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बेरोजगारों की फौज पाक की इज्जत पर बट्टा, शर्मिंदा है पाक मीडिया

पाक मीडिया पाकिस्तानी सरकार से देश में मानव तस्करी के बढ़ते नेटवर्क को काबू करने के लिए कह रही है क्योंकि इससे देश की इज्जत में बट्टा लगता है

Seema Tanwar Updated On: Feb 05, 2018 09:42 AM IST

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बेरोजगारों की फौज पाक की इज्जत पर बट्टा, शर्मिंदा है पाक मीडिया

लीबिया के तट के करीब हुआ नौका हादसा आजकल पाकिस्तानी उर्दू मीडिया की बड़ी खबर है. भूमध्य सागर में डूबी इस नौका पर सवार 90 लोगों में ज्यादातर पाकिस्तानी थे. एक तरफ पाकिस्तानी अखबार सरकार से देश में मानव तस्करी के बढ़ते नेटवर्क को काबू करने के लिए कह रहे हैं तो दूसरी तरफ, उनका कहना है कि विदेशों में गैर कानूनी तरीके से जाने वाली पाकिस्तानियों की वजह देश की इज्जत को बट्टा लग रहा है.

इसके अलावा, पाकिस्तान को आतंकवाद का केंद्र बताने वाला अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी का बयान भी पाकिस्तानी उर्दू मीडिया को चुभ रहा है.

जान हथेली पर

‘जंग’ लिखता है कि दुनिया का ऐसा कोई हिस्सा नहीं जहां स्मगलिंग के जरिए पाकिस्तानियों को भेजने की कोशिश ना हुई हो. अखबार के मुताबिक इस वक्त यूरोप, एशिया, अफ्रीका और लातिन अमेरिकी देशों की जेलों में लाखों गैर कानूनी प्रवासी बंद हैं जिनमें पाकिस्तानी भी शामिल है.

अखबार कहता है कि ईरान, सऊदी अरब और तुर्की से हर साल हजारों की संख्या में पाकिस्तानियों को वहां गैर कानूनी तरीके से दाखिल होने की वजह से वापस भेजा जाता है, जिससे पाकिस्तानी की छवि को धक्का लगता है. अखबार की नसीहत है कि सरकार को इस बारे में संजीदगी से सोचना चाहिए, ताकि इंसानों की तस्करी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सके.

‘औसाफ’ लिखता है कि पाकिस्तान की बदकिस्मती है कि देश में तमाम तरह के संसाधन होने के बावजूद यह सरकार की प्राथमिकता में ही शामिल नहीं है कि वह देश के नौजवानों को बाइज्जत तरीके से रोजगार देकर उन्हें देश की तरक्की और खुशहाली के लिए इस्तेमाल करे. अखबार लिखता है कि गैर कानूनी तरीके से विदेश जाने वाले नौजवानों को कंटेनरों में भेड़ बकरियों की तरह ठूंसा जाता है, भूखा प्यासा रखा जाता है और उन्हें सरहदें पार कराई जाती हैं. अखबार कहता है कि इससे पहले भी यूरोप में गैर कानूनी तरीके से जाने की कोशिश करने वाले पाकिस्तानी प्रवासियों से भी नौकाएं डूब चुकी हैं.

अखबार लिखता है कि एक अनुमान के मुताबिक बीते चार बरसों में छह लाख से ज्यादा गैर कानूनी प्रवासी लीबिया से नौकाओं में सवार होकर इटली पहुंचे हैं और इस खतरनाक सफर के दौरान भूमध्य सागर की लहरों का शिकार बनने वाले लोगों की संख्या हजारों में है.

उधर ‘वक्त’ ने लिखा है कि बढ़ती बेरोजगारी के तूफान ने पाकिस्तानी युवाओं को मायूसियों में धकेल दिया है जिसके कारण वे कानूनी या गैर कानूनी, जैसे भी हो, बस विदेशों में जाना चाहते हैं. अखबार के मुताबिक छिप छिपा कर विदेशों में पहुंचने वाले पाकिस्तानियों को बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और सबसे बड़ी आफत तब आती है जब यात्रा का कोई दस्तावेज पास न होने की वजह इसका अपने देश आना भी मुश्किल होता है.

रिश्तों की गांठ

दूसरी तरफ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते भी पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं. ‘एक्सप्रेस’ लिखता है कि अफगान राष्ट्रपति ने टीवी पर राष्ट्र के नाम संदेश में पाकिस्तान को तालिबान और आतंकवाद का केंद्र बताया है और पड़ोसी देश से आतंकवादियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने को कहा है.

modi ashraf ganio

अखबार की राय है कि कम से कम अफगान राष्ट्रपति को इस तरह के इल्जाम लगाने से बचना चाहिए, वरना इसे खराब कूटनीति की इंतिहा और पाक-अफगान शांति प्रक्रिया को नष्ट करने की सोची समझी कोशिश माना जाएगा. भारत और अमेरिका की तरफ इशारा करते हुए अखबार लिखता है कि अफगानिस्तान उन ताकतों के हाथों में खेल रहा है जिन्हें क्षेत्र के अमन से कोई सरोकार नहीं है.

इस बारे में ‘नवा ए वक्त’ कहता है कि अफगानिस्तान और अमेरिका ने अफगान धरती पर आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय पाकिस्तान पर आरोप लगाने का आसान रास्ता तलाश लिया है. अखबार ने पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के इस बयान का भी जिक्र किया है कि अमेरिका अफगानिस्तान में अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए पाकिस्तान को बलि का बकरा बना रहा है.

अखबार की राय में, अफगानिस्तान के साथ सीमा प्रबंधन के लिए बॉर्डर कंट्रोल दोनों देशों के हित में है लेकिन अफगान हुकमरानों को मोदी सरकार ने ऐसी पट्टी पढ़ाई है कि वे ऐसे मुद्दे पर भी सहयोग करने को तैयार नहीं हैं जिससे आतंकवादियों की आवाजाही को पूरी तरह रोका जा सकता है.

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