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मोदी का इजरायल दौरा: पाक मीडिया के दिल पर छुरियां चलीं

पाकिस्तान मीडिया भारत और इजरायल के बीच बढ़ती साझेदारी को पाकिस्तान के लिए खतरा बताया जा रहा है

Seema Tanwar Updated On: Jul 07, 2017 09:11 AM IST

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मोदी का इजरायल दौरा: पाक मीडिया के दिल पर छुरियां चलीं

यहूदी देश होने के नाते इजरायल पाकिस्तान के गले वैसे ही नहीं उतरता है, अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां दौरे पर गए तो पाकिस्तानी मीडिया के लिए "एक तो करेला और ऊपर से नीम चढ़ा" वाली कहावत जैसी स्थिति हो गई.

कहीं भारत और इजरायल के बीच बढ़ती साझेदारी को पाकिस्तान के लिए खतरा बताया जा रहा है, कहीं इससे पूरी मुस्लिम दुनिया के लिए चुनौती पैदा होने की बात कही जा रही है. कई अखबारों ने कश्मीरियों और फलस्तीनियों की स्थिति को एक जैसा बताते हुए भारत और पाकिस्तान पर सरकारी आतंकवाद फैलाने का आरोप भी लगाया है. कुछ अखबार पाकिस्तानी सरकार को संभावित खतरों से निपटने की रणनीति बनाने को भी कह रहे हैं.

‘आतंक का त्रिकोण’

पाकिस्तान की कट्टरपंथी पार्टी जमात ए इस्लामी से जुड़ा अखबार ‘जसारत’ प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे पर किस कदर तपा हुआ है, इसका अंदाज अखबार के संपादकीय से हो जाता है.  अखबार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतान्याहू, तीनों नेताओं को आंतकवादी बताया है.

अखबार के शब्दों में, 'भारतीय आतंकवादी नरेंद्र मोदी अमेरिकी आतंकवादी डॉनल्ड ट्रंप को शीशे में उतारने के बाद एक बड़े और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी इजरायली प्रधानमंत्री नेतान्याहू से मिलने तेल अवीव पहुंचे गए. इस तरह अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का त्रिकोण पूरा हो गया.'

अखबार लिखता है कि मोदी और नेतन्याहू ने इस मौके पर पाकिस्तान के खिलाफ भारत की पूरी मदद करने का एलान किया और हमास और लश्कर ए तैयबा को बराबर खतरनाक बताया. अखबार के मुताबिक दोनों नेताओं ने कहा कि उनके देश एक ही तरह के दुश्मन से परेशान हैं.

अखबार कहता है कि अब भारत और इजरायल पाकिस्तान के खिलाफ एकजुट होने की बात कर रहे हैं जबकि अमेरिका भी पाकिस्तान को आंख दिखा रहा है, फिर भी नवाज शरीफ को अमेरिका से उम्मीदें हैं.

इजरायल पर निर्भरता

नवा ए वक्त’ ने भी भारत और इजरायल के बीच हुए समझौतों को पाकिस्तान के खिलाफ गठजोड़ बताया है. अखबार लिखता है कि भारत के इजरायल के साथ 25 बरसों से संबंध हैं लेकिन पिछले डेढ़ दशक में इजरायल पर भारत की निर्भरता बहुत बढ़ गई है.

अखबार के मुताबिक भारत को सैन्य साजो सामान सप्लाई करने के मामले में इजरायल चौथा सबसे बड़ा देश है और उसने भारत को कई तरह के मिसाइल सिस्टम, रडार और हथियार मुहैया कराए हैं.

अखबार ने इजरायली विदेश मंत्रालय के डिप्टी डायरेक्टर मार्क सूफर के इस बयान को बेहद चिंताजनक बताया है कि भारत और इसराल दोनों आंतकवाद को झेल रहे हैं और इजरायल भारत को पाकिस्तान की तरफ से होने वाले आतंकवाद से निटपने में हर तरह की मदद देगा. अखबार ने भारत और इजरायल के बीच गठजोड़ को पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पूरी मुस्लिम दुनिया के लिए खतरा बताया है.

अखबार लिखता है कि पाकिस्तान भारत के साथ हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं होना चाहता है, लेकिन भारत जिस तरह से हथियारों का जखीरा जमा कर रहा है, उससे आंखें भी तो नहीं मूंद सकता है. अखबार कहता है कि इस गठजोड़ के कारण पाकिस्तान के लिए पैदा होने वाली चिंताओं से दुनिया को अवगत कराने की जरूरत है.

मुसलमानों के दुश्मन

उम्मत’ ने भारत और इजरायल दोनों को सरकारी आतंकवाद में शामिल देशों का नाम दिया. अखबार ने जहां भारत को कश्मीरियों पर जुल्म ढाने का जिम्मेदार बताया है, वहीं इजरायल को फलस्तीनी लोगों के दमन के लिए कठघरे में खड़ा किया है.

अखबार इस बात से सख्त नाराज है कि तेल अवीव में एयरपोर्ट पर मोदी के स्वागत के लिए अहमदिया यानी कादियानी मुसलमान भी मौजूद थे, जिन्हें पाकिस्तान में मुसलमान नहीं माना जाता.

अखबार की राय में इस्लाम और मुससलमानों से भारत और इजरायल की कट्टरपंथी सरकारों की नफरत किसी से छिपी नहीं है और सारी दुनिया जानती है कि इजरायल मध्य पूर्व में जहां मुसलमानों का सबसे बड़ा दुश्मन है, वहीं दक्षिण एशिया में भारत अपने अल्पसंख्यकों (मुसलमानस, सिख और ईसाई आदि) के अलावा जम्मू कश्मीर के मुसलमानों पर बहुत अत्याचार कर रहा है.

अखबार लिखता है कि यह सिर्फ संयोग की बात नहीं है कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश भारत और इजरायल का समर्थन करते हैं और उन्हें खतरनाक हथियार समेत हर तरह की मदद देते हैं. अखबार की नजर में यह सब मुसलमानों के दुश्मन देश हैं.

दूसरी तरफ ‘एक्सप्रेस’ लिखता है कि नरेंद्र मोदी ने मध्य पूर्व के देशों के साथ व्यापारिक, रक्षा और सामाजिक संबंधों को बढ़ाने पर जोर दिया है.

अखबार की राय में इस वक्त जब मध्य पूर्व की स्थिति सऊदी अरब, कतर और ईरान के तनाव के कारण फ्लैशपॉइंट बनी हुई है, ऐसे में पाकिस्तान को भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों के नए पैराडाइम कायम करने की जरूरत है. अखबार ने पाकिस्तान सरकार को नसीहत दी है कि वह भारत और इजरायल के संबंधों के मद्देनजर अपनी विदेश नीति को राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतों के मुताबिक आकार दे.

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