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युद्ध के लिए आमादा उत्तर कोरिया की सनक से खतरे में दुनिया, अमेरिका को उकसाने से नहीं आएगा बाज

ट्रंप की धमकी के बाद उत्तर कोरिया का कोई भी परमाणु या मिसाइल परीक्षण कोरियाई प्रायद्वीप में आखिरी ही साबित होगा

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Sep 21, 2017 10:20 PM IST

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युद्ध के लिए आमादा उत्तर कोरिया की सनक से खतरे में दुनिया, अमेरिका को उकसाने से नहीं आएगा बाज

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद उत्तर कोरिया के पास एक मौका था कि वो खुद को अमेरिकी दादागीरी का शिकार बता सकता था. जिस तरह से ट्रंप ने उत्तर कोरिया की आबादी को तबाह करने की चेतावनी दी थी वो अमेरिका जैसे सुपरपावर देश से अपेक्षित नहीं थी. लेकिन उत्तर कोरिया ने हाथ आए मौके को एक बार फिर अपनी सनक से गंवा दिया. उसने ये साबित कर दिया कि वाकई उत्तर कोरिया दुनिया के लिए बड़ा खतरा है. अमेरिका की धमकी को उत्तर कोरिया ने कुत्ते के भौंकने के बराबर बताया है.

उत्तर कोरिया के विदेश मंत्री रि योंग हो ने कहा 'अमेरिका की धमकी कुत्ते के भौंकने की आवाज से ज्यादा कुछ नहीं है. अगर ट्रंप सोचते हैं कि वो कुत्ते के भौंकने की आवाज से हमें डरा देंगे तो वह गलतफहमी में जी रहे हैं. उत्तर कोरिया अमेरिका की धमकी से डरने वाला नहीं है'. उत्तर कोरिया की ये तीखी प्रतिक्रिया दुनिया को उसके लिए न तो युद्ध के पहले और न युद्ध के बाद सहानभूति जताने देगी.

नॉर्थ कोरिया ने 100 किलोटन के हाइड्रोजन बम का परीक्षण कर इस बार समूची दुनिया को हिला कर रख दिया. सवाल भूकंप के झटकों से बड़ा है जिससे दुनिया दहल गई है. अब सवाल ये नहीं है कि तीसरा विश्वयुद्ध छिड़ने पर दुनिया का क्या होगा बल्कि बड़ा सवाल ये है कि एक सनकी तानाशाह के हाथ में न्यूक्लियर ताकत आने के बाद दुनिया कितनी सुरक्षित है?

संयुक्त राष्ट्र में जब भी उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगते हैं तो वो उसके तुरंत बाद ही कोई परमाणु या मिसाइल परीक्षण कर अपने इरादे जता देता है. इस वक्त उत्तर कोरिया का अहंकार अब सिर चढ़ कर बोल रहा है. उस अहंकार में वो सबकुछ मिटा देने के लिए ही मिटने को भी तैयार है. युद्ध की ये सनक ही दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है.

इस बार फिर पूरी आशंका है कि ट्रंप की नामोनिशान मिटा देने की धमकी के बाद उत्तर कोरिया फिर कुछ ऐसा करेगा जो युद्ध का धमाका ही साबित होगा. साफ है कि ट्रंप की धमकी का उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता के ऊपर कोई असर नहीं पड़ा है. डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया को तबाह करने की धमकी देते हुए उसे अपराधियों का गैंग तक बताया था. लेकिन बड़ा सवाल ये भी है कि ट्रंप से ऐसे भाषण की उम्मीद भी किसी ने नहीं की थी. खुद अमेरिका में ही उनके भाषण को लेकर विरोध दिखाई दे रहा है. राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेट उम्मीदवार रहीं हिलेरी क्लिंटन ने ट्रंप के भाषण को खतरनाक बताते हुए कहा कि दुनिया के महान राष्ट्र के नेता को ऐसा संदेश नहीं देना चाहिए.

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ट्रंप ने अपने भाषण से उस 'लक्ष्मण रेखा' को खुद मिटा दिया जिसकी वजह से अमेरिका उत्तर कोरिया पर हमले से  बचते हुए दूसरे तरीकों से दबाव बढ़ाना चाह रहा था. लेकिन कूटनीतिक तौर पर प्रतिशोध में डूबे ट्रंप का संयुक्त राष्ट्र में दिया भाषण ही जंग के एलान का दस्तावेज़ न बन जाए. जाहिर तौर पर उत्तर कोरिया की तीखी प्रतिक्रिया साबित करती है कि उसे अमेरिकी धमकी से फर्क नहीं पड़ता और वो परमाणु कार्यक्रम जारी रखेगा. ऐसे में उत्तर कोरिया का कोई भी परीक्षण कोरियाई प्रायद्वीप में आखिरी ही साबित होगा.

डोनाल्ड ट्रंप किसी एक्शन फिल्म की तरह आग बरसाने से लेकर तबाह करने तक की धमकी दे चुके हैं. तब वक्त सिर्फ एक्शन का होगा क्योंकि सवाल ग्रेट अमेरिका के गौरव का भी होगा. ट्रंप नहीं चाहेंगे कि उनकी धमकी का माखौल बने. दोनों ही तरफ एक ज़िद दुनिया को महायुद्ध की तरफ धकेलने के लिए काफी होगी.

हालांकि अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों के जरिए लगाम कसने की कोशिश की. यहां तक की चीन ने भी परमाणु परीक्षण की निंदा कर प्रतिबंधों को मंजूरी दी. लेकिन उत्तर कोरिया के ऊपर चीन के दबाव का भी असर नहीं दिख रहा है. माना जाता है कि सर्वोच्च नेता किम जोंग के सत्ता में आने के बाद बीजिंग और प्योंगयोंग के रिश्तों में बर्फ जमना शुरू हो गई है. खुद एक बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को ये कहना पड़ा था कि ‘किसी को भी अपने निजी स्वार्थ के लिए एक इलाके को या फिर पूरी दुनिया को अराजकता की ओर धकेलने की इजाजत नहीं दी जाएगी.’

दक्षिण कोरिया की सरकारी समाचार सेवा योनहैप के मुताबिक उत्तर कोरिया ने रविवार को जिस परमाणु बम का परीक्षण किया है वो जापान के नागासाकी शहर पर 1945 में गिराए गए बम से चार-पांच गुना ज़्यादा शक्तिशाली है

कोरियाई प्रायद्वीप पर युद्ध भड़कने से चीन उन लाखों शरणार्थियों को लेकर सशंकित है जो कि उत्तर कोरिया से उसके यहां आ सकते हैं. अब चीन के लिए भी उत्तर कोरिया को लेकर हालात बेकाबू हैं. इसके बावजूद अगर उत्तर कोरिया पर अमेरिका हमला करता है तो चीन को उत्तर कोरिया का साथ देने के लिए मित्र संधि मजबूर कर सकती है. चीन का युद्ध में उतरना फिर विश्वयुद्ध की शुरुआत होगा जो कि सिर्फ एक देश के सनकी तानाशाह की देन होगा.

अब साफ है कि उत्तर कोरिया पर आर्थिक प्रतिबंधों से कोई असर नहीं होने वाला है. ऐसे में किम जोंग की एक गलती करोड़ों उत्तर कोरियाई जनता की जान खतरे में डालने का काम करेगी.

इस वक्त दोनों ही देश अपनी धमकियों में डायलॉग का खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं. अमेरिका कह रहा है कि 'वो उत्तर कोरिया पर इतनी आग बरसाएगा कि जिसे दुनिया ने देखा नहीं होगा'. उत्तर कोरिया अमेरिकी धमकी को कुत्ते के भौंकने के बराबर बता रहा है.  काश, कोई उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह को बॉलीवुड फिल्म का डायलॉग भी सुना पाता कि जब वक्त खराब आता है तो ऊंट पर बैठे आदमी को भी कुत्ता काट लेता है. इस वक्त वाकई उत्तर कोरिया का समय खराब शुरू हो चुका है.

 

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