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बांग्लादेश अपनी धरती का भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा

भारत ने राहत शिविरों में रह रहे लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति करने में बांग्लादेश की मदद करने के लिए और राहत सामग्री और रसद भेजने की पेशकश की

Bhasha Updated On: Jul 15, 2018 09:19 PM IST

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बांग्लादेश अपनी धरती का भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा

बांग्लादेश ने रविवार को भारत को फिर से आश्वस्त किया कि वह अपनी धरती का इस्तेमाल अपने पड़ोसी देश के खिलाफ किसी आतंकवादी गतिविधियों के लिये नहीं होने देगा.

बांग्लादेश के गृह मंत्री असदुज्जमां खान ने यह बात अपने भारतीय समकक्ष राजनाथ सिंह से सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर वार्ता के दौरान कही. सिंह यहां तीन दिवसीय यात्रा पर आए हैं. उन्होंने खान के साथ छठे भारत-बांग्लादेश गृह मंत्रिस्तरीय वार्ता की सह अध्यक्षता की.

ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक वक्तव्य में बताया कि बैठक में आतंकवाद निरोध, क्षमता निर्माण और सुरक्षा एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने, सीमा प्रबंधन, जाली मुद्रा, मादक पदार्थ और मानव तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों का मुकाबला करने और वाणिज्य दूतावास से संबंधित मुद्दों समेत सुरक्षा हितों से संबंधित सभी मुद्दों पर चर्चा की गई.

सिंह के साथ वार्ता के बाद संवाददाताओं को जानकारी देते हुए खान ने कहा कि बैठक में सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई. इसमें सीमा प्रबंधन, सीमा पार अपराध और अवैध गतिविधियों जैसे मुद्दों पर खास तौर पर चर्चा हुई.

सिंह ने अपनी संक्षिप्त टिप्पणी में कहा, ‘हमारे बीच सफल बैठक रही.’

वह मीडिया को संबोधित करने खान के साथ नहीं आए.

खान ने कहा कि बांग्लादेश ने भारत को फिर से आश्वस्त किया, ‘हम आतंकवाद और उग्रवाद को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति के तहत अपनी धरती का इस्तेमाल किसी आतंकवादी गतिविधियों और खासतौर पर भारत के खिलाफ करने की अनुमति नहीं देंगे.’

उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकवाद और उग्रवाद से मुकाबला करने के लिये बांग्लादेश को सभी तरह का समर्थन दिया है.

उन्होंने कहा, ‘अब वे हमारे साथ उग्रवाद से संबंधित सूचनाओं को साझा कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा, ‘दोनों देशों के बीच यात्रा व्यवस्था को आसान बनाने पर भी चर्चा हुई.’

वीजा की प्रक्रिया को सरल बनाने पर हुआ समझौता

उन्होंने कहा कि रविवार को हस्ताक्षरित संशोधित यात्रा समझौता के तहत बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के सेनानी और वृद्ध नागरिकों को पांच साल का एक से अधिक भारतीय वीजा मिलेगा.

खान ने कहा कि छात्रों और भारत में इलाज कराने की चाह रखने वाले लोगों को वीजा जारी करने की प्रक्रिया सरल बनाने पर भी चर्चा हुई.

खान ने कहा कि रोहिंग्या मुद्दे पर भी चर्चा हुई और उनके भारतीय समकक्ष ने रोहिंग्याओं को सुरक्षित, त्वरित और स्थायी रूप से उन्हें म्यांमा के राखाइन प्रांत भेजने में सहायता करने में भारत की प्रतिबद्धता जताई.

भारत ने राहत शिविरों में रह रहे लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति करने में बांग्लादेश की मदद करने के लिए और राहत सामग्री और रसद भेजने की पेशकश की. भारत साथ ही राखाइन में मकान निर्माण की परियोजना पर भी काम कर रहा है ताकि विस्थापित रोहिंग्या वहां भेजे जाने के बाद सही से बस सकें.

पिछले साल अगस्त में राखाइन प्रांत में हिंसा के बाद छह लाख से अधिक रोहिंग्या मुसलमानों ने बांग्लादेश में शरण ली है.

सिंह ने शनिवार को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ ‘काफी सार्थक’ वार्ता की थी. इस दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद की समस्या समेत पारस्परिक सरोकार के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की थी.

बैठक के बाद भारतीय उच्चायोग ने एक बयान में कहा कि सिंह ने नई दिल्ली की सुरक्षा चिंताओं का निराकरण करने में सहयोग के लिये हसीना के प्रति आभार प्रकट किया. बयान में कहा गया कि हसीना ने सिंह से सहमति जताई कि आतंकवाद और उग्रवाद से लड़ने के लिये संयुक्त द्विपक्षीय प्रयासों में ‘विशेष सफलता’ मिली है.

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता के अनुसार सिंह ने किसी भी देश का नाम लिये बगैर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अपेक्षित संयुक्त क्षेत्रीय कार्रवाई कुछ देशों की वजह से संभव नहीं है.

भारत वापसी से पहले सिंह ने अपने ट्वीट में कहा, ‘तीन दिन बांग्लादेश में बिताने के बाद मैं नई दिल्ली लौट रहा हूं. बांग्लादेश के लोगों की ओर से दिखाई गई गर्मजोशी और आतिथ्य से अभिभूत हूं. भारत-बांग्लादेश मैत्री चिरोजीबी होक (भारत और बांग्लादेश की दोस्ती जिंदाबाद.)’

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