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भारत-अफगान की साजिशों के जाल में फंसा पाकिस्तान: पाक मीडिया

पाकिस्तानी उर्दू मीडिया ने आदत के मुताबिक अफगानिस्तान से तनाव के पीछे भी भारत का हाथ बताया है

Seema Tanwar Updated On: May 08, 2017 09:29 AM IST

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भारत-अफगान की साजिशों के जाल में फंसा पाकिस्तान: पाक मीडिया

पाकिस्तान के लिए सीमाओं पर लगातार बढ़ती मुश्किलें वहां के उर्दू मीडिया में छाई हुई हैं. भारत से लगने वाली पाकिस्तान की सरहद पर तनातनी और दोनों तरफ से गोलाबारी की खबरें तो आप आए दिन सुनते ही हैं,  लेकिन अफगानिस्तान के मोर्चे पर बीते कई दिनों से पाकिस्तान लगभग युद्ध के हालात झेल रहा है.

इस दौरान जहां पाकिस्तान के कम से कम 10 लोग मारे गए हैं,  वहीं उसने जवाबी कार्रवाई में अफगानिस्तान की तीन चौकियों को उड़ाने और कम से कम 50 अफगान सैनिकों को मारने का दावा किया है. कई पाकिस्तानी अखबारों ने जहां अफगानिस्तान के साथ पैदा तनाव का जल्द कोई न कोई हल निकाले पर बल दिया है, वहीं आदत के मुताबिक इसके पीछे भारत का हाथ भी बताया है. यानी इस तनाव ने पाकिस्तानी अखबारों को भारत पर बरसने का एक और मौका दे दिया है.

पाक-अफगान तकरार

जंग’ लिखता है कि सरहदी इलाकों में जनगणना करने गए पाकिस्तानी अधिकारियों और उनकी हिफाजत के लिए तैनात सुरक्षाकर्मियों पर अफगानिस्तान की तरफ से गोलाबारी करना पाकिस्तानी जनता के लिए गहरी चिंता की बात है.

अखबार के मुताबिक यह हकीकत किसी से छिपी नहीं है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान, दोनों देशों की जनता के हित गहरे तौर पर एक दूसरे जुड़े हैं, दोनों एक ही धर्म को मानते हैं, दोनों के बीच सदियों से सांस्कृतिक और पारंपरिक रिश्ते हैं, जिन्हें गैरों के पैदा हालात की भेंट चढ़ने से बचाना दोनों देशों के नेतृत्व की जिम्मेदारी है.

अखबार पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच ताजा तनाव की वजह भारत को मानता है. उसकी दलील है कि भारत कश्मीर में आजादी की मुहिम को दबाने के लिए पाकिस्तान पर खुद नियंत्रण रेखा पर दबाव डाल रहा है और अफगानिस्तान के जरिए पश्चिमी सीमा पर दबाव डलवा रहा है.

औसाफ’ ने भी अपने संपादकीय में पाकिस्तान को पूर्वी और पश्चिमी दोनों सीमाओं पर घेरे जाने की बात उठाई है. अखबार लिखता है कि पाकिस्तान चीन दोस्ती के साथ साथ तुर्की और ईरान के बढ़ती नजदीकियों से दुश्मन के सीने में आग लग गई है.

अखबार की राय में अफगान सरकार की भलाई इसी में है कि वह आक्रामता को छोड़ दे और अगर वह नरेंद्र मोदी की मुहब्बत में पागलपन दिखाते हुए अपनी सरजमीन को पाकिस्तान के दुश्मनों को इस्तेमाल करने की इजाजत देती है तो फिर वह सिर्फ उसी के साथ रिश्ते रखे.

साजिशों का जाल

रोजनामा ‘पाकिस्तान’ लिखता है कि बलूचिस्तान के इलाके चमन में जो टीम जनगणना करने गई थी, वह पूरी तरह पाकिस्तानी क्षेत्र में थी, इसलिए उस पर फायरिंग को किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता.

अखबार आगे जहां ऐसी घटनाओं को रोकने की जरूरत पर जोर देता है, वहीं यह भी लिखता है कि ये घटनाएं अफगानिस्तान में भारत के बढ़ते दखल की साफ निशानी है. अखबार के मुताबिक भारत ने अफगानिस्तान की सरजमीन पर साजिशों का जो जाल बुना है, उसके तहत वह आतंकवादियों को ट्रेनिंग और हथियार दे कर पाकिस्तान में भेजता है.

उधर ‘जसारत’ के संपादकीय की पहली ही लाइन है कि अफगानिस्तान पूरी तरह से भारत के हाथों में खेल रहा है.

अखबार लिखता है कि एक हिंदू मुल्क भारत कश्मीर में मुसलमानों पर जो जुल्म ढा रहा है, एक मुसलमान मुल्क होने के नाते अफगानिस्तान को उसका सख्त विरोध करना चाहिए था लेकिन काबुल की सरकार तो उल्टा मुसलमानों के कातिलों के ही हाथ मजबूत कर रही है और भी सिर्फ इस उम्मीद कि कुछ माल मिलेगा.

अखबार के मुताबिक पाकिस्तान में जितने भी आतंकवादी हमले हुए हैं, उन सभी के तार अफगानिस्तान से मिलते हैं. अखबार ने तहरीके तालिबान पाकिस्तान के पूर्व अहसानुल्लाह अहसान के हालिया बयानों का जिक्र भी किया है जिनके मुताबिक पाकिस्तान में हिंसा फैलाने वाले गुटों को भारत और खुफिया एजेंसी रॉ की तरफ से मदद मिलती है.

बिच्छू का डंक

वहीं ‘नवा ए वक्त’ लिखता है कि भारत और अफगानिस्तान जिस तरह से पाकिस्तान के सरहदी इलाकों में आम लोगों को निशाना बना रहे हैं, उससे साफ संकेत मिलता है कि काबुल की सरकार पाकिस्तान की सुऱक्षा को कमजोर करने की भारतीय साजिशों में बराबर की हिस्सेदार है.

अखबार कहता है कि पाक-अफगान सरहद डूरंड लाइन के आए दिन उल्लंघनों को देखते हुए पाकिस्तान ने पिछले साल अपनी सीमा की तरफ गेट लगाने का फैसला किया जिस पर काबुल की सरकार ने सख्त एतराज जताया और लगभग युद्ध के हालात पैदा कर लिए.

अखबार के मुताबिक पाकिस्तान ने फिर भी धैर्य से काम लिया, लेकिन अफगानिस्तान बिच्छू की तरह डंक मारने से बाज नहीं आया और पाकिस्तान में आतंकवादी भिजवाने के लिए रॉ को बदस्तूर हर तरह सहूलियत दी जा रही है. ऐसे में, अखबार सरकार पाकिस्तान सरकार और सेना को चौकस रहने की नसीहत देता है.

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