Co Sponsor
In association with
In association with
S M L

पाकिस्तान: भारतीय की मदद कर रही लापता पत्रकार मिलीं

जीनत फ्रीलांस रिपोर्टर हैं. वो पाकिस्तान में लापता हुए लोगों के लिए आवाज उठाती थीं.

FP Staff Updated On: Oct 21, 2017 12:16 PM IST

0
पाकिस्तान: भारतीय की मदद कर रही लापता पत्रकार मिलीं

पाकिस्तान में लापता हो गए लोगों को ढूंढने में मदद करने वाली 24 साल की जर्नलिस्ट जीनत शहजादी को लापता होने के दो साल बाद ढूंढ लिया गया है. पाक के सुरक्षा बल के जवानों ने जीनत को पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बॉर्डर से ढूंढ निकाला है. ये खबर पाकिस्तानी अखबार डॉन ने पाकिस्तान मिसिंग पर्सन कमेटी के चीफ जस्टिस जावेद इकबाल के हवाले से दी है.

दिलचस्प बात ये है कि जीनत जब अगस्त, 2015 में लापता हुईं, उस वक्त वो एक भारतीय की मदद कर रही थीं. भारत के हामिद अंसारी को पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में पकड़ लिया गया था.

जावेद इकबाल ने बीबीसी से बातचीत में देश की दुश्मन एजेंसियों को जीनत के अपहरण के लिए आरोपी ठहराया है. लेकिन जीनत के परिवार वाले इसके लिए पाकिस्तानी सीक्रेट एजेंसी को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं. डॉन ने बताया है कि मार्च 2016 में जीनत के 17 साल के भाई सद्दाम हुसैन ने खुदकुशी कर ली थी, वो अपनी बहन के लापता होने से दुखी थे.

जासूसी के आरोप में गिरफ्तार की कर रही थीं तलाश

जीनत फ्रीलांस रिपोर्टर हैं. वो पाकिस्तान में लापता हुए लोगों के लिए आवाज उठाती थीं. वो सोशल मीडिया के जरिए भारतीय महिला फौजिया अंसारी के संपर्क में आई थीं. फौजिया हामिद अंसारी की मां थीं जो पाकिस्तान में लापता हो गए थे. इसके बाद फौजिया ने इस मामले की पड़ताल शुरू की.

उन्होंने पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के ह्यूमन राइट्स सेल में फौजिया अंसारी की तरफ से याचिका दायर की, जिसके बाद जांच शुरू हुई और पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसी ने यह कबूल किया कि हामिद उनकी हिरासत में है.

2015 में पाकिस्तान के मिलिट्री कोर्ट ने हामिद पर जासूसी का आरोप लगाकर उनको तीन साल की सजा सुना दी थी, इसी बीच जीनत भी लापता हो गईं. उनके घरवालों ने दावा किया कि हामिद के लिए याचिका दायर करने पर सुरक्षाबलों ने जबरन जीनत को पकड़कर चार घंटे तक पूछताछ की थी.

एक्टिविस्ट हिना जिलानी ने 2016 में बीबीसी को बताया था कि जीनत ने उन्हें जानकारी दी थी कि सुरक्षा एजेंसियां उनसे अंसारी के बारे में पूछताछ करने के लिए जबरन ले गई थीं.

फौजिया ने कहा अब राहत मिली है

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, मुंबई में रहने वाली टीचर फौजिया अंसारी जीनत के मिल जाने पर खुश हैं. उन्होंने कहा, 'मुझसे कहा गया था कि मेरे बेटे और जीनत में से पहले रिहाई के लिए किसी एक को चुनना होगा, मैंने जीनत को चुना. मुझे काफी राहत महसूस हो रही है क्योंकि जीनत मेरी वजह से ही इस परेशानी से जूझ रही थीं.' फौजिया की जीनत से आखिरी बार बात अगस्त 2015 में हुआ था.

उन्होंने बताया कि 'वो मेरा हाल-चाल लेती रहती थीं. वो जानती थीं कि जब भी वो सुनवाई के लिए जाती थीं तो मैं दुआ करती थी. रात में घर पहुंचने के बाद वो मुझे कॉल करके बताती थीं कि वो घर पहुंच गई हैं, तब मैं कहीं आराम कर पाती थी.'

(फोटो: पाकिस्तानी जर्नलिस्ट बीना सरवर की वॉल से)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
AUTO EXPO 2018: MARUTI SUZUKI की नई SWIFT का इंतजार हुआ खत्म

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi