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टेरर फंडिंगः पाक पर नजर रखेगी FATF, अमेरिका प्रस्ताव को मिला समर्थन

आतंकवादी संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने के लिए ऐसा किया गया है

FP Staff Updated On: Feb 23, 2018 04:16 PM IST

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टेरर फंडिंगः पाक पर नजर रखेगी FATF, अमेरिका प्रस्ताव को मिला समर्थन

पेरिस में अपनी हालिया बैठक में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को 'ग्रे सूची' पर डाल दिया है. आतंकवादी संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने के लिए ऐसा किया गया है. अमेरिका की ओर से लाए गए प्रस्ताव का समर्थन ब्रिटेन, फ्रांस और भारत जैसे देशों ने किया. यहां एफएटीएफ ने 1 के मुकाबले 36 वोट देकर पाकिस्तान को ग्रे सूची में चुना.

पाकिस्तान के पक्ष में केवल तुर्की ने मतदान किया. चौंकानेवाली बात ये रही कि उसके सबसे खास दोस्त चीन ने भी यहां उसकी मदद नहीं की. इससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और बैंकों को पाकिस्तान में कारोबार करना मुश्किल हो जाएगा. साथ ही पाकिस्तानी व्यवसाइयों के लिए विदेशों में पैसा जुटाने में भी मुश्किल होगा.

इस प्रतिबंध के बाद पाकिस्तान को कर्ज चुकाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. उसे इस साल जून तक लगभग 300 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है. अगर वह असफल रहता है तो एसएंडपी, मूडीज और फिच जैसी अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों में अपना ग्रेडिंग खो देगा.

पाकिस्तान की राजनीति पर भी पड़ सकता है इसका असर 

इसका प्रभाव पाकिस्तान की राजनीति पर भी पड़नेवाला है. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीपीआई) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के विरोधियों के दल ने इस प्रतिबंध का इस्तेमाल सत्तारूढ़ पीएमएल (एन) पर हमला करने में कर सकती है. आगामी आम चुनावों में पीएमएल (एन) पर इसका भी नकारात्मक प्रभाव हो सकता है.

शुक्रवार को एक रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन, सऊदी अरब और तुर्की, पाकिस्तान के तीन करीबी सहयोगियों ने ट्रम्प प्रशासन से हाथ मिला लिया है. जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी फंडिंग वॉच सूची इस्लामाबाद को शामिल किया गया है.

हालांकि पाकिस्तान इन सब चीजों से इतर जीत का दावा किया है. उसका मानना है कि अमेरिकी वित्तीय एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की पेरिस की बैठक में पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई का जो फैसला लिया गया है, वह इतनी आसानी से लागू नहीं किया जा सकता. यह तभी लागू हो सकता है जब इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सहमति मिलेगी. यानी इसे सिक्योरिटी काउंसिल में पास कराना जरूरी होगा.

(न्यूज 18 के लिए जेड जैकब की रिपोर्ट)

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