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भारतीय श्रद्धालुओं को खालिस्तान मुद्दे पर उकसाने के आरोपों से पाक का इनकार

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने मामले पर सफाई देते हुए कहा, ‘भारत ने भ्रम फैलाकर सिख तीर्थयात्रियों की यात्रा को लेकर जानबूझकर विवाद पैदा किया है’

FP Staff Updated On: Apr 17, 2018 10:55 PM IST

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भारतीय श्रद्धालुओं को खालिस्तान मुद्दे पर उकसाने के आरोपों से पाक का इनकार

पाकिस्तान ने भारत के उन आरोपों को खारिज कर दिया कि उसने ‘खालिस्तान ’ के मुद्दे पर ‘भारतीय श्रद्धालुओं को भड़काने की कोशिश की.’

भारत ने सोमवार को दिल्ली में पाकिस्तान के उप-उच्चायुक्त को सम्मन किया था और पाकिस्तान की यात्रा के दौरान सिख तीर्थयात्रियों को खालिस्तान के मुद्दे पर भड़काने की कोशिशों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था. भारत ने इस्लामाबाद से देश की संप्रभुत्ता और क्षेत्रीय अखंडता को कम करने के मकसद वाली ऐसी सभी गतिविधियों को तुरंत बंद करने को कहा.

भारत के कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा, ‘ऐसा भ्रम फैलाकर भारत ने सिख तीर्थयात्रियों की यात्रा को लेकर जानबूझकर विवाद पैदा किया है. सिख तीर्थयात्री बैसाखी और खालसा जन्मदिन समारोह में शामिल होने के लिए पाकिस्तान आए हुए हैं.’

पाकिस्तान ने कहा कि वो भारत समेत दुनियाभर के हिंदू और सिख तीर्थयात्रियों का स्वागत करता है. विदेश कार्यालय ने कहा कि पाकिस्तान ने देश में पवित्र स्थलों की यात्रा के दौरान सिख तीर्थयात्रियों को अधिकतम सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बंदोबस्त किए.

उसने कहा कि सिख समुदाय भारत में एक विवादित फिल्म प्रदर्शित करने के लिए भारत सरकार के खिलाफ विरोध कर रहा है. यह फिल्म उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत करती है.

'सिख यात्रियों के पहुंचने से पहले ही भारत और दुनिया में प्रदर्शन शुरू हो गए थे'

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा, ‘पाकिस्तान में सिख यात्रियों के पहुंचने से पहले ही भारत और दुनिया के दूसरे हिस्सों में ये प्रदर्शन शुरू हो गए थे.’

उसने बताया कि तनावपूर्ण स्थिति और सिख यात्रियों को भारतीय अधिकारियों से मिलने की अनुमति देने से स्पष्ट इनकार करने के मद्देनजर भारतीय उच्चायुक्त ने 14 अप्रैल, 2018 को अपनी यात्रा रद्द कर दी.

उसने कहा, ‘सच को तोड़ने-मरोड़ने और तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने की भारत की कोशिशें अनैतिक और खेदजनक हैं. भारत का कोई भी हथकंडा गलत को सही में नहीं बदल पाएगा.’

विदेश कार्यालय ने कहा कि भारत को सभी धर्मों खास तौर से अल्पसंख्यकों के संबंध में अंतरराष्ट्रीय और अंतरदेशीय नियमों का सम्मान करना चाहिए और बेतुके उकसावे के ऐसे कदम से दूर रहना चाहिए जिससे पहले से ही तनावपूर्ण स्थिति और बिगडे़.

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