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श्रीलंका में गहराया सियासी संकट: अर्जुन रणतुंगा के अपहरण की कोशिश नाकाम, फायरिंग में 1 की मौत

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राष्ट्रपति सिरीसेना की समर्थक बताई जा रही भीड़ ने पेट्रोलियम मंत्री अर्जुन रणतुंगा को जबरन अपने साथ ले जाने की कोशिश की. हालात की गंभीरता को देखते हुए रणतुंगा के सुरक्षाकर्मी ने गोलियां चलाईं जिसमें 3 लोग घायल हो गए. बाद में इनमें से एक की मौत हो गई

Updated On: Oct 28, 2018 08:24 PM IST

FP Staff

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श्रीलंका में गहराया सियासी संकट: अर्जुन रणतुंगा के अपहरण की कोशिश नाकाम, फायरिंग में 1 की मौत
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श्रीलंका में पैदा हुआ राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है. रविवार को राजधानी कोलंबो में सत्ता से बर्खास्त किए गए रानिल विक्रमसिंघे सरकार में पेट्रोलियम मंत्री अर्जुन रणतुंगा को अगवा करने की कोशिश की गई. न्यूज एजेंसी एएफपी के अनुसार इस दौरान रणतुंगा के सुरक्षागार्ड ने फायरिंग की जिसमें 1 शख्स की मौत और कुछ लोगों के जख्मी होने की खबर है.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार राष्ट्रपति सिरीसेना की समर्थक बताई जा रही भीड़ ने पेट्रोलियम मंत्री अर्जुन रणतुंगा को जबरन अपने साथ ले जाने की कोशिश की. हालात की गंभीरता को देखते हुए रणतुंगा के सुरक्षाकर्मी ने गोलियां चलाईं जिसमें 3 लोग घायल हो गए. बाद में इनमें से एक की मौत हो गई.

पुलिस के प्रवक्ता रुवान गुनाशेखरा ने न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि रविवार को जब रणतुंगा अपने सरकारी दफ्तर सिलोन पेट्रोलियम कॉरपोरेशन में घुसने जा रहे थे, तभी उन्हें अगवा करने की कोशिश की गई. जिसके बाद उनके गार्ड ने गोली चलाई. पुलिस ने आरोपी गार्ड को गिरफ्तार कर लिया है.

'सहयोगी UPFA के गठबंधन से समर्थन लेने से गिर गई सरकार'

इस बीच महिंदा राजपक्षे जिन्हें हाल ही में राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नियुक्त किया है उन्होंने इस राजनीतिक संकट पर बयान जारी कर कहा, 'यूपीएफए के गठबंधन तोड़ लेने से यूएनपी-यूपीएफए सरकार गिर गई. मुझे देश में नई सरकार गठन और प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव मिला जिसे मैंने स्वीकार कर लिया.'

दूसरी ओर बर्खास्तगी के चंद दिनों बाद रानिल विक्रमसिंघे को रविवार को देश की संसद के स्पीकर ने प्रधानमंत्री के रूप में पुष्टि की है. पीटीआई के अनुसार राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना को लिखे चिट्ठी में स्पीकर कारू जयसूर्या ने 16 नवंबर तक संसद को निलंबित रखे जाने पर सवाल उठाया है. उन्होंने लिखा कि देश को इसके गंभीर और अवांछनीय परिणाम भुगतने होंगे.

श्रीलंका की संसद में राजपक्षे और सिरिसेना की कुल 95 सीटें हैं और बहुमत से पीछे हैं. वहीं, विक्रमसिंघे की यूएनपी के पास अपनी खुद की 106 सीटें हैं और बहुमत से केवल 7 सीटें कम हैं.

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