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2013 के बाद 2018 में मालदीव राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान शुरू

चुनाव में राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन का उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी इब्राहिम मोहम्मद सोलिह से मुकाबला है

Updated On: Sep 23, 2018 10:48 AM IST

Bhasha

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2013 के बाद 2018 में मालदीव राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान शुरू

मालदीव में विवादास्पद राष्ट्रपति चुनाव के लिए रविवार सुबह 8 बजे से मतदान शुरू हो गए हैं. अधिकारियों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने बताया कि सुबह से ही सैकड़ों पुरुष और महिलाएं अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए राजधानी माले में मतदान केंद्रों पर कतारों में खड़े दिखाई पड़े.

चुनाव में राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन का उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी इब्राहिम मोहम्मद सोलिह से मुकाबला है. यामीन दूसरा कार्यकाल हासिल करने के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं. उन पर विरोधियों के दमन और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं.

इसे आज की ही घटना से समझा जा सकता है कि मतदान शुरू होने के कुछ ही घंटे पहले पुलिस ने विपक्ष के प्रचार मुख्यालय पर छापा मारा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जहां मालदीव के विपक्षी नेता मोहम्मद सोलिह को भारत और पश्चिमी देशों का समर्थन हासिल है. वहीं यामीन का समर्थक चीन है.

मालदीव में आए राजनीतिक संकट के बाद कैसे संभव हुआ राष्ट्रपति चुनाव?

बीते फरवरी माह के दौरान मालदीव गहरे राजनीतिक संकट से जूझ रहा था. साल 2012 में मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति मुहम्मद नशीद के तख्तापलट के बाद अब्दुल्ला यामीन राष्ट्रपति बने. 59 वर्षीय यामीन 2013 से सत्ता पर काबिज हैं. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अपने विरोधियों को निशाना बनाया.

इसी क्रम में नशीद को 2015 में आतंकवाद के आरोपों में 13 साल जेल की सजा भी हो गई, लेकिन इलाज के लिए ब्रिटेन गए नशीद ने वहीं राजनीतिक शरण ले ली और लौटे नहीं.

मुहम्मद नशीद को भारत समर्थक माना जाता है. जबकि जैसा हमने पहले ही बताया यामीन चीन समर्थक है.

इस घटनाक्रम के बीच में मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने नशीद समेत 9 राजनीतिक बंदियों को रिहा करने का आदेश दे दिया. कोर्ट ने अब्दुल्ला यामीन की पार्टी से बागी 12 सांसदों को भी बहाल करने का आदेश दिया.

इस फैसले का परिणाम यह होता कि यामीन सरकार अल्पमत में आ जाती और नीशाद की पार्टी को वापस सत्ता का सिंहासन मिल जाता, लेकिन अब्दुल्ला यामीन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने से इनकार कर दिया और सेना को स्पष्ट आदेश दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की नाफरमानी करे.

बाद में युद्ध जैसी स्थिती बनने के बाद राष्ट्रपति अब्दुल्ला यमीन ने संयुक्त विपक्ष को अपना उम्मीदवार इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को खड़ा करने की इजाजत दे दी और चुनाव करवाया जा रहा है.

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