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येरुशलम: मुस्लिम देशों को खूब कोस रहा है पाक मीडिया

कुलभूषण जाधव से परिवार को मिलने देने के फैसले पर पाकिस्तान के अखबार दो हिस्सों में बंटे हैं

Seema Tanwar Updated On: Dec 11, 2017 09:56 AM IST

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येरुशलम: मुस्लिम देशों को खूब कोस रहा है पाक मीडिया

इज़रायल में अपने दूतावास को तेल अवीव से येरुशलम ले जाने के अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का पूरे मुस्लिम जगत में विरोध हो रहा है. ऐसे में, पाकिस्तानी मीडिया कैसे पीछे रह सकता है. कुछ अखबारों ने हमेशा की तरह अमेरिका को खरी खोटी सुनाई है तो कई इसके लिए मुस्लिम देशों को ही जिम्मेदार मानते हैं.

पाकिस्तानी मीडिया सवाल पूछता है कि आखिर क्यों ऐसे हालात हैं कि अमेरिका और इज़रायल के लिए करोड़ों मुसलमानों और मुस्लिम देशों का विरोध कोई मायने नहीं रखता. यह मुद्दा दुनिया के मुसलमानों के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि पूर्वी येरुशलम में ही इस्लाम धर्म का तीसरा सबसे पवित्र तीर्थस्थल अल अक्सा मस्जिद है.

वहीं, पाकिस्तान में मौत सजा पा चुके भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को अपनी पत्नी और मां से मुलाकात की अनुमति मिलने पर भी कुछ अखबारों ने संपादकीय लिखे हैं. कहीं पाकिस्तान सरकार के इस फैसले पर हैरानी जताई गयी है तो कहीं इसे मानवीय आधार पर लिए गया एक अच्छा फैसला बताया गया है.

हर तरफ विरोध

इज़रायल में भड़की हिंसा

इज़रायल में भड़की हिंसा

‘एक्सप्रेस’ लिखता है कि येरुशलम को इज़रायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के ट्रंप के फैसले का विरोध ना सिर्फ मुस्लिम देशों में हो रहा है बल्कि ब्रिटेन, रूस, कनाडा, चीन, जर्मनी फ्रांस समेत कई बड़े देशों ने इस फैसले पर नाराजगी जतायी है.

अखबार ने ट्रंप के फैसले के बाद फलस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास की तरफ से तीसरा इंतिफादा शुरू करने की घोषणा पर कहा है कि इससे इलाके में खून खराबा बढ़ेगा.

अखबार की टिप्पणी है कि जब तक ट्रंप अपना फैसला वापस नहीं लेते, तब तक फलस्तीन में हालात सामान्य नहीं होंगे. अखबार कहता है कि फलस्तीनियों ने जो नयी मुहिम शुरू की है, वह समय के साथ तेज होती जाएगी और अगर इज़रायल की सेना से छड़प होती है, तो फलस्तीनियों की मौतों में भी इजाफा होता चला जाएगा.

उधर, ‘मशरिक’ लिखता है कि इसे मुस्लिम जगत की बदकिस्मती ही कहा जाएगा कि संसाधनों से मालामाल करोड़ों मुसलमान और दर्जनों इस्लामी देश एक बड़ी ताकत हैं, लेकिन अमेरिका और इज़रायल उन्हें कुछ नहीं समझते हैं.

अखबार कहता है कि अमेरिका और इज़रायल को मालूम है कि मुस्लिम दुनिया सिर्फ जलसे जुलूस निकाल सकती है और टायर जला कर विरोध प्रदर्शन कर सकती है, इससे ज्यादा कुछ करने की उसमें ताकत नहीं है.

इज़राएल में टायर जलाता एक प्रदर्शनकारी

इज़रायल में टायर जलाता एक प्रदर्शनकारी

अखबार के मुताबिक, अफसोस किसी मुस्लिम देश ने अमेरिका से राजनयिक संबंध तोड़ने का एलान नहीं किया. अखबार कहता है कि क्या तुर्की, ईरान, पाकिस्तान, सऊदी अरब और अन्य इस्लामी देश मिलकर कोई ऐसा कदम नहीं उठा सकते हैं कि 'बददिमागी' अमेरिकी राष्ट्रपति को अपने फैसले पर फिर से विचार करना पड़े.

एकजुटता पर जोर

‘उम्मत’ लिखता है कि जब तक 'अमेरिका समेत दूसरी शैतानी ताकतें' इज़रायल की सरपरस्त हैं तब तक संयुक्त राष्ट्र समेत किसी भी विश्व संस्था से इस बारे में उम्मीद करना खुद को धोखा देने के बराबर है.

अखबार के मुताबिक अब वक्त आ गया है कि मुसलमान इस संवेदनशील मसले पर ठंडे दिल और दिमाग से सोच कर रणनीति बनाएं. अखबार एक तरफ मुस्लिम देशों से अपनी सामूहिक कमजोरी की पहचान करने के लिए थिंकटैंक बनाने को कहता है, वहीं अमेरिका और इज़रायल के राजनयिक बहिष्कार और अरबों को शाह फैसल की तरह तेल को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की नसीहत देता है.

रोजनामा ‘आज’ भी इस मुद्दे पर मुस्लिम देशों के बीच एकजुटता पर जोर देता है. अखबार की राय में, इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को बयानों से आगे बढ़ते हुए अमेरिकी कदमों का नोटिस लेना चाहिए और इस मकसद के लिए सबको प्राथमिकता के आधार पर काम करना चाहिए.

अखबार लिखता है कि अमेरिका से यह भी कहा जाए कि वह पाकिस्तान समेत अन्य मुस्लिम देशों को लेकर अपनी नीतियां ठीक करे. अखबार के मुताबिक मुस्लिम देशों का दोटूक रूख न सिर्फ येरुशलम के दर्जे पर बल्कि अन्य मुद्दों पर भी अमेरिका को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर देगा.

दबाव या दुरुस्त फैसला

‘नवा ए वक्त’ ने कुलभूषण को जाधव को अपने परिवार के सदस्यों से मुलाकात की अनुमति पर हैरानी जतायी है. अखबार लिखता है कि भारत ने जिन लोगों को पाकिस्तानी आतंकवादी होने के इल्जाम में गिरफ्तार किया, क्या कभी उनकी किसी पाकिस्तानी अधिकारी या उनके परिवार वालों से मुलाकात कराई गई. अखबार के मुताबिक इसके उल्ट पाकिस्तान की तरफ से ऐसे कदमों से लगता है कि यह फैसला किसा डर या दबाव में लिया गया है. अखबार की टिप्पणी है कि 'एक खतरनाक आतंकवादी' को इस तरह की छूट कहीं भी नहीं जाती है.

KulbhushanJadhav

भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव पाकिस्तानी जेल में बंद है

दूसरी तरफ ‘जंग’ ने इसे मानवीय आधार पर लिया गया दुरुस्त फैसला बताया है. अखबार के मुताबिक, मुमकिन है कि देश में आतंकवाद की कई रक्तरंजित कार्रवाइयों के इकबालिया मुजरिम के भयानक जुर्मों को देखते हुए लोगों को इस बात पर हैरानी हो, लेकिन फिलहाल यह फैसला मानवाधिकारों के हवाले से इस्लामी शिक्षाओं पर आधारित है. अखबार के मुताबिक इस फैसला का ना सिर्फ पाकिस्तान में, बल्कि पूरी दुनिया के मानवीय हल्कों में स्वागत होगा.

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