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क्या अमेरिका-उत्तर कोरिया करेंगे दुनिया का ‘द एंड’? कोरियाई प्रायद्वीप पर बढ़ा परमाणु युद्ध का खतरा

जापान के पास परमाणु बम होता तो क्या अमेरिका हिरोशिमा-नगासाकी पर बम गिरा पाता?

Updated On: Sep 18, 2017 07:57 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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क्या अमेरिका-उत्तर कोरिया करेंगे दुनिया का ‘द एंड’? कोरियाई प्रायद्वीप पर बढ़ा परमाणु युद्ध का खतरा

महज चंद परमाणु धमाकों से जब दुनिया ही नहीं बचेगी तो फिर वर्ल्ड वॉर किन देशों के बीच होगा? ये सवाल उन लोगों से है जो कोरियाई प्रायद्वीप पर बढ़ते तनाव को वर्ल्ड वॉर से जोड़ कर देख रहे हैं. अब जो बातें धमकियों की शक्ल में सामने आ रही हैं उन्हें देखकर लग रहा है कि अमेरिका और उत्तर कोरिया परमाणु हमले को ही पहला और आखिरी विकल्प मान रहे हैं. कोरियाई प्रायद्वीप में सुलगती जंग की भट्टी में जो पहला हमला करेगा वो ही गेमचेंजर होगा.

जापान के ऊपर से दूसरी मिसाइल दागने के बाद अब जंग की तलवारें म्यान से बाहर आ चुकी हैं. ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने अल्टीमेटम दे दिया है कि अगर उत्तर कोरिया ने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल के मिशन को खत्म नहीं किया तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा. अमेरिका ने उत्तर कोरिया को विनाशकारी परमाणु हमला झेलने की धमकी दी है. अमेरिकी उप राष्ट्रपति माइक पेंस जहां अमेरिकी सेना को तैयार रहने के लिये बोल चुके हैं तो वहीं उत्तर कोरिया को परमाणु हमला झेलने के लिये आगाह भी कर रहे हैं.

क्या माना जाए कि उत्तर कोरिया पर अमेरिका की ये स्ट्राइक हिरोशिमा और नागासाकी से भी भयावह होगी?

क्या अमेरिका के परमाणु हमले के मंसूबे को चीन और रूस जैसे देश पूरा होने देंगे?

क्या अमेरिकी हमले की सूरत में अबतक न झुकने वाला उत्तर कोरिया पलटवार में अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया पर परमाणु बम नहीं दागेगा?

हर एक्शन का रिएक्शन होता ही है. अमेरिकी हमलों का इतिहास देखते हुए ही उत्तर कोरिया ने साल 1950 की जंग से सबक लेते हुए खुद को परमाणु संपन्न बनाया है. उत्तर कोरिया ये जानता है कि लोहा ही लोहे को काटता है. उसे पहले से ही अंदेशा था कि ‘एक्सिस ऑफ इविल’ देशों में अमेरिका ने उसका नाम डालकर भविष्य की युद्धनीति का खुलासा कर दिया और एक दिन उस पर भी सीरिया और इराक की तरह हमला किया जाएगा.

Donald Trump

उत्तर कोरिया ने अमेरिकी हमले की आशंका की चलते परमाणु हथियार बनाने को ही अपने जिंदा रहने की एकमात्र शर्त माना और परमाणु तकनीक हासिल करने की हर कीमत अदा की.

किम जोंग ने हाल ही में सबसे लंबी दूरी तय करने वाली मिसाइल के कामयाब परीक्षण के बाद कहा भी कि ‘दुनिया देख ले कि किस तरह तमाम प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया ने अमेरिकी फोर्स जितनी ताकत हासिल की ताकि अमेरिका हम पर हमले की गलती न कर सके’.

उत्तर कोरिया पहले ही धमकी दे चुका है कि उकसाए जाने पर वो पहले ही परमाणु हमला कर सकता है. यहां तक कि उसने ये भी धमकी दी है कि उसके सिर्फ तीन बम ही पूरी दुनिया का खात्मा कर सकते हैं.

1945 में अमेरिका ने जापान के दो शहर हिरोशिमा और नगासाकी पर हाइड्रोजन बम गिराए थे. युद्ध का इतिहास कुछ और होता अगर जापान भी परमाणु संपन्न देश होता. बहुत मुमकिन है कि जापान के परमाणु संपन्न होने की वजह से अमेरिका शायद ही ये सामरिक और मानवीय भूल करता.

NuclearBlast

उत्तर कोरिया ने जंग के इतिहास से बहुत कुछ सीखा है. अब उत्तर कोरिया अपनी परमाणु ताकत की बदौलत जंग के किसी भी अंजाम पर जाने के लिए तैयार है. पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान ने खुद माना कि उत्तर कोरिया की परमाणु तकनीक पाकिस्तान से बहुत बेहतर और आधुनिक है.

तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरा करने के लिए अड़ा उत्तर कोरिया न तो समझौते के मूड में है और न ही झुकने के.

15 सितंबर को उत्तर कोरिया ने इंटरकॉन्टिनेंटल रेंज बैलिस्टिक मिसाइल IRBM का टेस्ट किया जिसके जापान के ऊपर गुजरने से वहां अफरातफरी मच गई थी. पिछले तीन हफ्तों में उत्‍तर कोरिया की ओर से दागी गई ये दूसरी मिसाइल थी. इससे पहले 3 सितंबर को उत्तर कोरिया ने छठा न्यूक्लियर टेस्ट भी किया था. north korea ballistic missile

उत्तर कोरिया अब न सिर्फ अमेरिका के सामने ताल ठोंक रहा है बल्कि युद्ध के लिए ललकार भी रहा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी उत्तर कोरिया ने दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्षों के सामने अमेरिका को आगाह किया कि वो उसे सीरिया समझने की भूल न करें.

अमेरिकी खुफिया एजेंसिया और सेटेलाइट सर्विलांस भी उत्तरी कोरिया की परमाणु ताकत और मिसाइलों की अंतरमहाद्वीप उड़ान भरने की क्षमता का सही से आंकलन नहीं कर सके हैं.

north kkrea

एक दहशत खुद अमेरिका के भीतर भी है. अमेरिका के रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि उत्तर कोरिया की मिसाइलें अमेरिकी शहर को निशाना बनाने के करीब पहुंच चुकी हैं.

लेकिन अब अमेरिका को लग रहा है कि पानी सिर से ऊपर हो रहा है. उत्तर कोरिया को धमकाने के लिए अमेरिका ने मॉक बॉम्बिंग ड्रिल की. उसके चार स्टील्थ फाइटर जेट और 2 बमवर्षक विमानों ने कोरियाई प्रायद्वीप पर उड़ान भरी है. ये कार्रवाई उत्तरी कोरिया के एक्शन के जवाब के तौर पर देखी जा रही है. ऐसा लग रहा है कि इससे अब धीरे धीरे युद्ध शुरू होने की औपचारिकताएं पूरी हो रही हैं.

सबकी नजरें अब संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर होंगी. देखने वाली बात होगी कि ट्रंप अब किम जोंग के खिलाफ कर्रवाई के विकल्प पर क्या एलान करेंगे.

हालांकि कोरियाई प्रायद्वीप में एक दूसरा समीकरण उत्तर कोरिया के पक्ष में दिखाई दे रहा है. रूस और चीन की सेनाएं उत्तर कोरिया के पास संयुक्त नौसैनिक अभ्यास कर रही हैं जिसकी प्रतीकात्मक अहमियत काफी है. दक्षिण चीन सागर में चीन और रूस का यह पहला सैन्य अभ्यास है. ऐसे में कोरियाई प्रायद्वीप विश्वयुद्ध के लिए कुरुक्षेत्र बनने के करीब दिख रहा है. इसकी बड़ी वजह ये है कि संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया पर सैन्य आक्रमण को रूस और चीन कभी आखिरी विकल्प नहीं मानेंगे. दोनों ही देश बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में हैं. इन दोनों देशों के उत्तर कोरिया के साथ खड़े होने पर उत्तर कोरिया के मसले पर दुनिया दो हिस्सों में बंट सकती है.

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