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पाक राजनयिक ने कहा पाकिस्तान नहीं है आतंकियों का पनाहगाह, लोगों ने उड़ाई हंसी

पाकिस्तानी राजनयिक एजाज अहमद चौधरी के दावों को सुनकर सभी लोग हंसने लगे

Updated On: Jun 08, 2017 09:21 PM IST

Bhasha

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पाक राजनयिक ने कहा पाकिस्तान नहीं है आतंकियों का पनाहगाह, लोगों ने उड़ाई हंसी

आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को अमेरिका के वाशिंगटन में हंसी का पात्र बनना पड़ा. अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत एजाज अहमद चौधरी गुरुवार को बार-बार इस बात पर जोर दे रहे थे कि पाकिस्तान में आतंकवादियों के लिए कोई सुरक्षित पनाहगाह नहीं है और कथित तौर पर कराची के अस्पताल में मरने वाला तालिबानी नेता कभी अफगानिस्तान से बाहर ही नहीं गया.

इसपर वहां मौजूद लोगों के मजाक समझकर इस पर हंसने पर एजाज अहमद चौधरी के चेहरे पर चिड़चिड़ाहट साफ देखी जा सकती थी. उन्होंने कहा, ‘इसमें हंसने वाली क्या बात है?’

पाकिस्तान में कोई आतंकी पनाहगाह नहीं होने और मुल्ला उमर द्वारा कभी भी अफगानिस्तान से पाकिस्तान न जाने का दावा करने वाले एजाज की बातों को सुनकर वाशिंगटन थिंकटैंक के लोग हंसने लगे थे.

अफगानिस्तान, इराक और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत के रूप में काम कर चुके पूर्व अमेरिकी राजनयिक जाल्मे खलीलजाद ने कहा कि हकीकत इससे अलग है.

अकेले पड़े पाक राजनयिक 

साउथ एशिया सेंटर में यह चर्चा अटलांटिक काउंसिल के हो रही थी. उन्होंने कहा, ‘हमारे पास पाकिस्तान में उसकी (मुल्ला उमर) मौजूदगी के पक्के सबूत हैं. हमारे पास सबूत हैं कि वहां कहां-कहां रहा, कहां गया... अस्पताल आदि.’ उन्होंने कहा कि लंबे समय तक यह भी कहा जा रहा था कि बिन लादेन कभी अफगानिस्तान से बाहर नहीं गया.

उन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिकी रणनीति पर क्षेत्रीय दृष्टिकोणों के मुद्दे पर चर्चा के दौरान कहा, ‘इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि जब हक्कानी नेटवर्क पर ऑपरेशन चल रहा था, तब उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा रहा था.’

चर्चा के दौरान एजाज अकेले पड़ते दिखे क्योंकि पैनल के दो अन्य सदस्य- भारत के पूर्व मंत्री मनीष तिवारी और शीर्ष अमेरिकी थिंकटैंक विशेषज्ञ एश्ले टेलिस भी खलीलजाद की बात से सहमत दिखे कि पाकिस्तान आज भी आतंकवाद की पनाहगाह है. साथ ही पाकिस्तान की सत्ता प्रतिष्ठान से उन्हें बराबर सहयोग मिलता है.

ऐजाज और खलीलजाद के बीच हुई तीखी बहस के गवाह बने लोग चर्चा के दौरान हंसने लगे. इसपर चिढ़ते हुए एजाज ने लोगों से पूछा, ‘आप कौन सी पनाहगाहों की बात कर रहे हैं? यदि आप अतीत में जीना चाहते हैं तो वर्तमान को सुलझा नहीं सकते. हक्कानी और तालिबान हमारे दोस्त नहीं हैं. वे हमारे मुखौटा संगठन नहीं हैं. आप किस क्वेटा शूरा की बात कर रहे हैं? कौन सी पेशावर शूरा?’

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