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खालिस्तान की मांग को लेकर लंदन में सड़क पर उतरा सिख समुदाय

सिख फॉर जस्टिस संगठन पिछले कई वर्षों से तथाकथित खालिस्तान की मांग को लेकर लंदन में माहौल बना रहा है. रविवार को इसने 'लंदन डिक्लरेशन ऑन पंजाब इंडिपेंडेंस रेफरेंडम 2020' नाम से रैली का आयोजन किया है

FP Staff Updated On: Aug 12, 2018 01:47 PM IST

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खालिस्तान की मांग को लेकर लंदन में सड़क पर उतरा सिख समुदाय

पंजाब को भारत से अलग कर खालिस्तान बनाने की मांग को लेकर सिख समुदाय से जुड़े अलगाववादी समूह लंदन में बड़े स्तर पर रैली कर रहा है. इन लोगों ने आज यानी रविवार को लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर पर 'राइट टू सेल्फ-डिटरमिनेशन' की आवाज बुलंद करने के लिए यह रैली बुलाई है. इसके तहत 'आजाद पंजाब' के लिए यह लोग 'रेफरेंडम 2020' यानी जनमत संग्रह की मांग कर रहे हैं.

वहीं, इस रैली के विरोध में भारतीय अधिकारियों ने ‘वी स्टैंड विद इंडिया’ के बैनर तले 'स्वतंत्रता दिवस समारोह' मनाने का ऐलान किया है.

'रेफरेंडम 2020' को लेकर लंदन में रविवार को प्रस्तावित कट्टरपंथियों के प्रदर्शन को देखते हुए पंजाब पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है. पुलिस का कहना है कि राज्य में इसका असर नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा की कड़ी व्‍यवस्‍था की गई है.

दरअसल, सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) नाम का एक संगठन पिछले कई वर्षों से तथाकथित खालिस्तान की मांग को लेकर लंदन में माहौल बना रहा है. यही ग्रुप रविवार को 'लंदन डिक्लरेशन ऑन पंजाब इंडिपेंडेंस रेफरेंडम 2020' नाम से एक बड़ी रैली कर रहा है.

'सिख फॉर जस्टिस' के कानूनी सलाहकार गुरपतवंत सिंह पन्नम का कहना है कि इस रैली का मकसद 'लंदन डिक्लरेशन' को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में रखना है. साथ ही उसके सदस्य देशों को यह बताना भी है कि पंजाब की स्वतंत्र स्थिति जो पहले अस्तित्व में थी, उसे फिर से स्थापित किया जाना चाहिए.

एसजेएफ के मुताबिक, इस रैली में शामिल होने के लिए सिख समुदाय के लोग दुनियाभर से लंदन पहुंच रहे हैं. खासकर ब्रिटेन के सिख बड़ी संख्या में इस रैली में शामिल हो रहे हैं.

भारत सरकार ने इस रैली का कड़ा विरोध किया है. सरकार ने लंदन में प्रदर्शन कर रहे इन लोगों को 'अलगाववादी' करार दिया है.

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वहीं, यह रैली ब्रिटेन में भारतीय अधिकारियों के लिए सिरदर्द बनी हुई है. कुछ सिख खालिस्तानी संगठनों ने भी इस पर शक जाहिर करते हुए इस रैली से किनारा कर लिया है. सोशल मीडिया पर सिख समुदाय के कई लोगों ने इस रैली का विरोध करते हुए सिखों और भारतीय लोगों के खिलाफ तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है.

बहरहाल, दोनों ही ग्रुप की ओर से हजारों लोगों के ट्रैफलगर स्क्वायर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. क्योंकि ब्रिटेन ने कहा है कि वह किसी भी ग्रुप को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने से नहीं रोकेगा.

ऐसे में भारत के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी कर के ब्रिटेन के इस फैसले पर निराशा जाहिर की. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, 'हमने कहा है कि इस रैली का मकसद हिंसा, अलगाववाद और नफरत फैलाना है. हम उम्मीद करते हैं कि जब वे ऐसे मामलों पर निर्णय करें, तो संबंधों के व्यापक परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखें.'

रवीश कुमार ने गुरुवार को मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘हमने चुनिंदा मिशनों को लंदन के आयोजन के संदर्भ में घटनाक्रम पर निगरानी रखने के लिए कहा है.’

क्या है लंदन डिक्लरेशन?

'लंदन डिक्लरेशन' को 1949 में तत्कालीन कॉमनवेल्थ प्रधानमंत्री ने कॉमनवेल्थ कॉन्फ्रेंस में जारी किया था. पहले ब्रिटेन को कॉमनवेल्थ के सारे देशों के शासक होने का दर्जा हासिल था, लेकिन 'लंदन डिक्लरेशन' से चीजें बदल गईं. भारत के संदर्भ में देखें तो 1947 में आजादी के बाद भारत ने खुद को एक गणराज्य घोषित कर दिया, लेकिन आजादी के बाद भी भारत ने कॉमनवेल्थ का एक सदस्य बने रहना जारी रखा.

लंदन डिक्लरेशन के तहत कॉमनवेल्थ ने भारत के इस फैसले को अपनी मंजूरी दी. अब इसी 'लंदन डिक्लरेशन' का हवाला देकर यह अलगाववादी समूह विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

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