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वह हमारा ही पैसा है अमेरिका तो बस भरपाई कर रहा है: पाक विदेश मंत्री

30 करोड़ डॉलर की सैन्य सहायता रोके जाने पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा, 'यह हमारा पैसा है जो हमने खर्च किया है और अमेरिका केवल इसकी भरपाई कर रहा है'

Updated On: Sep 03, 2018 07:07 PM IST

FP Staff

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वह हमारा ही पैसा है अमेरिका तो बस भरपाई कर रहा है: पाक विदेश मंत्री

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने अमेरिका द्वारा 30 करोड़ डॉलर की सैन्य सहायता रोके जाने पर कहा है कि यह धनराशि पाकिस्तान की ही है. जो अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में खर्च की थी और यह राशि उसे वापस मिलनी चाहिए.

पेंटागन ने शनिवार को घोषणा की थी कि वह आतंकवादी समूहों से निपटने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाने के चलते पाकिस्तान को दी जाने वाली 30 करोड़ डॉलर की सैन्य सहायता को रोकेगा. इस पर कुरैशी ने कहा कि इस मामले को पांच सितम्बर को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ की देश की यात्रा के दौरान उठाया जाएगा.

सहयोग या सहायता नहीं बल्कि वो हमारा ही पैसा है

अमेरिका के निर्णय की घोषणा के बाद रविवार को कुरैशी ने कहा, '30 करोड़ डॉलर न तो सहायता है और न ही सहयोग. पाकिस्तान ने यह राशि अपने संसाधनों से आतंकवादियों और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में खर्च की है. लेकिन अब वे इसे वापस देने के इच्छुक नहीं है.'

उन्होंने कहा, 'यह हमारा पैसा है जो हमने खर्च किया है और वे (अमेरिका) केवल इसकी भरपाई कर रहे थे.' इससे पूर्व उन्होंने बीबीसी उर्दू से कहा कि सैद्धांतिक रूप से अमेरिका को पाकिस्तान को यह धनराशि वापस करनी चाहिए. क्योंकि शांति और स्थिरता का माहौल बनाने और आतंकवाद को पराजित करने के उद्देश्य से इसे खर्च किया गया है.

उनके साथ बैठ कर चर्चा करेंगे

उन्होंने कहा, 'हम बैठेंगे और उनके के साथ इस पर चर्चा करेंगे. हम दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने का प्रयास करेंगे. हम उन्हें सुनेंगे और उनके समक्ष अपने रुख को रखेंगे.' धनराशि रोके जाने पर पाकिस्तान के विकल्पों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान अमेरिका से बात करेगा क्योंकि पाकिस्तान पहले ही यह धनराशि खर्च कर चुका है.

कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान पोम्पिओ की आगामी यात्रा का स्वागत करता है क्योंकि इससे एक दूसरे के नजरिए को समझने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और अमेरिका के बीच विश्वास में कमी आई है. लेकिन सरकार संबंधों को सुधारना और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली चाहती है.

(इनपुट भाषा से)

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