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वेस्टमिंस्टर हॉल में पीएम मोदी: पिछली बार की तुलना में कैसे अलग होगा भाषण?

पहले मौके पर मोदी के सामने एक विजन था, देश के लिए कुछ करने का प्लान था. लेकिन अब चार साल बीतने के बाद उस विजन पर कितना अमल हुआ है, यह बताने का वक्त आया है

Amitesh Amitesh Updated On: Apr 18, 2018 11:20 AM IST

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वेस्टमिंस्टर हॉल में पीएम मोदी: पिछली बार की तुलना में कैसे अलग होगा भाषण?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंदन के ऐतिहासिक वेस्टमिंस्टर सेंट्रल हॉल में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करने वाले हैं. भारतीय समय के मुताबिक यह कार्यक्रम रात 9 बजे से शुरू होगा. इस कार्यक्रम का नाम रखा गया है 'भारत की बात, सबके साथ'. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय के 2,000 लोगों को संबोधित करेंगे और उन लोगों के भारत से जुड़े सवालों के जवाब भी देंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वेस्टमिंस्टर सेंट्रल हॉल के कार्यक्रम के दौरान कुछ सवालों के जवाब भी देंगे. यह सवाल केवल वहां मौजूद लोग ही नहीं बल्कि, दुनिया के किसी भी हिस्से में बैठे भारतीय समुदाय के लोग भी सवाल पूछ सकेंगे. ये सवाल फेसबुक, टि्वटर और नमो ऐप के जरिए भी पूछे जा सकते हैं.

इस कार्यक्रम के दौरान मंच का संचालन प्रसून जोशी करने वाले हैं. प्रधानमंत्री मोदी का वेस्टमिंस्टर सेंट्रल हॉल में भारतीय समुदाय के लोगों का संबोधन काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि इस जगह पर ही 1946 में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की पहली बैठक हुई थी. इस हॉल में महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जैसी महान शख्सियतों ने भी पहले अपना संबोधन दिया है.

2015 में लंदन में भारतीय समुदाय को कर चुके हैं संबोधित

हालाकि इसके पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लंदन में अपने नवंबर 2015 के दौरे के वक्त भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित किया था. लेकिन उस वक्त का कार्यक्रम बड़ा था. क्योंकि उसमें लंदन के वेम्बले स्टेडियम में भारतीय समुदाय के करीब 60,000 लोग पहुंचे थे. लेकिन, इस बार महज 2,000 चुनिंदा लोगों को ही बुलाया गया है.

प्रधानमंत्री के इस वक्त भारतीय समुदाय को संबोधित करने के कार्यक्रम के वक्त का महत्व काफी ज्यादा है. क्योंकि अब 2019 के लोकसभा चुनाव में महज एक साल का वक्त बचा है. लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होने वाली है. ऐसे में अपनी सरकार की चार साल की उपलब्धियों के बारे में जानकारी देना प्रधानमंत्री के लिए ज्यादा अहम है.

2015 में वेंबले में पीएम मोदी.

2015 में वेंबले में पीएम मोदी.

अब आलोचना नहीं अपने कामों के बारे में बताने का वक्त

अब तक अपने हर दौरे में प्रधानमंत्री के निशाने पर विपक्ष रहा है. खासतौर से कांग्रेस और पिछली सरकारों के खिलाफ वो विदेशी धरती से भी अपनों को संबोधित करते हुए हमला बोलते रहे हैं. लेकिन, अब चार साल बीत जाने के बाद उन्हें दूसरों की आलोचना के बजाए अपने कामों के बारे में भी बताने का वक्त आ गया है.

ज्यादा तादाद में लोगों को संबोधित करने के दौरान वन वे कम्युनिकेशन ही होता है. लेकिन, कम तादाद में चुनिंदा लोगों को संबोधन और संवाद के जरिए प्रधानमंत्री की कोशिश अपनी बात को और मजबूती से रखने की है. माना जा रहा है कि इस संबोधन में संवाद के दौरान प्रधानमंत्री मोदी अपनी सरकार की विदेश नीति, देश की अर्थव्यवस्था, जीएसटी और विकास के दूसरे कामों के बारे में सवालों का जवाब दे सकते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी जहां भी जाते हैं भारतीय समुदाय के लोगों को हमेशा संबोधित करते हैं. प्रधानमंत्री बनने के कुछ ही महीने बाद 29 सितंबर 2014 को अमेरिका के न्यूयार्क का उनका संबोधन यादगार रहा था. न्यूयार्क के मैडिसन स्क्वायर में उनके संबोधन की अमेरिका से लेकर भारत तक खूब चर्चा रही. उसके बाद उन्होंने हर देश में जाकर अपनी छाप छोड़ने की कोशिश की. भारतीय समुदाय के लोगों को अपने देश से फिर से जोड़ने की उनकी कोशिश जारी रही.

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इस बार क्या संदेश देंगे पीएम?

नवंबर 2015 की उनकी लंदन यात्रा की तुलना में इस बार का कार्यक्रम थोड़ा  अलग इसीलिए है. उस वक्त भारतीय समुदाय के 60000 लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने एक साथ कई संदेश देने की कोशिश भी की थी. प्रधानमंत्री ने भारत में विविधता को ही विशेषता बताते हुए पूरी दुनिया को एक संदेश दिया था. उस वक्त मोदी सरकार के ऊपर कई तरह के आरोप लग रहे थे. खासतौर से असहिष्णुता का मुद्दा सरकार को बैकफुट पर धकेलने वाला था. लेकिन विविधता में एकता का संदेश मोदी ने लंदन से दिया. कारण पूरी दुनिया को संदेश देना था.

उन्होंने कहा था जिस भारत को आप टीवी पर्दे और अखबारों की सुर्खियों में देख रहे हैं वो उससे बड़ा महान है. इस एक बयान के जरिए उन्होंने बताने की कोशिश की थी कि भारत की जो तस्वीर पेश करने की कोशिश हो रही है, वैसी तस्वीर नहीं है. बल्कि यह हकीकत से कोसों दूर है.

उस वक्त मोदी के सामने एक विजन था, देश के लिए कुछ करने का प्लान था. लेकिन अब चार साल बीतने के बाद उस विजन पर कितना अमल हुआ है, यह बताने का वक्त आया है. लिहाजा इस बार संवाद के जरिए सवालों का जवाब देकर प्रधानमंत्री विदेशी धरती से देश के लोगों को अपनी सरकार के कामों और प्रयासों का संदेश देने वाले हैं.

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