S M L

पूर्ण सूर्यग्रहण: 99 साल बाद भारत-अमेरिका में एक साथ होगी रात

99 साल बाद अमेरिका में यह सूर्य ग्रहण पूरा दिखाई देगा, जिसको लेकर नासा के वैज्ञानिक काफी उत्साहित हैं

Updated On: Aug 22, 2017 04:01 PM IST

FP Staff

0
पूर्ण सूर्यग्रहण: 99 साल बाद भारत-अमेरिका में एक साथ होगी रात

साल 2017 में सोमवार दूसरी बार सूर्य ग्रहण दिखाई देगा.

वैज्ञानिक इन खगोलीय घटना से ब्रम्हांड और जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़ी अहम जानकारियां निकालने की कोशिश करते हैं. इस बार नासा के वैज्ञानिक सूर्य ग्रहण के कारण वायुमंडल में होने वाले बदलाव का अध्यन करेंगे. अमेरिका में 99 साल बाद पूर्ण सूर्यग्रहण है.

यानी भारतीय समयानुसार सोमवार रात 9 बजकर 16 मिनट से शरू होकर रात में 2 बजकर 34 मिनट तक भारत और अमेरिका दोनों जगह रात होगी.

यह ग्रहण अमेरिका के ऑरगेन तट पर सुबह 10.15 पर दिखना शुरू होगा और दक्षिण कैरोलिना के तट पर दोपहर दो बजे खत्म होगा. हालांकि भारत में इस दौरान रात रहेगी और यहां पर कहीं भी सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा. नासा के वैज्ञानिक इस दौरान सूर्य ग्रहण से जुड़े कई महत्वपूर्ण जानकारियां निकालने की कोशिश करेंगे.

सूर्य से जुड़े रहस्य

इस सूर्य ग्रहण के दौरान वैज्ञानिक खासतौर पर सूर्य के बाहरी परिमंडल का अध्यन करेंगे. आमतौर पर सूर्य की तेज रोशनी के कारण परिमंडल को देख पाना काफी मुश्किल होता है, लेकिन इस बार पूर्ण ग्रहण के कारण परिमंडल का अध्यन कर पाना आसान होगा. सूर्यग्रहण के दौरान नासा अंतरिक्ष के तापमान पर पड़ने वाले असर को समझने की कोशिश करेगा.

Solar-Eclipse

सौर ऊर्जा

सोमवार को करीब तीन घंटे के लिए सूर्य की रोशनी काफी कम रहेगी. इस दौरान अमेरिका के ग्रीड ऑपरेटर इस बात का अध्यन करेंगे कि अवरोधों के दौरान सौर्य ऊर्जा कैसे व्यव्हार करती है. जिससे वो मौसम में होने वाले बदलाव को बेहतर समझ पाएंगे.

आइंस्टीन का सिद्धांत

अल्बर्ट आइंस्टीन ने 1915 में अपने दिए हुए सिद्धांत में कहा था कि सूर्य ग्रहण के दौरान तारों के प्रकाश में झुकाव होता है. इस सिद्धांत को 1991 में ऑर्थर एडिगंटन ने साबित भी किया था.

हीलियम की खोज

1868 में फ्रांस के वैज्ञानिक पियरे जैनसेन ने सूर्य ग्रहण के दौरान हीलियम की खोज की थी. उन्होंने अपने स्पेक्ट्रोस्कोप से पहली बार हीलियम को देखा थ, जिसे उन्होंने सोडियम समझ लिया था. हालांकि बाद में इस तत्व को हीलियम नाम दिया था.

चांद से दूरी

लगभग 150 ईसा पूर्व के सूर्य ग्रहण के दौरान ग्रीक खगोल विज्ञानी हिपर्कसस ने बताया था कि चंद्रमा पूरी तरह से टर्की में सूर्य के साथ जुड़ा हुआ है, जबकि लगभग 80% सूरज मिस्र में करीब 1,000 किलोमीटर दूर था. इसके बाद उन्होंने पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी का पता लगाया था.

(साभार न्यूज़ 18)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi