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राजीव ने कास्त्रो की सलाह नहीं मानने की चुकाई कीमत

राजीव गांधी ने फिदेल कास्त्रो की चेतावनी को नजरअंदाज किया और भारी कीमत चुकाई.

Updated On: Nov 28, 2016 08:54 AM IST

Mridul Vaibhav

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राजीव ने कास्त्रो की सलाह नहीं मानने की चुकाई कीमत

क्यूबा के क्रांतिकारी नेता फिदेल कास्त्रो ने अपने देश के राष्ट्रपति रहते हुए तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी को आगाह किया था कि आपका वित्त मंत्री वीपी सिंह खतरनाक राजनीतिज्ञ है और वह आपकी पीठ में छुरा घोंपेगा. लेकिन राजीव गांधी ने फिदेल कास्त्रो की इस चेतावनी को नजरअंदाज किया और भारी कीमत चुकाई.

चल रही थी साजिश

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मारग्रेट अल्वा पर भरोसा करें तो कास्त्रो को यह पता चल गया था कि वीपी सिंह ने राजीव गांधी को अपदस्थ करने की तैयारियां बहुत पहले कर ली थीं. चौंकाने वाली बात यह है कि इस बात की भनक तक भारत में किसी को नहीं लगी.

मारग्रेट अल्वा ने अपनी आत्मकथा 'करेज ऐंड कमिंटमेंट: एन ऑटोबायोग्राफी' में इस ऐतिहासिक चेतावनी पर लिखा है, 'स्वदेश लौटते ही राजीव गांधी को मेरी इस बात से मुतमईन करना और कहना कि वह अपने वित्त मंत्री पर भरोसा नहीं करें. वह उनके खिलाफ षड्यंत्र रच रहा है. वह बहुत खतरनाक राजनीतिज्ञ है और विश्वास करने के कतई काबिल नहीं है. वह उनकी पीठ में छुरा घोंपेगा. राजीव गांधी को बहुत सावधान रहने की जरूरत है.'

यह समय था जब वीपी सिंह राजीव गांधी के बहुत भरोसेमंद दोस्त और सहयोगी माने जाते थे. अल्वा खुद भी कास्त्रो की इस चेतावनी पर भरोसा नहीं कर पाईं और उलटा उन्होंने कास्त्रो को समझाने की कोशिश की.

अल्वा उस समय मेक्सिको गई हुई थीं, जहाँ वर्ल्ड विमिन पार्लियामेंटेरियन्स फॉर पीस संगठन की मीटिंग थी. उन्हें अचानक क्यूबा भेजा गया था.

मारग्रेट अल्वा

मारग्रेट अल्वा

क्यूबा की इस क्रांतिकारी शख्सियत के पीछे अमेरिका शुरू से ही पड़ा था और वह किसी भी तरह कभी क़ाबू नहीं आया. इसकी वजह संभवत: क्यूबा की गुप्तचर एजेंसी डीआई की बेहद मजबूती और चौकन्नापन था. कास्त्रो को संभवत: डीआई के माध्यम से ही भारतीय राजनीति की गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं.

कास्त्रो की चेतावनी से राजीव गांधी को अवगत करवाया गया तो राजीव गांधी हंसे और उल्टे अल्वा से सवाल किया कि कास्त्रो भारत के बारे में क्या जानते हैं?

अल्वा लिखती हैं, 'जब वीपी सिंह ये सब कर चुके तो मैंने राजीव से कास्त्रो की चेतावनी याद दिलाई. वे चुप रहे और उन्हें एहसास हुआ कि वे भारी चूक कर चुके हैं.'

कास्त्रो ने कहा था, 'मैं राजीव की मां का मित्र हूँ और उनके नाना से बहुत प्रभावित रहा हूँ. राजीव की मां इंदिरा गांधी महान महिला और महान शख्सियत थीं. राजीव गांधी को अपनी मां की नीतियों का अनुसरण करना चाहिए और नीतियों को कतई छोड़ना नहीं चाहिए. अगर वे अपनी मां, अपने नाना की नीतियों से हटेंगे तो उनके सामने परेशानियां खड़ी होंगी.'

कास्त्रो अगर अमेरिका जैसी विश्व शक्ति के सामने सिकंदर की तरह सिर ताने खड़े रहे और चमत्कारी व्यक्तित्व बन पाए तो इसलिए कि उनके लिए छोटी से छोटी सूचना भी बहुत महत्वपूर्ण थी और वह उन तक पहुँचती थी.

अगर राजीव गांधी ने कास्त्रो की चेतावनी पर समय रहते ध्यान दिया होता तो शायद कांग्रेस और देश की राजनीति का चेहरा कुछ अलग ही होता.

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