have killed 225 native animals in India's remote northeast, including 15 rare one-horned rhinos and a Bengal tiger, an official said August 21, amid heavy downpours across the region.   / AFP PHOTO / Biju BORO

1960 के दशक में पूरी दुनिया में करीब हजारों नॉदर्न सफेद गैंडे आजादी से घूमते थे, लेकिन उनके सींग की बढ़ती मांग के चलते पता ही नहीं पड़ा कि कब ये बेमिसाल जानवर इस दुनिया से विलुप्त होने की कगार पर आ खड़ा हुआ. आपको बता दें कि दुनिया भर में गैंडों की कई प्रजातियां हैं जैसे, सफेद गैंडा, काला गैंडा, भारत और नेपाल में पाया जाने वाला एक-सींग वाला गैंडा, सुमात्रन गैंडा, जावा में पाए जाने वाला छोटा गैंडा, लेकिन इन सभी में एक बात जो कॉमन है वो ये है कि इनका भविष्य हम इंसानों के राज में सुरक्षित नहीं है.

क्या कहते हैं आंकड़े

आंकड़ों पर नजर डालें तो अफ्रीका में सबसे ज्यादा वर्ष 2014 में करीब 1,215 गैंडों का शिकार किया गया था, जबकि 2015 में करीब 750 गैंडों को मौत के घाट उतार दिया गया था. भारत और नेपाल में भी गैंडों की हालत अच्छी नहीं है, यहां के जंगलों में करीब तीन हजार से कुछ ज्यादा ही एक सींग वाले गैंडे बचे हैं. शिकारी उत्तरी सफेद गैंडे का सींग 50,000 डॉलर प्रति किलो के दाम पर बेचते हैं. शिकार के चलते इनकी संख्या में भारी कमी आई और 1990 तक यह सिर्फ 400 ही बचे. 1970 में इनकी संख्या 20,000 थी.

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