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चीन को बैलेंस करने के लिए भारत और जापान करे निवेशः श्रीलंका पीएम

श्रीलंका पर चीन के काफी कर्ज हैं, चीन पर देश की बढ़ती निर्भरता को देख सरकार को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ रहा है

FP Staff Updated On: Mar 27, 2018 05:13 PM IST

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चीन को बैलेंस करने के लिए भारत और जापान करे निवेशः श्रीलंका पीएम

चीन पर बढ़ती निर्भरता और ऋण को देखते हुए श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने भारत, जापान और अन्य देशों से श्रीलंका में निवेश करने की मांग की है. श्रीलंका में चीन के बढ़ते निवेश पर सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

कोलंबो में दिए गए एक इंटरव्यू में विक्रमसिंघे ने चीन के साथ हंबनटोटा बंदरगाह के लिए हुए करार का बचाव भी किया. इस बंदरगाह के लिए चीन की सरकारी कंपनी मर्चेंट पोर्ट होल्डिंग्स कंपनी लिमिटेड ने श्रीलंका के साथ 99 वर्षों का करार किया है. इस समझौते से श्रीलंका को 1.1 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ था. श्रीलंका की सरकार को जब यह पैसे मिले उस समय सरकार बकाया ऋण को चुकाने के लिए राजस्व का 80 प्रतिशत खर्च कर रही थी.

सोमवार को व्यापारिक सम्मेलन के दौरान विक्रमसिंघे ने कहा कि हंबनटोटा हम पर बोझ है, क्योंकि चीनी मर्चेंट और श्रीलंका बंदरगाह प्राधिकरण ने इसे अपने ऊपर ले लिया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, उन्होंने कहा कि हम विदेशों निवेशकों को बड़ी संख्या में अपने यहां बुलाने की तलाश में हैं. शुरू में चीन, जापान और भारत से निवेशक आएंगे तो इसे देख कर दूसरे देशों के निवेशक भी आएंगे. हम यूरोप के निवेशकों को भी देश में आते हुए देखना चाहते हैं.

2015 में सत्ता में आने के बाद से ही विक्रमसिंघे पर श्रीलंका के वित्तीय हालात को सुधारने का दबाव है. पिछले सरकार ने चीन से अरबों डॉलर का कर्ज लिया था.

हंबनटोटा को चीन को सौंपने के बाद और देश में राजस्व जुटाने के लिए तमाम टैक्स सुधार करने के बावजूद श्रीलंका पर काफी कर्ज है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2017 के आखिर तक देश पर चीन का 5 बिलियन डॉलर का कर्ज है.

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