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'मोदी सरकार ने विदेशों में बसे सिखों की 'ब्लैक लिस्ट' को लगभग खत्म किया'

काली सूची में शामिल अप्रवासी भारतीय सिखों पर 1980-90 के दशक में खालिस्तान आंदोलन से कथित रूप से जुड़े रहने की वजह से भारत आने पर प्रतिबंध है. यह सूची विभिन्न स्तरों पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तैयार की गई थी

Updated On: May 21, 2018 05:13 PM IST

Bhasha

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'मोदी सरकार ने विदेशों में बसे सिखों की 'ब्लैक लिस्ट' को लगभग खत्म किया'

नरेंद्र मोदी सरकार ने विदेश में बसे सिखों की उस ‘काली सूची’ को लगभग खत्म कर दिया है जो उन्हें भारतीय वीजा देने से इनकार करती है. अमेरिका के दौरे पर गए बीजेपी के महासचिव राम माधव ने यहां सिख समुदाय के लोगों को इसकी जानकारी दी है.

काली सूची में शामिल अप्रवासी भारतीय सिखों पर 1980 और 1990 के दशक में खालिस्तान आंदोलन से कथित रूप से जुड़े रहने की वजह से भारत आने पर प्रतिबंध है. यह सूची विभिन्न स्तरों पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा तैयार की गई थी.

सूची में नाम और उन्हें भारतीय वीजा दिए जाने से इनकार अमेरिका में बसे सिखों के बीच असंतोष की एक अहम वजह है.

वाशिंगटन डीसी के उपनगर मैरीलैंड के सबसे पुराने गुरुद्वारे में सिखों की संगत को संबोधित करते हुए राम राम माधव ने कहा, ‘हमने बेहद अमानवीय काली सूची को लगभग खत्म कर दिया है. जो इस समुदाय को भारत दौरे के उनके अधिकार, हरमंदिर साहब के दौरे के उनके अधिकार, अपने रिश्तेदारों और करीबियों से मिलने के उनके अधिकार से वंचित करती है.’

उन्होंने कहा, ‘यह (काली) सूची लगभग पूरी तरह हटा दी गई है. महज कुछ नाम (सूची में) बचे हैं. यह नाम भी चले जाएंगे.’

इस साल की शुरुआत में अमेरिका में कुछ सिख गुरुद्वारों ने घोषणा की थी कि वो भारतीय सरकार के किसी प्रतिनिधि को अपनी संगत को संबोधित नहीं करने देंगे. बड़ी संख्या में गुरुद्वारों ने हालांकि बाद में ऐसे कदम से इनकार किया था.

राम माधव ने कहा कि उनकी सरकार ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का नेतृत्व करने वालों की अग्रिम जमानत रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. जिससे उन्हें सलाखों के पीछे डाला जा सके. इन दंगों में 3000 से ज्यादा लोग मारे गए थे.

उन्होंने भारतीय अमेरिकी समुदाय के लोगों को भी संबोधित किया और कहा कि बीजेपी देश (भारत) के सभी 29 राज्यों में शासन करना चाहती है.

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