S M L

पाकिस्तान: ईशनिंदा मामले में SC ने दी आसिया बीबी को राहत, फांसी की सजा पर लगाई रोक

चीफ जस्टिस निसार ने अपने फैसले में ये भी कहा है कि अगर आसिया बीबी पर और कोई चार्ज नहीं है तो उन्हें तुरंत छोड़ दिया जाए

Updated On: Oct 31, 2018 12:18 PM IST

FP Staff

0
पाकिस्तान: ईशनिंदा मामले में SC ने दी आसिया बीबी को राहत, फांसी की सजा पर लगाई रोक
Loading...

ईशनिंदा के मामले में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने ईसाई महिला आसिया बीबी को बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए आसिया बीबी की सजा पर रोक लगा दी है.

दरअसल इस मामले में ईशनिंदा के आरोप में आसिया बीबी को नवंबर 2010 में मौत की सजा सुनाई गई थी. लाहौर की हाईकोर्ट ने 2012 में इस फैसले पर सहमति जताई थी, जिसके बाद आसिया बीबी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं.

न्यूज 18 की रिपोर्ट के पाक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस साकिब निसार की अध्यता वाली तीन सदस्यों की पीठ ने बुधवार को ये फैसला सुनाया. हालांकि ये फैसाल 3 हफ्ते पहले ही ले लिया गया था, लेकिन ईशनिंदा के समर्थकों की तरफ से प्रदर्शन करने की धमकी दिए जाने के चलते फैसला सुनाने में देर हुई.

चीफ जस्टिस निसार ने अपने फैसले में ये भी कहा है कि अगर आसिया बीबी पर और कोई चार्ज नहीं है तो उन्हें तुरंत छोड़ दिया जाए.

क्या था पूरा मामला?

लाहौर के निकट शेखपुरा जिले के ननकाना कस्बे में रहने वाली आसिया बीबी पर साल 2009 में ईशनिंदा का इल्जाम लगा. घटना के मुताबिक आसिया बीबी खेत में मजदूरी कर रही थीं. उस वक्त गांव के एक बुज़ुर्ग की पत्नी ने उनसे पीने के लिए पानी भरने को कहा. बताया जाता है कि वहीं मजदूरी कर रही दूसरी मुस्लिम महिलाओं ने एक गैर-मुस्लिम, आसिया बीबी द्वारा लाए पानी को ‘अशुद्ध’ कह कर पीने से इनकार कर दिया.

आसिया बीबी का अपराध यह था कि उन्होंने इस भेदभाव पर सवाल कर दिया कि ‘क्या हम इंसान नहीं हैं?’

आसिया बीबी के सवाल ने बहस की शक्ल अख्तियार कर ली. गांव की नाराज महिलाओं ने स्थानीय मौलवी कारी सलीम से इस विवाद की शिकायत की और आसिया बीबी पर पैगंबर मोहम्मद के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप मढ़ दिया. मौलवी ने फौरन स्थानीय पुलिस को सूचित कर आसिया को पैगम्बर साहब का अपमान करने के आरोप में गिरफ्तार करवा दिया.

हालांकि आसिया बीबी ने अपने ऊपर लगे आरोपों से लगातार इनकार किया. इसके बावजूद इस पूरे मामले की निष्पक्षता की पुष्टि करने वाला कोई नहीं था. मुकदमे के न्यायाधीश नवेद इकबाल ने झूठे आरोपों की संभावना को ‘पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया’ और कहा कि इसमें उन्हें ‘मामले की गंभीरता को कम करने वाली परिस्थितियां नजर नहीं आतीं’.

आसिया बीबी ने इस फैसले के खिलाफ लाहौर हाई कोर्ट में अपील दायर की. लेकिन उन्हें हिरासत में लेकर एकांत में डाल दिया गया. आलम ये रहा कि हिरासत या सुनवाई के दौरान वकील भी उनसे मुलाकात नहीं कर सकते थे. इसके बाद हाई कोर्ट ने भी इस मामले में आसिया की सजा बर्करार रखी. इसके बाद आसिया बीबी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची, जिसकी पहली सुनवाई 2015 को हुई.

क्या है ईश निंदा कानून?

पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून में इबादतगाहों को अपवित्र करने, मजहबी भावनाएं भड़काने, पैगंबर हजरत मोहम्मद की आलोचना और कुरान शरीफ को नुकसान पहुंचाने जैसे अपराधों के लिए सजा का प्रावधान है. इस कानून में कुरान को क्षति पहुंचाने वाले के लिए उम्रकैद, जबकि पैगंबर की निंदा करने वाले के लिए मौत की सजा का प्रावधान है.

0
Loading...

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
फिल्म Bazaar और Kaashi का Filmy Postmortem

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi