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सूरज हुआ मद्धम फिर सूरज जलने लगा- ब्रह्मांड के अजूबे की कब सुलझेगी पहेली?

ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों से लिपटा हुआ एक ग्रह सूर्य जिसे पुराण से लेकर विज्ञान तक उसकी शक्ति, सामर्थ्य, ऊर्जा और तेज के चलते ग्रहों का राजा मानने को मजबूर हैं.

Updated On: Aug 13, 2018 10:07 PM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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सूरज हुआ मद्धम फिर सूरज जलने लगा- ब्रह्मांड के अजूबे की कब सुलझेगी पहेली?
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ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों से लिपटा हुआ एक ग्रह सूर्य. पुराण से लेकर विज्ञान तक सूर्य को अपनी शक्ति, सामर्थ्य, ऊर्जा और तेज के चलते ग्रहों का राजा माना जाता है. सूर्य की चमत्कारिक चमक और ताप की तीव्रता का चरम ही इसके उदय और अस्त को कौतूहल से देखने को मजबूर करता है. सृष्टि के अंधेरे को दूर करने वाला सूर्य ब्रह्मांड की अद्भुत पहेली है. सृष्टि को जीवन प्रदान करने वाला सूर्य मनुष्य की कल्पना की पहुंच से भी करोड़ों मील दूर है.

नासा का महामिशन - 'टच द सन'

लेकिन अब हजारों साल से दुनिया को उलझा कर रखने वाले सूर्य के ताप और ओज के सच को जानने की एक ऐतिहासिक कोशिश शुरू हो गई है. सूरज की भौतिकी को समझने के लिये दुनिया का पहला मिशन अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने लॉन्च किया है. इस महामिशन का नाम है 'टच द सन'.

'टच द सन' मिशन के तहत सूरज की सतह और कोरोना की जानकारी जुटाई जाएगी. नासा ने सूरज को करीब से छूने के लिये पार्कर सोलर प्रोब लॉन्च किया है. ये अंतरिक्ष यान छोटी सी कार के आकार के बराबर है. ये 190 किमी प्रति सेकंड की रफ्तार से सूरज की तरफ बढ़ रहा है. ये 85 दिनों में सूर्य की कक्षा में स्थापित होगा. इसकी सूरज से दूरी केवल 61 लाख किमी होगी. जबकि धरती से सूरज की दूरी 15 करोड़ किमी मानी जाती है.

वैज्ञानिक के सम्मान में यान का नाम

पार्कर प्रोब का नाम जाने-माने खगौलभौतिकिविद् यूजीन पार्कर के सम्मान में रखा गया है. यूजीन पार्कर ने ही सबसे पहले आज से साठ साल पहले अपनी एक थ्योरी से अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के समुदाय में खलबली मचा दी थी. पार्कर ने कहा था कि सूरज से चार्ज्ड पार्टिकल बाहर निकल कर अंतरिक्ष में घूमते हैं. लेकिन पार्कर की इस थ्योरी को उस वक्त वैज्ञानिक समुदाय ने खारिज कर दिया था. इसके बावजूद एक खगोलीय जर्नल के संपादक सुब्रमण्यन चंद्रशेखर ने पार्कर की रिसर्च को पब्लिश करने का साहस दिखाया था. सुब्रमण्यन चंद्रशेखर को 1983 में नोबल पुरस्कार भी दिया गया.

पहली दफे किसी जीवित व्यक्ति के नाम पर किसी अंतरिक्ष यान का नाम रखा गया है. अब यही पार्कर प्रोब सूरज के सबसे करीब पहुंचने वाला पहला यान होगा. पार्कर यान ये जानने की कोशिश करेगा कि आखिर सूर्य का कोरोना इसकी सतह से इतना ज्यादा गर्म क्यों होता है?

पार्कर प्रोब को जला नहीं सकेगा सूरज

इस ऐतिहासिक मिशन के लिये पार्कर सोलर प्रोब को सूर्य के वायुमंडल में प्रवेश करना होगा. उसे सूरज की भीषण गर्मी और विकिरण का सामना करना पड़ेगा. सूरज के भीषण ताप को झेल सकने के लिये पार्कर यान को 4.2 इंच मोटे कार्बन फाइबर प्लेट्स का कवच पहनाया गया है. ताकि ये जला कर राख कर देने वाले तापमान को सहते हुए भी सूर्य के कोरोना के चक्कर लगा सके.

'टच द सन' मिशन सूर्य के सबसे करीब पहुंचने वाला दुनिया का पहला मिशन है. इससे पहले हिलियोस-2 नाम का यान सूरज से करीब 4.3 करोड़ी किमी की दूरी से गुजरा था. सूर्य की सतह का तापमान दस हजार डिग्री फारेनहाइट है जबकि इसके कोरोना का तापमान लाखों डिग्री फारेनहाइट में है.

सूरज से 61 लाख किमी दूर पार्कर यान मोटी शील्ड की वजह से दस लाख फारनेहाइट डिग्री की तपिश के बावजूद केवल 2500 डिग्री गर्म होगा. इस पर विकिरण का असर नहीं पड़ेगा. सूरज के वायुमंडल में प्रवेश से पहले पार्कर प्रोब को मंगल की कक्षा में प्रवेश करना होगा और फिर शुक्र का भी चक्कर लगाना होगा.

पार्कर सोलर प्रोब के साथ ऐसे कई उपकरण हैं जो सूरज के भीतर और आसपास के वायुमंडल का अध्ययन करेंगे. 7 साल के दौरान पार्कर यान सूरज के वायुमंडल कोरोना का करीब से अध्यन करेगा  और 24 बार गुजरेगा.

धरती पर मंडराता सौर तूफान का खतरा

दरअसल सूरज में उठने वाले सौर तूफानों की जानकारियां जुटाना धरती की सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है. सूरज से निकलने वाले विकिरण और सौर आंधियों का धरती पर सीधा असर पड़ता है. अमूमन सूरज से उठने वाली तूफानी लहरों के धरती से टकराने की आशंकाएं जताई जाती रही हैं. ये तूफान तब उठते हैं जब सूरज की सतह पर जोरदार धमाके होते हैं.इन विस्फोटों से भारी मात्रा में चुंबकीय ऊर्जा निकलती है जो आग की लपटों की तरह दिखाई देती है. इसमें बेहद सूक्ष्म न्यूक्लियर पार्टिकल होते हैं और इनके ब्रह्मांड में फैलने से न्यूक्लियर रेडिएशन होता है.

इन सोलर तूफानों को लेकर धरती पर विनाशकारी खतरों की आशंकाएं भी जताई गई हैं. ये तक माना गया है कि सोलर तूफान की वजह से धरती के सैटेलाइट्स, मोबाइल, इंटरनेट जैसी सुविधाएं तबाह हो सकती हैं.

फिलहाल, धरती पर आने और भविष्य में टकराने वाले सोलर स्टॉर्म या सोलर तूफान से बचने के लिये कोई रास्ता नहीं है. ऐसे में सूरज की सतह और कोरोना से पार्कर यान द्वारा जुटाई गई एक-एक जानकारी भविष्य में बहुत अहम साबित हो सकती है.

दरअसल, साल 1973 में सोलर तूफान की वजह से कनाडा को भीषण पावर संकट का सामना करना पड़ा था. तकरीबन 60 लाख लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हो गए थे.

हर 11 साल बाद सोलर मैक्ज़िमम की खगोलीय घटना सूरज में घटती है. इस दौरान सूर्य की सतह से सौर लपटें उठती हैं. इन्हें सोलर सुनामी भी कहा जाता है. सोलर सुनामी की वजह से अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट सिस्टम के ध्वस्त होने की आशंका जताई जाती रही है. नासा कई दफे सोलर सुनामी की चेतावनी जारी कर चुका है. साल 2003, साल 2010 और साल 2017 में सोलर सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी.

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो भी सूरज को समझने के लिये आदित्य-1 उपग्रह छोड़ने की तैयारी में है. वेदों में सूरज को आदित्य का नाम दिया गया है. आदित्य उपग्रह-1 सूरज  की कॉस्मिक किरणों, सौर तूफान और विकिरण की रिसर्च करेगा. अगर आदित्य का प्रक्षेपण कामयाब रहा तो ये भी मंगल मिशन और चंद्रयान-1 की तरह मील का पत्थर साबित होगा.

बहरहाल, मनुष्य अगर अपनी क्षमताओं को सीमित समझ लेता या फिर अपनी सीमाओं के आगे सरेंडर कर देता तो वो धरती के ही रहस्य को कभी जान नहीं पाता. लेकिन मनुष्य की खोज और उत्सुकता की उड़ान ने ही उसे सीमित क्षमताओं के बावजूद अबूझ अंतरिक्ष में भी कदम रखने का मौका दिया है. ऐसे में एक दिन ये रहस्य भी खुल ही जाएगा कि आखिर सूरज मद्धम क्यों होता है और करोड़ों साल से ऐसे क्यों जल रहा है.

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