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कतर को टापू बनाने की साजिश क्यों रच रहा है सऊदी अरब

जून 2017 में सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और यूएई ने एकसाथ मिलकर कतर के साथ के अपने सारे राजनैतिक और व्यापार समझौते खत्म कर लिए थे. इसके पीछे उन्होंने कतर पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और धन मुहैया करने का आरोप लगाया था

Updated On: Sep 02, 2018 05:47 PM IST

FP Staff

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कतर को टापू बनाने की साजिश क्यों रच रहा है सऊदी अरब

शुक्रवार को सऊदी अरब के एक अधिकारी ने संकेत दिया कि कतर को सऊदी से अलग करने के लिए एक नहर बनाई जाएगी. इस नहर के द्वारा कतर को सऊदी की सीमा से काटकर एक द्वीप बना दिया जाएगा. कतर को इस तरह से अलग थलग करने का ये प्लान दोनों देशों के बीच पिछले 14 महीने से चली आ रही खींचतान में एक नया मोड़ है.

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सीनियर एडवाइजर सऊद अल काहतनी ने ट्विटर पर लिखा- मैं सालवा द्वीप प्रोजेक्ट का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं. सालवा प्रोजेक्ट एक ऐतिहासिक प्रोजेक्ट है झेत्र की भौगोलिक स्थिति को बदल कर रख देगा.

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक सऊदी सरकार द्वारा देश भर की सीमा पर नहर बनाने की योजना को सबसे पहले अप्रैल में सरकार के करीबी वेबसाइट सब्क पर रिपोर्ट की गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि 60 किमी लंबा, 200 मीटर चौड़ा और 20 मीटर गहरे नहर के निर्माण में लगभग 2.8 बिलियन रियाल (750 मिलियन डॉलर) तक का खर्च आएगा.

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जून में, मक्का समाचार पत्र ने बताया कि परियोजना के लिए नहरों की खुदाई की विशेषता वाली पांच अज्ञात कंपनियों को बोली लगाने के लिए आमंत्रित किया गया था. समाचार पत्र ने आगे लिखा कि इस बोली में किसने बाजी मारी उसकी घोषणा सितंबर तक की जाएगी. सऊदी के अधिकारियों की तरफ से अभी तक किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

क्या है सऊदी कतर क्राइसिस:

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जून 2017 में सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और यूएई ने एकसाथ मिलकर कतर के साथ के अपने सारे राजनैतिक और व्यापार समझौते खत्म कर लिए थे. इसके पीछे उन्होंने कतर पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और धन मुहैया करने का आरोप लगाया था. इन आरोपों का दोहा ने कड़े शब्दों में खंडन किया और कहा कि ये सिर्फ उनकी संप्रभुता को खंडित करने की चाल है.

साथ ही कतर पर भी सऊदी के कट्टर दुश्मन ईरान के करीबी होने का भी आरोप है. कतर अगले फुटबॉल विश्व कप की मेजबानी करने वाला है. अब कतर के पड़ोसी देशों ने कतर द्वारा उनके हवाई क्षेत्रों के उपयोग करने पर रोक ला दी है. साथ ही इन देशों से कतर के निवासियों को बाहर किया जा रहा है.

22 जून 2017 को सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और बहरीन ने कतर को कुवैत के माध्यम से 13 मांगों की एक सूची थमाई थी. कुवैत इन सभी के बीच मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा था. उनकी मांगों में ईरान के साथ राजनयिक संबंधों को खत्म करने, आतंकवादी संगठनों के साथ सभी संबंधों को अलग करने और 'आतंकवादी आंकड़ों' को सौंपना शामिल था. इसके अलावा समाचार पत्र अल जज़ीरा पर भी लगाम लगाने की मांग थी.

कुवैत और अमेरिका के नेतृत्व में मध्यस्थता के सारे प्रयास अभी तक इस विवाद को सुलझाने में विफल रहे हैं.

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