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मोदी राज में मुसलमानों पर हमले बढ़े और ग्रोथ घटी: न्यूयार्क टाइम्स

न्यूयार्क टाइम्स ने अपने संपादकीय में मोदी सरकार की नीतियों और बढ़ती हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर सवाल खड़े किए हैं

Updated On: Jul 18, 2017 09:14 PM IST

FP Staff

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मोदी राज में मुसलमानों पर हमले बढ़े और ग्रोथ घटी: न्यूयार्क टाइम्स

गौरक्षा और बीफ के नाम पर भीड़ द्वारा मारपीट की घटनाओं की वजह से मोदी सरकार की अब विदेशों में भी आलोचना होने लगी है. अमेरिका के प्रसिद्ध अखबार न्यूयार्क टाइम्स ने अपने संपादकीय में मोदी सरकार की नीतियों और बढ़ती हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर सवाल खड़े किए हैं. इस लेख में यह भी कहा गया है कि मोदी सरकार के आने के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार में कमी आई है.

अखबार में लिखा है कि 2014 में नरेंद्र मोदी को बतौर प्रधानमंत्री मिली प्रचंड जीत उनके वादों और हिंदू राष्ट्रवादी छवि की ही देन हैं. उन्होंने सुदृढ़ अर्थव्यवस्था और लोगों के सुनहरे भविष्य को लेकर किए गए वादे पर चुनाव जीता.

मोदी राज में बढ़ी असहिष्णुता  

अखबार के मुताबिक ‘नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ग्रोथ काफी धीमी रही और नौकरियों को लेकर ध्यान नहीं दिया गया. उनके राज में असहिष्णुता फैलाई गई, जो भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के लिए खतरा है. जब से मोदी ने कार्यभार संभाल, तब से गौमांस के सेवन करने का आरोप लगाकर लोगों का मारा गया, जिनमें से अधिकतर मुस्लिम हैं.’

संपादकीय में यह भी लिखा गया कि ‘पीएम मोदी ने इस मामले पर सिर्फ पिछले महीने ही बोला. उस वक्त उन्होंने कुछ नहीं कहा जब उनकी सरकार ने बूचड़खानों के लिए गाय की बिक्री को लेकर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने तक खारिज कर दिया था.’

न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसे तरह के प्रतिबंध को भारत के लिए सांस्कृतिक कलंक कहा है. अखबार ने कहा कि ‘इस पेशे से मुस्लिम और निचली जाति के हिंदू पारंपरिक रूप से जुड़े हैं. यह भी मोदी की कथित प्राथमिकताओं के खिलाफ झटका है कि 16 बिलियन डॉलर की इंडस्ट्री ने पिछले वर्ष महज 4 बिलियन डॉलर का निर्यात किया है.’

इससे पहले भी न्यूयार्क टाइम्स ने बीजेपी नेता योगी आदित्यनाथ को यूपी का सीएम बनाने को लेकर निशाना साधते हुए लिखा था कि ‘योगी ने मुस्लिमों से बदला लेने के लिए ही युवाओं का संगठन हिंदू युवा वाहिनी बनाया है. मुस्लिमों को वह ‘दोपाया जानवरों की फसल’ करार देते हुए उनकी पैदावार पर रोक लगाने की बात करते हैं.’

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