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रोहिंग्या संकट जातिसंहार के जैसा: संयुक्त राष्ट्र

म्यांमार की सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत यांगी को देश में प्रवेश नहीं करने दिया

Updated On: Feb 01, 2018 03:47 PM IST

Bhasha

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रोहिंग्या संकट जातिसंहार के जैसा: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत यांगी ली ने गुरूवार को सोल में कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध सेना के हिंसक अभियान में ‘जातिसंहार’ की झलक मिलती है. वह म्यांमार में यूएन की ओर से मानवाधिकार विषय से संबंधित मसले को देखती हैं.

यांगी ली ने यहां पत्रकारों से कहा कि जब तक कोई भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण या अदालत सबूतों को परख नहीं लेता तबतक हम निश्चित तौर पर नरसंहार की घोषणा नहीं कर सकते. ‘हमें संकेत नजर आ रहा है और वह उस दिशा में बढ़ रहा है.’

उनकी ब्रीफिंग में रोहिंग्या के मुद्दे पर बांग्लादेश और अन्य क्षेत्रों में शरणार्थी शिविरों में उनकी हाल की यात्रा का ब्योरा था.

यूएन की अधिकारी को म्यामांर ने देश में प्रवेश नहीं करने दिया था

म्यांमार में रोहिंग्या उग्रवादियों के खिलाफ 25 अगस्त को सैन्य अभियान शुरु होने के बाद करीब 700,000 रोहिंग्या अपने गांवों से पलायन कर बांग्लादेश चले गए. म्यांमार की सरकार ने यांगी को देश में प्रवेश नहीं करने दिया.

म्यांमार के गांव गु डार प्यीन में कम से कम पांच सामूहिक कब्रों पर एक प्रश्न के उत्तर में यांगी ने कहा कि उनके पास गांव के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी तो नहीं है लेकिन आप उसका एक पैटर्न देख सकते हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसी खबरों की तहकीकात हो और अंतरराष्ट्रीय मीडिया को रखाइन प्रांत तक जाने दिया जाए. उन्होंने म्यामांर की कार्रवाई को ‘मानवता के विरुद्ध अपराध’ जैसा करार दिया. यांगी सोल में ही रहती हैं.

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