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मोदी की कूटनीति: पाकिस्तान पड़ा अलग-थलग

पाकिस्तान भारत की गर्दन पर आतंकवाद की तलवार लटकाकर जम्मू-कश्मीर के सवाल पर बातचीत शुरु करना चाहता है.

Updated On: Dec 05, 2016 08:30 AM IST

सुरेश बाफना
वरिष्ठ पत्रकार

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मोदी की कूटनीति: पाकिस्तान पड़ा अलग-थलग

अमृतसर में अफगानिस्तान पर 14 देशों के हॅार्ट आॅफ एशिया सम्मेलन के अवसर पर पाकिस्तान की कोशिश थी कि भारत के साथ समग्र बातचीत की प्रक्रिया फिर से शुरु हो जाए. पिछले दस दिनों से इस संदर्भ में पाकिस्तान की तरफ से विशेष प्रयास हो रहे थे.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज अपने निर्धारित कार्यक्रम के विपरीत 15 घंटे पहले अमृतसर पहुंचे तो यह अटकलें लगना भी शुरु हो गई कि प्रधानमंत्री मोदी व उनके बीच बातचीत हो सकती है.

आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकती

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सम्मेलन में दिए गए अपने भाषण से न केवल पाकिस्तान को बल्कि दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अब आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकती है. यदि पाकिस्तान भारत के साथ बातचीत चाहता है तो उसे भारत के खिलाफ सक्रिय आतंकवादी संगठनों को बढ़ावा देने की नीति को छोड़नी होगी और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी करनी होगी.

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने भारत की जमीन से पाकिस्तान को लताड़ लगाने हुए कहा कि हमें सीमा-पार आतंकवाद की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी. अफगान राष्ट्रपति ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज को संबोधित करते हुए कि वे 50 करोड़ डालर की मदद अफगानिस्तान को देने की बजाय उसका उपयोग आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में करें.

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फोटो: पीटीआई

अफगानिस्तान में शांति, स्थिरता व विकास के सवाल पर होनेवाले इस सम्मेलन में अफगान राष्ट्रपति ने पाकिस्तान पर सीधे-सीधे आरोप लगा दिया कि वह आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल कर रहा है. अशरफ गनी ने किसी तालिबान नेता की इस टिप्पणी का भी जिक्र कर दिया कि यदि पाकिस्तान का समर्थन नहीं मिलता तो वे एक महीने भी जिन्दा नहीं रह पाते.

आतंकवाद पर पाकिस्तान अलग-थलग

आज पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के सवाल पर भारत, अफगानिस्तान व अमेरिका के बीच किसी भी स्तर पर कोई मतभेद नहीं है. पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ कार्रवाई तभी शामिल हुआ था, जब उसे धमकी दी गई थी. इसलिए पाकिस्तान को यह अहसास करना जरुरी है कि आतंकवाद की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.

मेजबान देश होने के नाते भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त भाषा का प्रयोग नहीं किया, लेकिन संदेश स्पष्ट था कि उन देशों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए जो आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं. पठानकोट में वायुसेना के अड्‍डे पर आतंकी हमले के बाद मोदी ने पाकिस्तान को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की घोषणा की थी, जिस पर वे आज भी काम कर रहे हैं.

हार्ट अॅाफ एशिया सम्मेलन में भारत और अफगानिस्तान ने सरताज अजीज को इस बात का अहसास करा दिया कि यदि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति को खत्म नहीं करेगा, तो अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उसके खिलाफ अभियान और भी तेज होगा.

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फोटो: पीटीआई

उधर अमेरिका ने भी कहा है कि प्रस्तावित 90 करोड़ अमेरिकी डालर की सहायता पाकिस्तान को तभी दी जाएगी, जब वह हक्कानी नेटवर्क को खत्म करने के लिए कार्रवाई करेगा. अफगानिस्तान में तैनात अमेरिकी सेना के कमांडर ने कहा है कि हक्कानी नेटवर्क आज भी अमेरिकी सेना व अफगानिस्तान के खिलाफ सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है.

पाकिस्तान भारत की गर्दन पर आतंकवाद की तलवार लटकाकर जम्मू-कश्मीर के सवाल पर बातचीत शुरु करना चाहता है. भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान के साथ यदि बातचीत की प्रक्रिया शुरु भी होगी, तो वह सिर्फ आतंकवाद के सवाल पर ही होगी.

पाकिस्तान के लिए अमृतसर सम्मेलन का संदेश स्पष्ट है कि यदि उसने आतंकवाद को विदेश नीति के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की नीति को नहीं छोड़ा तो सार्क की तरह अन्य अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग होने की प्रक्रिया तेज होगी.

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