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पाकिस्तान डायरी: सियासत पाक की, फैसले सऊदी अरब में

अटकलें हैं कि फिर से एनआरओ यानी राष्ट्रीय मेलमिलाप अध्यादेश लाया सकता है ताकि अयोग्य करार दिए गए नवाज शरीफ को माफी मिल सके और वह फिर से सियासत कर सकें

Updated On: Jan 01, 2018 10:50 AM IST

Seema Tanwar

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पाकिस्तान डायरी: सियासत पाक की, फैसले सऊदी अरब में

पाकिस्तानी सियासत के बड़े फैसले पाकिस्तान में नहीं, बल्कि कहीं और होते हैं. यह बात हम नहीं बल्कि पाकिस्तानी उर्दू मीडिया कह रहा है क्योंकि आम चुनाव से पहले जहां देश में सियासी अटकलों का बाजार गर्म है, वहीं सत्ताधारी पीएमएल (एन) के बड़े नेता सऊदी अरब जा पहुंचे हैं.

पाकिस्तान में इस साल आम चुनाव होने हैं. लेकिन चुनाव से पहले ही नई सरकार को लेकर कयास लगने शुरू हो गए हैं. कहीं राष्ट्रीय एकता सरकार की बात हो रही है तो कहीं टेक्नोक्रेट हकूमत की. अटकलें यह भी हैं कि फिर से एनआरओ यानी राष्ट्रीय मेलमिलाप अध्यादेश लाया सकता है ताकि अयोग्य करार दिए गए नवाज शरीफ को माफी मिल सके और वह फिर से सियासत कर सकें. हालांकि ऐसी खबरों पर पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ के नेता इमरान खान फिर से धरनों के लिए कमर कस रहे हैं. अटकलें नवाज शरीफ के फिर से निर्वासन में चले जाने को लेकर भी लग रही हैं.

खुद करें फैसले

रोजनामा मशरिक के संपादकीय का शीर्षक है- कभी अपने फैसले खुद भी करें. अखबार कहता है कि आम चुनावों में चंद महीने बचे हैं और सत्ताधारी मुस्लिम लीग (एन) के नेता सऊदी अरब जा पहुंचे हैं जिससे एनआरओ की आहट सुनाई देती है. अखबार के मुताबिक, विपक्षी पार्टियों का ख्याल है कि पीएमएल (एन) नेतृत्व अपने खिलाफ अदालतों में चल रहे बड़े केसों से बचने के लिए एक बार फिर एनआरओ लाने की तैयारी में है. अखबार ने ऐसी कोशिशों को खतरनाक बताया है.

अखबार लिखता है कि सत्ताधारी दल के नेताओं की सऊदी अरब यात्रा का दूसरा मकसद अमेरिका से बिगड़ते रिश्ते को बेहतर करना भी हो सकता है, खासकर संभव है कि वे सऊदी अरब के जरिए कोई ऐसा संदेश देना चाहते है जिससे रिश्ते सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ें. अखबार की राय में अगर ऐसा था, तो फिर प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी को सऊदी अरब जाना चाहिए था न कि नवाज शरीफ और उनके भाई शहबाज शरीफ को.

Nawaz Sharif, incoming prime minister and leader of Pakistan Muslim League-Nawaz political party, talks with his brother Shahbaz at a function in Lahore

अखबार की टिप्पणी है कि विपक्षी पार्टियों का यह कहना बिल्कुल दुरुस्त है कि मामला अमेरिका से रिश्ते सुधारने का हो या फिर सियासी मुद्दों से निपटने का, गैरों के दरवाजे खटखटाने की बजाय पाकिस्तान को अपने फैसले खुद करने चाहिए.

उम्मत के संपादकीय की सुर्खी भी कुछ ऐसी ही है- पाकिस्तानी सियासत, सऊदी अरब में. अखबार की राय में शरीफ भाइयों की सियासत का केंद्र इन दिनों सऊदी अरब बना हुआ है. अखबार की राय में, यमन में हूथी बागियों के खिलाफ जब सऊदी अरब ने पाकिस्तान से अपने फौजी भेजने को कहा था तो पीएमएल (एन) की सरकार ने इनकार कर दिया था जिससे सऊदी अरब शाही परिवार और शरीफ भाइयों के बीच तनाव बढ़ गया था, लेकिन वक्त गुजरने के साथ यह खाई कम होती नजर आ रही है.

अखबार कहता है कि सऊदी अरब में ही शरीफ भाई तुर्की के प्रधानमंत्री से भी मुलाकात करेंगे और इस बात के लिए दबाव बनाएंगे कि उनके हक में कोई एनआरओ फॉर्मूला हो जाए. ऐसे किसी फॉर्मूले पर सख्त टिप्पणी करते हुए अखबार लिखता कि संविधान और कानून के तहत सर्वोच्च अदालतें भ्रष्टाचार के मामलों में जो सुनवाई और फैसले करती हैं, उनका सम्मान होना चाहिए और अदालतों का मजाक बनाने का सिलसिला बंद होना चाहिए.

निर्वासन में जाएंगे नवाज?

एक्सप्रेस लिखता है कि सऊदी अरब में क्या हो रहा है, इस बारे में कोई पक्की जानकारी सामने नहीं आ रही है लेकिन पाकिस्तान में विश्लेषकों और विपक्षी राजनेताओं को कई तरह की आशंकाएं हैं. अखबार के मुताबिक, पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ के चेयरमैन इमरान खान कह रहे हैं कि अगर नया एनआरओ आया तो उसके खिलाफ वह सड़कों पर उतर आएंगे. अखबार कहता है कि धार्मिक नेता ताहिर उल कादरी भी सियासी पार्टियों से संपर्क में हैं और उनके साथ पाकिस्तान पीपल्स पार्टी भी खड़ी है और इमरान खान की तहरीक ए इंसाफ भी.

Khan, cricketer-turned-politician and chairman of the Pakistan Tehreek-e-Insaf (PTI) political party addresses his supporters during a by-election campaign rally in Lahore

अखबार लिखता है कि यह भी कहा जा रहा है कि मार्च में सीनेट के चुनावों से पहले पाकिस्तान में कोई अलोकतांत्रिक तब्दीली भी आ सकती है. ऐसे में, अखबार ने सत्ता के सभी स्टेक होल्डरों को नसीहत दी है कि अपने हितों की खातिर अंधी रस्साकशी से कोई फायदा नहीं है बल्कि उन्हें पाकिस्तान पर ध्यान देना चाहिए जहां देश के भीतर बढ़ते चरमपंथ से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी बदनामी हो रही है और दुनिया को लगता है कि देश अफरातफरी की तरफ बढ़ रहा है.

उधर औसाफ ने नवाज शरीफ के फिर से निर्वासन में जाने की खबरों पर टिप्पणी की है कि उन्हें देश में रहकर ही हालात का सामना करना चाहिए. अखबार ने एक ब्रिटिश अखबार के हवाले से मिली खबर का जिक्र करते हुए लिखा है कि सऊदी अरब में होने वाले संभावित समझौते या सौदेबाजी में नवाज शरीफ को पेशकश की गई है कि अगर वे सियासत से दूर रहते हैं तो उनके खिलाफ मुकदमे और ट्रायल खत्म कर दिए जाएंगे.

अखबार कहता है कि निर्वासन में जाने से ना समस्या हल नहीं होगी और किसी भी एनआरओ को जनता स्वीकार नहीं करेगी. अखबार की टिप्पणी है कि अगर शरीफ भाई निर्दोष हैं तो उन्हें भला किस बात का डर है, क्यों वे अपने 25 साल से ज्यादा के सियासी करियर को दांव पर लगा रहे हैं?

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