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भारत को खुश करने के लिए अमेरिका ने रोकी मदद: पाक मीडिया

अमेरिका और भारत जहां 2+2 डील में सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं वहीं पाकिस्तानी मीडिया में यह खबर है कि अमेरिका ने भारत के इशारे पर आर्थिक सहयोग रोका है

Updated On: Sep 04, 2018 09:10 AM IST

Seema Tanwar

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भारत को खुश करने के लिए अमेरिका ने रोकी मदद: पाक मीडिया

इसे कहते हैं सिर मुंडाते ही ओले पड़ना. पाकिस्तान में इमरान खान सरकार ने सत्ता संभाली ही है कि अमेरिका ने मदद में फिर कटौती कर दी है. ट्रंप प्रशासन ने अपने ताजा फैसले के तहत पाकिस्तान को मिलने वाली 30 करोड़ डॉलर की रकम रोक दी है.

पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में अमेरिकी सरकार के इस कदम को कहीं भारत को खुश करने की कोशिश बताई जा रही है तो कहीं अमेरिका पर पाकिस्तान की तथाकथित कुरबानियों को नजरअंदाज करने के आरोप मढ़े जा रहे हैं.

लेकिन इस बात को मानने को कोई तैयार नहीं है कि दरअसल अमेरिका पाकिस्तान का दोहरा खेल समझ गया है. अमेरिका से अरबों डॉलर वसूलने के बावजूद उसने कभी आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की.

ताश का नया पत्ता

‘जंग’ अखबार ने अमेरिकी मदद में कटौती को सीधे-सीधे भारत से जोड़ा है. अखबार लिखता है कि मोदी सरकार को खुश करने के लिए ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान पर दबाव बनाए रखने की कोशिश में हर एक दो महीने बाद ताश का एक नया पत्ता फेंक रहा है.

अखबार लिखता है कि पाकिस्तान ने बीते सात दशकों के दौरान अमेरिका के सहयोगी की हैसियत से जो ‘सकारात्मक किरदार’ अदा किया है, अमेरिका की मौजूदा सरकार उसे झुठलाने पर तुली हुई है.

अखबार कहता है कि अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो के पाकिस्तान दौरे से चार दिन पहले मदद रोकने का फैसला किया है. इससे साफ मतलब है कि यह पाकिस्तान पर मनमानी मांगें मनवाने के लिए दबाब डालने की कोशिश है लेकिन अब पाकिस्तान ने फैसला कर लिया है कि किसी की कोई गलत बात नहीं मानी जाएगी.

अमेरिका ना ले इम्तिहान

रोजनामा जिन्नाह लिखता है कि इस साल के शुरू में भी अमेरिकी कांग्रेस ने पाकिस्तान को दी जाले वाली 50 करोड़ डॉलर की मदद रोक ली थी और इस तरह ताजा फैसले के बाद पाकिस्तान की 80 करोड़ डॉलर की मदद की रकम रोकी जा चुकी है.

अखबार लिखता है कि अमेरिका दरअसल भारत की जुबान बोलता है और पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को तैयार है. अखबार के मुताबिक अमेरिका पाकिस्तान का ऐसा इम्तिहान ना ले जो दोनों देशों के रिश्तों में खटास लाए.

अखबार ने अमेरिकी विदेश मंत्री के आगामी पाकिस्तान दौरे का जिक्र करते हुए लिखा है कि अमेरिका को यह याद दिलाने की जरूरत है कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में पाकिस्तान का 123 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है जबकि आपकी तरफ से दी जाने वाली मदद आटे में नमक के बराबर भी नहीं है.

वहीं रोजनामा ‘एक्सप्रेस’ ने अपने संपादकीय में इमरान खान सरकार के सामने मौजूद आर्थिक चुनौती का जिक्र किया है. अखबार कहता है कि देश को आर्थिक और वित्तीय संकट से निकाल तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ाना सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है.

अखबार के मुताबिक हालात इतने गंभीर हैं कि सरकार के पास देश के आर्थिक तंत्र को चलाने के लिए पैसा नहीं है. वित्त मंत्री असर उमर ने सीनेट को बताया कि देश की व्यवस्था को चलाने के लिए तुरंत नौ अरब डॉलर की जरूरत है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के सामने जाने या ना जाने का फैसला संसद के सलाह मशविरे से होगा.

अखबार के मुताबिक, कई विश्लेषक मानते हैं कि सिर पर आईएमएफ का कर्जा चढ़ाने से अच्छा है कि विदेश में बसे पाकिस्तानियों से चंदा और अपने वतन में निवेश की अपील की जाए.

काला धन

दूसरी तरफ विदेशों में जमा पाकिस्तानियों के काले धन को वापस लाने से जुड़े मुकदमे की भी वहां के मीडिया में खासी चर्चा है. रोजनामा ‘औसाफ’ कहता है कि केंद्रीय बैंक के गवर्नर के नेतृत्व वाली कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक रिपोर्ट सौंपी है जिसके मुताबिक सबसे पहले दुबई में मौजूद काले धन को वापस लाने का फैसला किया गया है.

अखबार की राय है कि खाड़ी देशों में जमा और निवेश के रूप में लगाई गई दौलत को अगर वापस लाने में कामयाबी मिली तो यह देश के लिए बड़ी खुशखबरी होगी लेकिन इस बात को लेकर कोई फौरी उम्मीद बेमानी होगी.

रोजाना ‘दुनिया’ ने भी इस मुद्दे पर संपादकीय लिखा और शीर्षक लगाया है: लूटी हुई दौलत को वापस लाने के कदम. अखबार कहता है कि टैक्स चोरी करने और देश का पैसा लूटने वालों के खिलाफ बेशक सख्ती से पेश आना होगा, लेकिन सख्त कदमों के साथ सरकार एमनेस्टी स्कीम को भी आजमा सकती है.

अखबार कहता है कि कड़ी पूछताछ और जांच से बचने के लिए बहुत से टैक्स चोर अपनी रकम का एक हिस्सा देकर अपना पिंड छुड़ाने को तरजीह देंगे. अखबार के मुताबिक निश्चित शर्तों के साथ इस तरह की स्कीमें दुनिया भर में हैं, जिनसे राजस्व में इजाफा होता है और भविष्य में टैक्स की व्यवस्था को बेहतर करने में मदद मिलेगी.

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