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पाक डायरी: पाकिस्तान में सेना उछाल रही है ‘अच्छे दिनों' का जुमला

आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने कहा है कि पाकिस्तान मुश्किल हालात से निकल गया है और देश में अच्छे दिन आने वाले हैं

Updated On: Apr 16, 2018 12:08 PM IST

Seema Tanwar

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पाक डायरी: पाकिस्तान में सेना उछाल रही है ‘अच्छे दिनों' का जुमला

'अच्छे दिन आने वाले हैं.' बीते कुछ सालों में आपने यह जुमला न जाने कितनी बार सुना होगा. लेकिन अब पाकिस्तान में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है. बस फर्क इतना है कि वहां अच्छे दिनों का वादा कोई सियासी पार्टी नहीं बल्कि सेना कर रही है. और पाकिस्तानी उर्दू मीडिया तो सेना की हर बात का गुणगान करता है.

दूसरी तरफ, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी अखबारों में छाए हुए हैं जिनके लगातार बुरे दिन चल रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसला के मुताबिक वह आजीवन ना तो चुनाव लड़ पाएंगे और ना ही किसी सार्वजनिक पद पर रह सकते हैं. भ्रष्टाचार के आरोपों में प्रधानमंत्री का पद वह पहले ही गंवा चुके हैं, लेकिन सर्वोच्च अदालत के ताजा फैसले के बाद उनके सियासी करियर पर फुलस्टॉप लगता दिख रहा है. वहीं सीरिया में पश्चिमी देशों के हवाई हमलों के बाद फिर पाकिस्तानी उर्दू मीडिया ने मुस्लिम देशों को आड़े हाथों लिया है.

सेना का प्रोपेगैंडा

रोजनामा ‘दुनिया’ के संपादकीय का शीर्षक है – अच्छे दिनों का इंतजार. अखबार कहता है कि आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने कहा है कि पाकिस्तान मुश्किल हालात से निकल गया है और देश में अच्छे दिन आने वाले हैं. आर्मी चीफ की शान में कसीदे पढ़ते हुए अखबार ने लिखा है कि आज का पाकिस्तान दस साल पहले के पाकिस्तान से अलग है, जब आतंकवादी सरेआम दनदनाते फिरते थे और कराची से खैबर तक, पूरा देश खौफ में रहता था.

अखबार के मुताबिक स्वात जैसे पर्यटन स्थल पूरी तरह आतंकवादियों के कब्जे में थे, जिसके बाद सेना ने ऑपरेशन का फैसला लिया और अपने अफसरों और सैनिकों की कुरबानियां देकर देश में अमन बहाल किया. पाकिस्तान में कितना अमन कायम हुआ है, यह तो जगजाहिर है, लेकिन सेना का प्रोपेगैंडा कामयाबी से चल रहा है और मीडिया की इसमें बड़ी भूमिका होती है.

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वहीं ‘एक्सप्रेस’ ने सेना प्रमुख के बयान पर अपने संपादकीय को सुर्खी लगाई है- देश की संप्रभुता के दुश्मनों से खबरदार रहने की जरूरत है. ये हेडलाइन बिल्कुल पाकिस्तानी सेना के प्रोपेगैंडा के मुताबिक है, जो अपनी सर्वोच्चता को कायम रखने के लिए हमेशा हौव्वा बनाए रखती है कि देश की संप्रभुता को खतरा है. अखबार आर्मी चीफ के हवाले से लिखता है कि जब तक पूरा देश पाकिस्तानी सेना के पीछे खड़ा है, तब तक दुश्मन अपने मकसद में कामयाब नहीं होंगे. इस बयान से आर्मी चीफ ने एक तरफ जनता को देशभक्ति की घुट्टी पिलाने की कोशिश की है तो दूसरी तरफ यह संकेत भी दिया है कि सरकार और राजनेताओं की उन्हें ज्यादा परवाह नहीं है.

qamar javed bajwa

जियो टीवी से साभार

नवाज शरीफ को नसीहत

दूसरी तरफ, ‘नवा ए वक्त’ ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने पनामा लीक्स के फैसले के तहत नवाज शरीफ को संसद की सदस्यता या पार्टी का कोई भी पद ग्रहण करने के लिए जीवन भर अयोग्य करार दिया है. अखबार कहता है कि नवाज शरीफ, उनकी बेटी मरियम नवाज और सत्ताधारी पीएमएल (एन) के पदाधिकारी आजीवन अयोग्य करार दिए जाने के फैसले को बदले की कार्रवाई मान रहे हैं और नवाज शरीफ ने इसका मुकाबला करने का एलान किया है.

लेकिन अखबार नवाज शरीफ को सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानकर कुछ समय के लिए राजनीतिक परिदृश्य से अलग होने की नसीहत देता है क्योंकि इससे न सिर्फ आम चुनाव समय पर हो पाएंगे बल्कि इससे यह धारणा भी दूर होगी कि नवाज शरीफ की पार्टी व्यवस्था से टकरा रही है. अखबार के मुताबिक पार्टी सुप्रीम कोर्ट का फैसला मान लेती है तो उसे चुनावों में इसका फायदा ही होगा क्योंकि नवाज शरीफ के लिए सहानुभूति का वोट उनके चुनाव प्रचार में उतरे बिना भी पार्टी की झोली में आ जाएगा.

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वहीं रोजनामा ‘जंग’ ने लिखा है कि नवाज शरीफ को आजीवन अयोग्य करार देने का फैसला ना तो राजनीतिक पर्यवेक्षकों के लिए अप्रत्याशित है और ना ही खुद पीएमएल (एन) पार्टी के लिए. लेकिन अखबार लिखता है कि दुनिया और खुद पाकिस्तान का इतिहास गवाह है कि राजनीतिक नेतृत्वों का असर और रसूख प्रशासनिक और अदालती फैसलों से खत्म नहीं होता, लेकिन यह भी सही है कि देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के प्रमुख अब नवाज शरीफ नहीं होंगे बल्कि यह जिम्मेदारी नवाज शरीफ के भाई शाहबाज शरीफ को निभानी होगी. इसके साथ ही अखबार ने इस मामले पर विपक्षी नेता इमरान खान की टिप्पणी को भी जगह दी है जिनके मुताबिक नया पाकिस्तान वजूद में आ रहा है.

Pakistan's former PM Nawaz Sharif speaks during a news conference in Islamabad

सीरिया बना अखाड़ा

उधर ‘औसाफ’ ने सीरिया में अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के हालिया हवाई हमलों को बदतरीन दहशतगर्दी का नमूना बताते हुए इससे विश्व शांति को खतरा बताया है. अखबार के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि इन हमलों का मकसद रासायनिक हथियारों की तैयारी, उनके फैलाव और इस्तेमाल को सख्ती से रोकना है लेकिन सच तो यह है कि सीरिया इस समय अंतरराष्ट्रीय दखलंदाजी का गढ़ बन गया है, जहां खून पानी से ज्यादा सस्ता है और मुसलमानों का खून बेदर्दी से बहाया जा रहा है. अखबार ने इस सिलसिले में उन इस्लामी देशों को खरी खोटी सुनाई है जो पश्चिमी देशों की कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं.

रोजनामा ‘इंसाफ’ लिखता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने सीरिया पर मिसाइल हमलों की धमकी देते हुए अजीब बयान दिया कि - रूस को ऐसे लोगों का साथ नहीं देना चाहिए जो जानवरों की तरह अपने लोगों को कत्ल कर रहे हैं. अखबार के मुताबिक इसका मतलब यह हुआ कि अपने लोगों को कत्ल करने वाले तो जानवर हैं इसलिए दूसरे लोगों को कत्ल किया जाए, जैसा कि अमेरिका ने अफगानिस्तान, इराक और लीबिया जैसे देशों में किया और अब सीरिया कत्लखाना बना हुआ है. अखबार के मुताबिक सवाल बड़ा पुराना है लेकिन उसका जवाब अब तक नहीं मिला है और सवाल यह है कि आखिर मुस्लिम देश क्या कर रहे हैं?

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