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कुलभूषण जाधव की फांसी पर ICJ में दूसरी बार जवाब दाखिल करेगा पाकिस्तान

आईसीजे में अगले साल मार्च-अप्रैल तक मुकदमों की तारीख तय है, इसलिए 2019 की गर्मियों के बाद ही यह मामला अंतरराष्ट्रीय अदालत के समक्ष आ सकता है

Updated On: Jul 12, 2018 04:30 PM IST

PTI

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कुलभूषण जाधव की फांसी पर ICJ में दूसरी बार जवाब दाखिल करेगा पाकिस्तान

कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) में 17 जुलाई को दूसरा जवाबी निवेदन पत्र दायर करेगा. जाधव फिलहाल जासूसी के आरोपों में पाकिस्तान की जेल में बंद हैं. पाकिस्तानी सेना ने उन्हें जासूसी और आतंकवाद का दोषी बताते हुए मौत की सजा सुनाई है.

आईसीजे ने बीते 23 जनवरी को भारत और पाकिस्तान को इस मामले में दोबारा जवाबी निवेदन पत्र दायर करने का आदेश दिया था. भारत ने अपने पहले निवदेन पत्र में जाधव को बेगुनाह बताते हुए इंसाफ दिलाने की मांग की थी. पाकिस्तान इस पत्र के जवाब में दोबारा निवेदन पत्र दायर करने की तैयारी में है.

पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, पिछले हफ्ते अटॉर्नी ख्वार कुरेशी ने कुलभूषण जाधव मामले की विस्तृत जानकारी प्रधानमंत्री नसीरूल मुल्क को दी थी. आईसीजे में कुरेशी ही इस मामले की जिरह कर रहे हैं. कुरेशी के अलावा इस बैठक में पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल खालिद जावेद खान और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की.

अखबार की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि आईसीजे में दाखिल किए जाने वाले दूसरे जवाबी निवेदन पत्र का मसौदा ख्वार कुरेशी ने ही तैयार किया है.

दूसरा जवाबी निवेदन पत्र दायर होने के बाद आईसीजे सुनवाई की तारीख का ऐलान करेगा जिस पर अगले साल ही सुनवाई हो पाने की संभावना जताई जा रही है.

अंतरराष्ट्रीय मुकदमों की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ वकील ने ट्रिब्यून को बताया कि इस साल जाधव मामले पर सुनवाई की संभावना न के बराबर है.

आईसीजे में अगले साल मार्च-अप्रैल तक मुकदमों की तारीख तय है, इसलिए 2019 की गर्मियों के बाद ही यह मामला अंतरराष्ट्रीय अदालत के समक्ष आ सकता है.

पाकिस्तानी सेना की ओर से भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को जासूसी और आतंकवाद के आरोप में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भारत पिछले साल मई में आईसीजे में पहुंचा है.

बीते वर्ष 18 मई को आईसीजे के 10 जजों ने पाकिस्तान को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि जबतक मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, जाधव को फांसी न दी जाए.

आईसीजे में दायर अपनी याचिका में भारत का आरोप है कि कुलभूषण जाधव को राजनयिक संपर्क न देकर पाकिस्तान विएना संधि का उल्लंघन कर रहा है. याचिका में यह भी कहा गया है कि विएना संधि में ऐसा कहीं नहीं लिखा कि जासूसी केस में फंसे किसी व्यक्ति को राजनयिक संपर्क की सुविधा नहीं दी सकती.

भारत की इस दलील के खिलाफ बीते 13 दिसंबर को पाकिस्तान ने आईसीजे में एक जवाबी निवेदन पत्र दायर किया. पत्र में पाकिस्तान ने कहा है कि विएना संधि वैधानिक स्तर पर दी जाती है न कि जासूसी जैसे गोपनीय अपराधों के काम के लिए. पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि 'जाधव एक मुस्लिम व्यक्ति के पासपोर्ट पर पाकिस्तान में घुसे थे, इसलिए उनके पास अपनी बात रखने की कोई गुंजाइश नहीं बची है.'

पाकिस्तान ने यह भी कहा कि भारत अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर सका है कि कोई सेवारत नौसेना का कमांडर किसी छद्म नाम पर कैसे यात्रा कर सकता है. पाकिस्तान की यह भी दलील है कि चूंकि जाधव सेवारत थे, इसलिए उन्हें साफ तौर पर एक विशेष अभियान के तहत जासूस बनाकर भेजा गया. जबकि भारत जाधव को पाकिस्तानी सेना की ओर से दी गई सजा को 'हास्यास्पद' बता रहा है.

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