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मिटने-मिटाने को तैयार है उत्तर कोरिया, अमेरिका सोचे अब क्या न किया जाए

उत्तर कोरिया ने एक बार फिर कोरियाई प्रायद्वीप पर युद्ध की आशंका के बादलों को घना कर दिया है

Updated On: Sep 15, 2017 09:55 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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मिटने-मिटाने को तैयार है उत्तर कोरिया, अमेरिका सोचे अब क्या न किया जाए

उत्तर कोरिया ने 18 दिनों के भीतर ही दूसरी मिसाइल जापान के सिर के ऊपर से दाग दी. हाइड्रोजन बम का सबसे बड़ा धमाका करने के बाद लगा था कि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध उत्तर कोरिया को हमेशा के लिए खामोश कर देंगे. लेकिन उत्तर कोरिया ने एक बार फिर कोरियाई प्रायद्वीप पर युद्ध की आशंका के बादलों को घना कर दिया है.

अमेरिकी धमकी और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध भी उत्तर कोरिया के तानाशाह के हौसलों को पस्त नहीं कर पा रहे हैं. पहले इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल जापान के सिर के ऊपर से दागी तो अब दूसरी मिसाइल दाग कर उत्तर कोरिया ने अपने इरादे साफ कर दिए.

इसके पीछे सीधे तौर पर उत्तर कोरिया की परमाणु ब्लैकमेलिंग सामने आ रही है. पहली बार अमेरिका एक छोटे से देश के सामने बेबस नजर आ रहा है. उत्तर कोरिया की आईसीबीएम मिसाइलों ने अमेरिका के हाथ बांध दिए हैं.

north kkrea

हालांकि गुआम द्वीप पर तानाशाह किम जोंग की मिसाइल गिराने की धमकी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका इतनी आग बरसाएगा कि दुनिया देखेगी. लेकिन उत्तर कोरिया पर अब अमेरिका की किसी भी धमकी का असर नहीं दिख रहा है.

उत्तर कोरिया के पास 'ब्रह्मास्त्र'

ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आखिर उत्तर कोरिया चाहता क्या है? जाहिर तौर पर उत्तर कोरिया की हिमाकत के पीछे रूस और चीन की शह है लेकिन ये दोनों देश भी नहीं चाहेंगे कि दुनिया किसी ग्लोबल वॉर में उलझे.

इसके बावजूद उत्तर कोरिया लगातार अमेरिका और जापान को उकसाने में लगा हुआ है. उसने दो दिन पहले ही जापान के चारों द्वीपों को परमाणु बम से समुद्र में डुबा देने की धमकी दी थी.

अब तक पांच परमाणु परीक्षण कर चुका ये देश ताल ठोक कर कभी भी परमाणु परीक्षण की धमकी देता है. एक साथ तीन देशों को उत्तर कोरिया धमका रहा है. एक तरफ वो सियोल को उड़ा देने की बात करता है तो दूसरी तरफ जापान पर परमाणु हमला करने की भी चेतावनी देता है.

उसने अमेरिका के युद्धपोत पर हमले से लेकर लॉस एंजिल्स और मैनहटन को राख का ढेर बना देने की धमकी भी दी थी. वहीं संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को लेकर उत्तर कोरिया की हालिया धमकी है कि अमेरिका ऐसे दर्द और तकलीफ से गुजरेगा जो इतिहास में कभी नहीं हुआ होगा.

Donald Trump

कुछ अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ भी ये मानते हैं कि अगर उत्तर कोरिया के पास आईसीबीएम तकनीक आ गई तो अमेरिका के शहर उत्तर कोरिया के निशाने पर सबसे पहले होंगे. उत्तर कोरिया भी ये कह चुका है कि उकसाने पर वो बिना बताए ही अमेरिका पर परमाणु हमला कर देगा. उत्तरी कोरिया के तेवरों को देखते हुए अब उसकी सैन्य क्षमता पर संदेह नहीं किया जा सकता है.

चीन और रूस के दम पर हेकड़ी

भले ही अमेरिका अब भी उत्तर कोरिया की मिसाइलों के लिए दूर की कौड़ी हो लेकिन उसके सहयोगी देश दक्षिण कोरिया और जापान तो जद में ही हैं. वहीं गुआम द्वीप पर अमेरिकी सैन्य ठिकाना भी तानाशाह किम जोंग की मिसाइलों की रेंज में है.

अमेरिका इन तमाम वजहों से उत्तरी कोरिया पर सैन्य कार्रवाई करने से बच रहा है क्योंकि वो जानता है कि उत्तर कोरिया और इराक, लीबिया, अफगानिस्तान और सीरिया में बहुत फर्क है. उत्तर कोरिया जहां हथियारों की तकनीक में बहुत उन्नत है तो वहीं उसके साथ चीन और रूस जैसे देश साथ खड़े हैं. चीन जहां अमेरिका से संयम बरतने के लिए कह रहा है तो वहीं रूस भी उत्तरी कोरिया को एकदम अलग थलग करने के खिलाफ है हालांकि संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंधों को चीन ने भी सहमति दी.

लेकिन चीन जानता है कि उत्तर कोरिया अब बहुत आगे निकल चुका है और यूएन के प्रतिबंधों से वो अमेरिका के हाथ नहीं आने वाला है. उत्तर कोरिया ने यूएन के बैन को उकसावे वाले कार्रवाई बताई है. जापान पर दूसरी मिसाइल दागना उत्तरी कोरिया का अमेरिका समेत दूसरे देशों को जवाब है. जापान और दक्षिण कोरिया कभी नहीं चाहेंगे कि अमेरिका किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई उत्तरी कोरिया पर करे क्योंकि इसमें सीधा नुकसान इन दोनों ही देशों का है.

दुनिया के किसी भी हिस्से में मिसाइल गिराने की ताकत और तकनीक रखने वाले अमेरिका के लिये नॉर्थ कोरिया अब बड़ा सिरदर्द बन चुका है. उसकी मिसाइलों की रेंज और परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता की वजह से ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्थ कोरिया को अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था

कोरियाई प्रायद्वीप दो स्थितियों से गुजर रहा है. एक तरफ उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण और मिसाइलें दाग कर अमेरिका को आंखें दिखा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ जापान और दक्षिण कोरिया एक सनकी तानाशाह की उकसावे वाली कार्रवाई का बिना जंग का समाधान ढूंढने में लगे हैं. सच्चाई तो ये है कि उत्तर कोरिया को खतरनाक देश बनाने वाला चीन भी प्रायद्वीप में जंग नहीं चाहता है.

जंग छिड़ने की स्थिति में चीन की उत्तर कोरिया के साथ संधियों में बंधे होने की वजह से साथ देने की मजबूरी होगी. इससे पहले भी साल 1950 में उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच छिड़े युद्ध में अमेरिका के उतरने से चीन और रूस ने उत्तर कोरिया का साथ दिया था.

कुछ भी कर गुजरने को तैयार उत्तर कोरिया

लेकिन इस बार उत्तर कोरिया का बड़ा दुश्मन दक्षिण कोरिया नहीं बल्कि सुपरपॉवर अमेरिका बन चुका है. अमेरिका की सैन्य ताकत और हमला करने की फितरत के डर ने ही उत्तर कोरिया को परमाणु हथियारों से संपन्न बना दिया है. उत्तर कोरिया अब उन्हीं हथियारों के बूते अमेरिकी शहरों को परमाणु बम से उड़ा देने की धमकी दे रहा है.

उत्तर कोरिया ने इराक और अमेरिका के युद्ध से बहुत कुछ सीखा है. वो जानता है कि किस तरह जनसंहारक हथियारों के नाम पर एक देश तबाह कर दिया गया. वो ये जानता है कि ईरान को इजराइल के होते हुए कभी भी परमाणु बम बनाने का मौका नहीं मिलेगा.

वो ये जानता है कि सीरिया लाख कोशिश कर ले लेकिन वो अमेरिका पर कभी पलटवार नहीं कर सकेगा. ऐसे में जहां अमेरिका उन तमाम देशों में युद्ध में उलझा रहा वहीं उत्तरी कोरिया तेज गति से परमाणु हथियार की तकनीक हासिल करने और आधुनिक हथियार बनाने में जुटा रहा.

अब उत्तर कोरिया के पास ब्रह्मास्त्र आ चुका है लेकिन दिक्कत उसके तानाशाह किम जोंग को लेकर है जिसकी धमकियां देखकर लगता है कि वो मानो अब मिटने-मिटाने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो चुका है.

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