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श्रीलंका: पूर्व प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने आधिकारिक निवास खाली करने से किया इंकार

श्रीलंका में मचे राजनीतिक उथल-पुथल के बीच जब पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की जगह ली, तब देश का सियासी पारा और चढ़ गया

Updated On: Oct 28, 2018 02:24 PM IST

FP Staff

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श्रीलंका: पूर्व प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने आधिकारिक निवास खाली करने से किया इंकार
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श्रीलंका में मचे राजनीतिक उथल-पुथल के बीच जब पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की जगह ली, तब देश का सियासी पारा और चढ़ गया. असल में श्रीलंका के विक्रमसिंघे सरकार से यूनाइटेड पीपल्स फ्रीडम अलायंस द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद उनकी सरकार गिर गई.

राष्ट्रपति सिरिसेना की श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (SLFP) और रानिल विक्रमसिंघे की यूनाइटेड नेशनल पार्टी (UNP) ने साल अगस्त 2015 में साथ मिलकर आम चुनाव लड़ा था. आर्थिक नीतियों और रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज को लेकर सिरिसेना और प्रधानमंत्री विक्रमासिंघे के बीच मतभेद थे. विक्रमासिंघे की यूनाइटेड नेशनल पार्टी 2015 से गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही थी.इस चुनाव में महिंदा राजपक्षे को हार का सामना करना पड़ा था और राष्ट्रपति पद को छोड़ना पड़ा था, लेकिन यूनाइटेड पीपल्स फ्रीडम अलायंस के समर्थन वापस लेने के बाद अब उन्हें देश का अगला प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है.

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विक्रमसिंघे इस पूरे मामले से खासा नाराज हैं. उन्होंने खुद को हटाए को 'गैर कानूनी' बताने के साथ ही प्रधानमंत्री आवास खाली नहीं करने की भी बात कही है. अधिकारियों ने कहा है कि अब पुलिस ही विक्रमेसिंघे को आवास खाली करने के लिए कोर्ट के आदेश की मांग करेगी. विक्रमसिंघे के करीब 1000 सहयोगी उनके आवास के बाहर खड़े हैं. उन्हें कम से कम संविधान की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए.

श्रीलंका में चल रहे इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा है कि एक लोकतंत्र और करीबी दोस्ताना पड़ोसी होने के नाते, हमें उम्मीद है कि श्रीलंका में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाएगा.

वहीं कोलंबो में संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ के राजदूतों ने श्रीलंकाई प्रतिद्वंद्वियों को संविधान का पालन करने और हिंसा से बचने के लिए एक बैठक बुलाई है. अधिकारियों ने बताया कि कोलंबो के चीनी राजदूत ने शनिवार को राजपक्षे और विक्रमेसिंघे से अलग-अलग मुलाकात की.

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