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पाक डायरी: पूर्व ISI चीफ असद दुर्रानी की किताब पर क्यों मचा है बवाल

पाकिस्तानी सेना ने विवादित किताब पर सफाई देने के लिए दुर्रानी को अपने मुख्यालय में तलब किया है. एक तरफ पाकिस्तानी अखबार इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा करार दे रहे हैं

Seema Tanwar Updated On: May 29, 2018 09:46 AM IST

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पाक डायरी: पूर्व ISI चीफ असद दुर्रानी की किताब पर क्यों मचा है बवाल

पाकिस्तान में आजकल आईएसआई के पूर्व चीफ असद दुर्रानी की उस किताब को लेकर हंगामा मचा है, जो उन्होंने भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व प्रमुख एएस दुलत के साथ मिल कर लिखी है. दिन रात भारत के खिलाफ लिखने वाले पाकिस्तानी उर्दू मीडिया ने तो आसमान सिर पर उठा रखा है. कहीं दुर्रानी को देशद्रोही करार दिया जा रहा है तो कोई लिख रह है कि भारत को फायदा पहुंचाने के लिए यह किताब लिखी गई है.

पाकिस्तानी सेना ने विवादित किताब पर सफाई देने के लिए दुर्रानी को अपने मुख्यालय में तलब किया है. एक तरफ पाकिस्तानी अखबार इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा करार दे रहे हैं तो दूसरी तरफ इस मुद्दे पर सेना और राजनेताओं के बीच नई तकरार की आशंकाएं जताई जा रही हैं. कुल मिलाकर यही लगता है कि मीडिया हो या राजनेता या फिर पाकिस्तानी सेना, सभी को यही डर सता रहा है कि कहीं पाकिस्तान की पोल न खुल जाए.

एक किताब को लेकर विवाद में कूदे सभी पाकिस्तानी अखबार

रोजनामा ‘जंग’ लिखता है कि किताब में करगिल ऑपरेशन, एबटाबाद में अमेरिकी नेवी सील के ओसामा बिन लादेन ऑपरेशन, कुलभूषण जाधव की गिरफ्तारी, हाफिज सईद, कश्मीर, बुरहान वानी और कई संवेदनशील मुद्दों को शामिल किया गया है. अखबार कहता है कि असद दुर्रानी ने कई ऐसे रहस्योद्घाटन किए हैं, जो पाकिस्तान के रुख के मुताबिक नहीं हैं और इसीलिए इस किताब पर इतना विवाद हो रहा है.

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पूर्व पाकिस्तानी ISI चीफ असद दुर्रानी

भारत और पाकिस्तान के बीच खराब संबंधों के बीच अखबार लिखता है कि इन सवालों के जवाब जरूर तलाशने जाने चाहिए कि आईएसआई के पूर्व चीफ ने यह किताब क्यों लिखी? अपने रहस्योद्घाटनों से वह किसे फायदा पहुंचाना चाहते हैं? क्या इस किताब को लिखने के लिए उन्होंने सरकार या फिर सेना से इजाजत ली थी? और अगर इजाजत दी गई तो क्यों दी गई?

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अखबार की राय है कि दो पूर्व खुफिया एजेंसी प्रमुखों के एक साथ किताब लिखने से भारत और पाकिस्तान की समस्याएं हल नहीं होंगी, दोनों देश अपनी नीति को नहीं बदलेंगे, बल्कि आशंका इस बात की है कि वे ऐसे कुछ कर देंगे जिससे नए विवाद पैदा हो सकते हैं.

रोजनामा ‘नवा ए वक्त’ लिखता है कि पहले पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने मुंबई हमलों में पाकिस्तान के नॉन स्टेट एक्टर की भूमिका होने की बात कही और अब पूर्व आईएसआई चीफ की रॉ के पूर्व चीफ के साथ मिलकर लिखी गई ये किताब आई है. अखबार की राय में यह किताब पाकिस्तान के खिलाफ भारत के रुख को सही साबित करने की कोशिश नजर आती है और इससे बड़ा कोई जुर्म नहीं हो सकता.

अखबार को दुनिया के सामने पाकिस्तान की पोल खुल जाने की चिंता सता रही है, इसीलिए वह लिखता है कि एक तयशुदा योजना के तहत पाकिस्तानी सेना के ऐसे मामलों को दुनिया के सामने लाने की कोशिश हो रही है, जिससे उसकी छवि और क्षमता प्रभावित हो सके.

अखबार दिखा रहे हैं 'अखंड भारत' का डर

उम्मत’ अखबार ने यह किताब लिखने के लिए असद दुर्रानी को पाकिस्तान का दुश्मन करार दे लिया है. अखबार लिखता है कि दुर्रानी साहब भारत के विभाजन को गलत करार दे कर सौ साल के भीतर दोबारा अखंड भारत के तहत संयुक्त हिंदुस्तान की भविष्यवाणी कर रहे हैं. अखबार की टिप्पणी है कि देश का कोई भी दुश्मन, भले ही वह फौजी हो या आम नागरिक, ऐसी बातें करने पर उसके खिलाफ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए और उसके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाकर उसने सजा दी जानी चाहिए.

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अखबार ने किताब पर सफाई देने के लिए दुर्रानी को पाकिस्तानी सेना मुख्यालय में तलब किए जाने के फैसले को सही बताया है. अखबार कहता है कि सेना ने साफ संदेश दिया है कि उसका कोई पूर्व अफसर भी अगर देशहित के खिलाफ काम करेगा तो उसके विरुद्ध भी एक्शन लिया जाएगा. अखबार कहता है कि इससे राजनेताओं की यह गलतफहमी भी दूर होगी कि देशहित के खिलाफ कदम उठाने वाले फौजियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती जबकि राजनेताओं को अदालत के चक्कर काटने पड़ते हैं.

Nawaz Sharif And Pervez Musharraf

रोजनामा ‘मशरिक’ ने अपने संपादकीय पन्ने पर इस मुद्दे को लेकर एक कार्टून छाप कर तंज किया है. कार्टून में असद दुर्रानी को एक किताब के साथ दिखाया गया है जिस पर लिखा है- मेरी और रॉ की प्रेम कहानी.

क्या रॉ की खुफिया जानकारी पर बची थी मुशर्रफ की जान

रोजनामा ‘पाकिस्तान’ के मुताबिक किताब में लिखा गया है कि रॉ की तरफ से दी गई कई जानकारियों का पाकिस्तान ने फायदा भी उठाया है. अखबार के मुताबिक किताब में दुलत ने रहस्योद्घाटन किया है कि रॉ ने एक बार जनरल परवेज मुशर्रफ को जानकारी दी थी कि जैश ए मोहम्मद उन पर जानलेवा हमला करने वाला है, जिसे पाकिस्तानी अधिकारियों ने नाकाम बनाया और बाद में हमलावर को फांसी दी गई थी.

अखबार लिखता है कि पता नहीं ये दावा कितना सच है लेकिन खुद परवेज मुशर्रफ यह बता सकते हैं कि उनकी जान बचाने में “दुश्मन देश” की एजेंसी ने कितनी मदद की थी. अखबार कहता है कि किताब में और भी कई ऐसी बातें हैं जिन पर मुशर्रफ अगर रोशनी डालें तो पाकिस्तान की जनता शुक्रगुजार होगी.

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