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चलो मेरे यार चलो...डोकलाम के पार चलो...कुछ व्यापार करो...दोस्ती पर वार न करो

डोकलाम विवाद के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया और द्विपक्षीय व्यापार 22.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Apr 26, 2018 08:25 PM IST

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चलो मेरे यार चलो...डोकलाम के पार चलो...कुछ व्यापार करो...दोस्ती पर वार न करो

पीएम मोदी दो दिन की चीन यात्रा पर हैं. इस बार उनकी चीन यात्रा को बेहद खास माना जा सकता है. इस यात्रा की अहमियत को सिर्फ इस बात से समझा जा सकता है कि चीन के सबसे ताकतवर नेता और आजीवन राष्ट्रपति बने रहने की शक्ति हासिल करने वाले शी जिनपिंग खुद पीएम मोदी का स्वागत करने बीजिंग से बाहर आए हैं. दोनों देशों के बीच पहली बार द्विपक्षीय वार्ता बीजिंग से बाहर हो रही है. शी जिनपिंग पहली बार किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष की मेजबानी के लिए बीजिंग से बाहर दो दिनों तक रहेंगे.

जाहिर तौर पर चीन की ये गर्मजोशी देखकर मोदी के स्वागत का अंदाजा लगाया जा सकता है. वहीं खुद चीन का कहना है कि पीएम मोदी का अभूतपूर्व और ऐतिहासिक स्वागत किया जाएगा.

मोदी

रिश्तों में गर्माहट की इस पहल की बेहद जरूरत थी क्योंकि सीमा पर विवाद सुलग रहे थे और सेनाओं की तैनाती से तनाव चरम पर पहुंच रहा था. चीनी सैनिकों की भारतीय सीमा में घुसपैठ और डोकलाम पर सैन्य ढांचों के निर्माण के चलते भारतीय सेना को भी अपने बुनियादी ढांचों को दुरुस्त और तैयार करने में जोर लगाना पड़ रहा है.

सीमा पर बढ़ते तनाव की गंभीरता को भारतीय सेना प्रमुख बिपिन रावत के उस बयान से समझा जा सकता है कि ‘अब वक्त आ गया है कि चीन की सीमा से सटे इलाकों पर ध्यान दिया जाए’. डोकलाम में चले 73 दिनों के तनाव के बाद हाल ही में अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन के तेवरों से भारत-चीन के रिश्तों में कड़वाहट घुलने लगी थी. वहीं डोकलाम को लेकर भी चीन पुराने दावों को दोहराने लगा है.

CHINESE SOLDIERS STAND UNARMED BESIDE BARBWIRES AT INDO-CHINA BORDER.

ऐसे में गहराते सीमा विवाद के बीच मोदी की चीन यात्रा से रिश्तों के एक नए अध्याय के शुरू होने की उम्मीद जगी है क्योकि चीन ने दावा किया है कि पीएम मोदी का ऐसा स्वागत किया जाएगा जिससे भारत चौंक जाएगा. मोदी की मेजबानी के लिए चीन के शहर वुहान को इसलिए चुना गया है ताकि दो दोस्तों के बीच अनौपचारिक माहौल में बातचीत हो सके.

शी जिनपिंग पूरे दो दिन तक मोदी के साथ रहेंगे. ये मुलाकात शी जिनपिंग के साल 2014 की भारत यात्रा की याद भी ताजा करेगा. उस वक्त शी जिनपिंग पीएम मोदी को अपने गृहनगर अहमदाबाद लेकर गए था जहां से वो महात्मा गांधी के साबरमति आश्रम गए और उन्होंने चरखा भी चलाया था. वो अनौपचारिक लम्हें शी जिनपिंग और मोदी की दोस्ती के अध्याय का एक हिस्सा बने थे तो अब बारी शी जिनपिंग के स्वागत और मेजबानी की है.

Ahmedabad: Prime Minister Narendra Modi and Chinese President Xi Jinping sitting on a traditional swing on the Sabarmati River front in Ahmedabad on Wednesday. PTI Photo(PTI9_17_2014_000248B)

दोनों के बीच भारत और चीन से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होगी. लेकिन इस बैठक में न कोई समझौता होगा और न ही कोई साझा बयान जारी किया जाएगा.

दोनों के बीच बातचीत में सीमा विवाद के अलावा व्यापार को लेकर भी बातचीत होने की संभावना है. डोकलाम विवाद के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है. भारत-चीन के बीच व्यापार में पहली तिमाही में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 22.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है जो कि 15.4 फीसदी की दर है. माना जा रहा है कि साल 2018 के आखिर तक भारत में चीन का निवेश 8 अरब डॉलर के पार पहुंच जाएगा.

जाहिर तौर पर चीन के लिए भारत न सिर्फ उभरती हुई अर्थव्यवस्था का एक बड़ा बाजार है तो निवेश का सबसे बड़ा मौका भी. भारत और चीन के बीच अगर सीमा पर विवाद के चलते तनाव गहराया है तो व्यापार की वजह से ही रिश्तों में गर्माहट भी लौटी है. चीन कभी नही चाहेगा कि जमीन के छोटे से हिस्से की वजह से वो भारत जैसे देश से अरबों डॉलर के कारोबार का मौका गंवाए खासतौर से तब जबकि वो अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर में उलझ चुका हो.

भारत भी चीन के साथ अपनी तमाम चिंताएं रखने के लिए स्वतंत्र है. माना  जा रहा है कि इस अनौपचारिक बातचीत में एनएसजी में भारत की दावेदारी,  पीओके में चीन के दखल और आतंकी मसूद अजहर को लेकर चीन के रुख पर भी पीएम मोदी खुले दिल से बात कर सकते हैं.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि मोदी -जिनपिंग की मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों में मील का पत्थर साबित होगी. दोनों की मुलाकात से पहले चीन ने डोकलाम विवाद को पीछे छोड़ते हुए नाथुला के रास्ते कैलाश मानसरोवर की यात्रा को हरी झंडी भी दे दी. ये रिश्तों में सुधार का प्रतीक है.

डोकलाम विवाद के बाद ही चीन ने नाथुला से कैलाश मानसरोवर यात्रा का रास्ता बंद कर दिया था. लेकिन कैलाश मानसरोवर की यात्रा के फिर से शुरू हो जाने से समझा जा सकता है कि चीन ने पीएम मोदी के चीन दौरे से पहले ही उनके स्वागत में एक तोहफा पेश कर बातचीत को सफल बनाने के लिए सकारात्मक पहल दिखाने की कोशिश की है.

उम्मीद है कि 64 साल बाद होने  जा रही इस अलग तरीके की मुलाकात से दोनों देशों के बीच डोकलाम और दूसरे विवादों का कुहासा छंटेगा और नए सिरे से दोनों देशों के बीच रिश्तों की नई बुनियाद तैयार हो सकेगी ताकि भविष्य में सीमाई विवाद के चलते युद्ध के बादल न मंडरा सकें.

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