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जल्द दिवालिया घोषित हो सकता है पाकिस्तान, केवल डेढ़ महीने का विदेशी कैश रिजर्व

दुनिया की सबसे बड़ी रेटिंग एजेंसी फिच ने पाकिस्तान की रेटिंग B से घटाकर B- कर दी है. रेटिंग घटने से पाकिस्तान में विदेशी निवेश भी घट जाएगा

Updated On: Dec 15, 2018 11:16 AM IST

FP Staff

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जल्द दिवालिया घोषित हो सकता है पाकिस्तान, केवल डेढ़ महीने का विदेशी कैश रिजर्व

भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान जल्द ही दिवालिया घोषित हो सकता है. पाकिस्तान के पास केवल 1.5 महीने का विदेशी कैश रिजर्व शेष है... ऐसा कहना है दुनिया की सबसे बड़ी रेटिंग एजेंसी फिच का. फिच ने पाकिस्तान की रेटिंग B से घटाकर B- कर दी है. रेटिंग घटने से पाकिस्तान में विदेशी निवेश भी घट जाएगा.

निवेश के घटने का प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक पड़ता है. ऐसे में सबसे पहले तो देश की करेंसी रुपए में तेजी से गिरावट आ सकती है. विदेशी चीजें खरीदना महंगा हो जाएगा. सरकार और आम आदमी पर महंगाई बोझ बढ़ जाएगा. इस साल जनवरी से अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पाकिस्तान के रुपए में 26 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है.

सवाल उठता है कि रेटिंग एजेंसी फिच ने पाकिस्तान की रेटिंग घटाई क्यों?

फिच का कहना है कि देश पर लगातार बढ़ रहे कर्ज के चलते रेटिंग घटाने का फैसला लिया है. पाकिस्तान के विदेशी पूंजी भंडार में तेज गिरावट आई है. अब देश के पास सिर्फ 1.5 महीने के इंपोर्ट को कवर करने का कैश रिजर्व बचा है. मतलब साफ है कि विदेशों से सामान खरीदने के लिए उसके पास सिर्फ 1.5 महीने की पूंजी है.

अब क्या होगा

एसकोर्ट सिक्योरिटी के रिसर्च हेड आसिफ इकबाल ने न्यूज़18 हिंदी को बताया कि पाकिस्तान की रेटिंग घटने से उसके कर्ज डिफॉल्ट (दिवालिया) का खतरा बढ़ गया है. अब उसे अपना कर्ज़ चुकाने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे. पाकिस्तान की करेंसी में तेज गिरावट आ सकती है. लिहाजा देश में महंगाई बढ़ जाएगी.

कौन तैयार करता है रेटिंग

रेटिंग तैयार करते समय कंपनियां एजेंसियों के साथ गोपनीय बातों को भी शेयर करती हैं. एजेंसियों को उन बातों का भी पता रहता है जो आमतौर पर सामान्य लोग नहीं जान पाते हैं. इसके साथ ही जब किसी कंपनी आदि के बारे में रेटिंग की रिपोर्ट तैयार हो जाती है तो उसे जारी करने से पहले संबंधित कंपनी से आंकड़ों आदि के बारे में बात की जाती है जिससे तथ्यों की जांच की जा सके.

खराब रेटिंग का मतलब

अगर किसी कंपनी की रेटिंग बहुत नीचे है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह दिवालिया होने जा रही है या भविष्य में अच्छा नहीं करेगी. हां जहां तक सूचना की बात है तो यह सच है कि इनके माध्यम से निवेशकों को मोटे तौर पर कंपनी की वित्तीय स्थिति के बारे में जानकारी मिल जाती है जिसका वे लाभ ले सकते हैं.

कितने रेटिंग सिंबल होते हैं

एजेंसी ने ग्रेडिंग के लिए 9 सिम्बल- Aaa, Aa, A, Baa, Ba, B, Caa, Ca और C तय किए हैं. Aa से लेकर Caa तक की 1, 2, 3 सब-कैटेगरी भी होती हैं.

भारत की क्या है स्थिति?  

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर अनुसार बीते 12 सालों से फिच ने भारत की रेटिंग को अपग्रेड नहीं किया है. भारत को फिच ने न्यू्नतम निवेश ग्रेड 'BBB-' दिया है.

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